
ब्रिटेन में 210 मिलियन वर्ष पुरानी ‘दौड़ने वाली मगरमच्छ’ के जीवाश्म मिले
वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन के ग्लॉस्टर क्षेत्र में मगरमच्छ की एक अत्यंत दुर्लभ और नई प्रजाति का पता लगाया है। लगभग 210 मिलियन वर्ष पुराने ट्राएसिक युग के इस जीव की विशेषता यह है कि यह आज के मगरमच्छों की तरह जलाशयों में निवास नहीं करता था, बल्कि भूमि पर अत्यंत तीव्र गति से दौड़ने में सक्षम था, जैसा कि शोध में सामने आया है।
इस जीव की शारीरिक बनावट आधुनिक ग्रेहाउंड कुत्ते से मिलती-जुलती है और अपने लंबे पैरों की मदद से यह शुष्क मैदानों में छोटे जानवरों का शिकार करता था।
वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति का नाम ‘गालाहाडोसुचस जोन्सी’ रखा है। यह नाम आर्थरियन दंतकथाओं के पात्र गालाहाड और इस अध्ययन के मुख्य लेखक इवान बोदेनहैम के भौतिक विज्ञान शिक्षक डेविड राइस जोन्स के सम्मान में दिया गया है।
लंदन स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ता एवं पीएचडी छात्र इवान ने बताया कि उनके शिक्षकों ने विज्ञान के प्रति उनकी रुचि और प्रेरणा जगाई, जिसके कारण यह खोज संभव हो सकी।
दक्षिण वेल्स और दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड की गुफाओं में पाए गए जीवाश्मों के सूक्ष्म अध्ययन से पता चला कि यह जीव, जिसे टेरेस्ट्रिसुचस के मुकाबले 13 महत्वपूर्ण पहलुओं में भिन्न पाया गया है, उससे अलग है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज ट्राएसिक-जुरासिक महाविनाश से ठीक पहले के पारिस्थितिक तंत्र को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ज्वालामुखीय विस्फोटों और जलवायु परिवर्तन के कारण कई प्रजातियां विलुप्त होने से पहले ऐसे जीव किस तरह अनुकूलित हुए थे, यह जानना भविष्य में पृथ्वी पर आने वाली पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने में सहायक होगा।