
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के लिए ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा है कि यह समझौता दोनों देशों के व्यावसायिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। परमाणु तकनीक हस्तांतरण से संबंधित यह समझौता अमेरिकी कांग्रेस में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
७ सावन, काठमाण्डू। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के संबंध में एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस जानकारी को सार्वजनिक किया है। माना जा रहा है कि यह वाशिंगटन और रियाद के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने बुधवार को इस समझौते को ‘ऐतिहासिक’ बताया और कहा कि अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब को परमाणु तकनीक उपलब्ध कराएंगी।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, इस समझौते में 1954 के ‘एटॉमिक एनर्जी एक्ट’ की धारा 123 के तहत होने वाला ‘123 समझौता’ और संबंधित द्विपक्षीय परमाणु सुरक्षा समझौता शामिल है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने विज्ञप्ति में कहा, ‘ये समझौते अमेरिका और सऊदी अरब के व्यावसायिक संबंधों को और अधिक मजबूत करेंगे, दोनों देशों में समृद्धि को बढ़ावा देंगे और विदेशों में हमारे सहयोगियों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करते हैं।’
कुछ अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने इस समझौते के अनुसार सऊदी अरब को अमेरिका से परमाणु ईंधन आयात किए बिना अपने देश में यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलने का उल्लेख किया है। हालांकि, अमेरिकी ऊर्जा विभाग की जारी विज्ञप्ति में यूरेनियम संवर्धन से संबंधित कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। यदि यह समाचार सही निकलते हैं, तो इस समझौते को अमेरिकी कांग्रेस में कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते से अमेरिका में रोजगार सृजन, वैश्विक परमाणु अप्रसार मानकों को मजबूत करने और रियाद के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने की उम्मीद जताई है।