
विनियोजित बजट फागुन मसान्त तक खर्च करने का प्रावधान
अर्थ मंत्रालय ने चालू आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के बजट कार्यान्वयन के लिए मार्गदर्शन जारी करते हुए विनियोजित बजट को फागुन मसान्त तक खर्च करने का प्रावधान किया है। व्यय न कर पाने वाले बजट को २०८३ चैत १५ तक अर्थ मंत्रालय में लौटाना होगा, तथा एक ही कार्यक्रम अगर दोहराया गया हो तो केवल एक कार्यान्वयन किया जाएगा, यह मार्गदर्शन में उल्लेखित है। प्रदेश और स्थानीय तहों को सशर्त अनुदान राशि उसी क्षेत्र में खर्च कर, भौतिक प्रगति विवरण निर्धारित समय पर संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
४ साउन, काठमांडू। चालू आर्थिक वर्ष का विनियोजित बजट आगामी फागुन मसान्त तक खर्च करना आवश्यक है। अर्थ मंत्रालय ने आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के बजट कार्यान्वयन के लिए मार्गदर्शन जारी करते हुए यह व्यवस्था की है। मंत्रालय के अनुसार आर्थिक वर्ष के फागुन तक विनियोजित बजट खर्च हो जाना चाहिए। खर्च नहीं होने पर बजट को आगामी चैत १५ तक मंत्रालय में वापस करना होगा।
मंत्रालयगत बजट सूचना प्रणाली में समाविष्ट और स्वीकृत कार्यक्रम एवं खर्च करने के अधिकार को मानते हुए संबंधित कोष एवं लेखा नियंत्रक कार्यालय द्वारा बजट निकासी की व्यवस्था है। वार्षिक स्वीकृत कार्यक्रम के लिए विनियोजित बजट फागुन मसान्त तक न खर्च होने या शेष राशि रहने पर इसे चैत १५ तक अर्थ मंत्रालय को वापस करना अनिवार्य बताया गया है।
२०८३/८४ के स्वीकृत बजट तथा कार्यक्रमों में किसी आयोजन के दोहरे प्रविष्टि होने पर केवल एक कार्यान्वयन किया जाएगा। दोहराए गए कार्यक्रमों को रोककर अर्थ मंत्रालय में बजट समर्पित करना अनिवार्य होगा।
सम्पूरक अनुदान और विशेष अनुदान से प्रदेश या स्थानीय तहों में संचालित आयोजनाओं के लिए बजट और गतिविधि संशोधित की जा सकेगी। इस प्रक्रिया में कार्यक्रम के क्षेत्र और उद्देश्य पर प्रभाव न डालते हुए राष्ट्रीय योजना आयोग की सिफारिश के अनुसार अर्थ मंत्रालय को संशोधन हेतु भेजा जाएगा।
प्रदेश और स्थानीय तहों को सशर्त अनुदान राशि उसी क्षेत्र की योजनाओं के लिए खर्च करनी होगी। कार्यक्रम अवधि का विवरण, प्रक्रिया, खर्च का अनुमान एवं कार्ययोजना, मासिक नकद प्रवाह विवरण और संबंधित प्रदेश सभा, गाउँसभा या नगरसभा से पारित राजस्व एवं खर्च अनुमान को साउन मसान्त तक संबंधित कोष एवं लेखा नियंत्रक कार्यालय में जमा करना होगा।
सशर्त अनुदान अंतर्गत वित्तीय हस्तांतरण राशि की भौतिक प्रगति और खर्च विवरण को मंसिर १५, चैत १५ और असार १५ तक संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत करना आवश्यक है। वार्षिक आर्थिक विवरण अगले वर्ष साउन मसान्त तक संबंधित कार्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
विदेशी सहायता सहित सशर्त अनुदान कार्यक्रमों के लिए वित्तीय समझौता और आयोजन कार्यान्वयन निर्देशिका में उल्लिखित प्रावधानों का पालन करना आवश्यक होगा। समझौते और निर्देशिका के अनुसार कार्यान्वयन न होने पर दाता निकाय से खर्चों की पुनर्भुगतान नहीं मिल पाएगी, इसलिए इसका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। साथ ही संबंधित कागजात प्रदेश और स्थानीय तहों को उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। सहायता प्रदान करते समय निर्धारित समयसीमा में संबंधित मंत्रालय, पुनर्भुगतान मांगने वाले निकाय और कोष एवं लेखा नियंत्रक कार्यालय को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
विनियोजन ऐन २०८३ के अनुसार एक ही स्तर के बजट में समाविष्ट कार्यक्रमों का संचालन यदि दूसरे स्तर से किया जाता है तो लेखा संघीय नियमों के अनुसार आंतरिक एवं अंतिम लेखा परीक्षण कराया जाएगा। स्वीकृत वार्षिक कार्यक्रमों में बजट वाले कार्यक्रमों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश, निर्देशिका, मापदंड या मार्गदर्शन अगर जरूरत हो तो साउन मसान्त तक तैयार कर वेबसाइट पर सात दिन के अंदर प्रकाशित करना होगा। अतिरिक्त आर्थिक प्रतिबद्धता उत्पन्न होने पर अर्थ मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति जरुरी होगी।
विनियोजन ऐन २०८३ के तहत स्वीकृत वार्षिक आयोजन कार्यान्वयन हेतु आवश्यक अस्थायी दरबन्दी मंत्रालय की सहमति से साउन मसान्त तक मन्त्रिपरिषद की मंजूरी प्राप्त करनी होगी। खरिद प्रक्रिया में बहुवर्षीय प्रतिबद्धता वाली योजनाओं को मध्यमकालीन व्यय संरचना में शामिल करना अनिवार्य है। विदेशी सहायता योजनाओं के लिए सहयोग समझौतों की सीमा के अंतर्गत खरिद प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।
विदेशी ऋण या अनुदान समझौता प्रभावी न होने तक उस आयोजन के लिए विनियोजित विदेशी स्रोत एवं सम्पूरक कोष शीर्षक में रोक रखा जाएगा। पूर्व प्रभावी वित्तीय समझौता होने पर अर्थ मंत्रालय की सहमति से भुगतान किया जा सकेगा। विदेशी स्रोत की बजट निकासी से पहले इससे राशि प्राप्ति सुनिश्चित करनी होगी। नए आयोजन और कार्यक्रम प्रस्तावित होने पर वित्तीय समझौता प्रभावी होने के बाद ही खर्च संभव होगा। भुगतान विधि में परिवर्तन पर लिखित रूप में संशोधन कर साउन मसान्त तक भेजना होगा।
पुनर्भुगतान निर्देशिका के अनुसार नियमित पुनर्भुगतान मांगना आवश्यक होगा। आयोजन प्रबंधन कार्यालय द्वारा मांगी गई जानकारी महालेखा नियंत्रक कार्यालय को अनिवार्य रूप से सूचित करनी होगी। विदेशी ऋण के पुनर्भुगतान विवरण सार्वजनिक ऋण प्रबंधन कार्यालय को उपलब्ध कराना होगा। निर्धारित समय में पुनर्भुगतान प्रक्रिया शुरू न होने पर अगले त्रैमासिक निकासी पर रोक लगेगी।
आयोजन और कार्यक्रम के कार्यान्वयन में संभावित वित्तीय जोखिम का आकलन कर जोखिम न्यूनीकरण के उपाय अपनाने होंगे। बड़े पूर्वाधार और योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए वित्तीय जोखिम प्रबंधन प्रणाली को मजबूत कर पूंजीगत व्यय में सुधार का प्रावधान किया गया है।