
विश्व मौसम दिवस मनाते हुए बढ़ते तापमान से बढ़ती आपदाएँ
समाचार सारांश
संपादकीय समीक्षा सहित तैयार।
- आज 9 चैत्र, विश्व मौसम दिवस का 76वां संस्करण नेपाल समेत विश्व भर ‘आज की निगरानी, कल की सुरक्षा’ मूल नारा के साथ मनाया जा रहा है।
- इसिमोड की रिपोर्ट के अनुसार हिंदुकुश हिमालय में हिमपात पिघलने की दर 65 प्रतिशत बढ़ी है और इस शताब्दी के अंत तक 30 से 50 प्रतिशत हिम गिरने का खतरा है।
- नेपाल में जलवायु जनित आपदाओं के कारण हर वर्ष औसतन 250 लोगों की मृत्यु होती है और लगभग 29 अरब रुपये का आर्थिक नुकसान होता है, यह तथ्य गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक किया है।
9 चैत्र, काठमांडू। ‘आज की निगरानी, कल की सुरक्षा’ इस मूल नारे के साथ आज नेपाल समेत विश्व भर में 76वां विश्व मौसम दिवस मनाया जा रहा है। विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यू.एम.ओ.) की स्थापना दिवस के अवसर पर मनाए जाने वाले इस वर्ष के दिवस ने जलवायु परिवर्तन से बढ़ते जोखिम और सटीक पूर्वसूचना प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया है।
बदलते जलवायु और इसके कारण जनधन पर पड़ते गंभीर प्रभाव के कारण इस वर्ष का दिवस विशेष महत्व प्राप्त कर गया है।
पहाड़ों में गंभीर संकट
नेपाल में मुख्यालय वाले अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय विकास केंद्र (इसिमोड) की हाल ही में जारी रिपोर्ट ने हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र में हिम पिघलने की भयावह दर को उजागर किया है। सन 2011 से 2020 के दशक में, पिछले दशक की तुलना में हिम पिघलने की दर में 65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, इसिमोड की रिपोर्ट में कहा गया है।
यदि यही स्थिति जारी रही, तो इस शताब्दी के अंत तक हिमालय के 30 से 50 प्रतिशत हिम गायब हो सकते हैं और ‘एशिया के वाटर टावर’ कहलाने वाले नदीनालों के सूखने का खतरा है, ऐसा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है।

इसिमोड के अनुसार तीव्र हिम पिघलने से नेपाल के हिमताल फटने के उच्च जोखिम में हैं, जो तटीय निचले इलाकों में लाखों लोगों और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए हमेशा खतरा साबित हो सकते हैं।
नेपाल सरकार के गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, जलवायु जनित आपदाओं के कारण नेपाल में हर साल जनधन का व्यापक नुकसान होता है। बाढ़, भूस्खलन, और तूफान जैसी जलवायु जनित आपदाओं के कारण हर वर्ष औसतन 250 लोग अपनी जान गंवाते हैं। पिछले एक दशक में ही 5,600 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है।
सन् 2012 से 2024 तक 44,000 से अधिक आपदा घटनाएँ हुई हैं, जिनमें 42,000 से अधिक भौतिक संरचनाओं जैसे घर, विद्यालय, पुल आदि को नुकसान पहुंचा है।
इसके कारण नेपाल को हर साल लगभग 29 अरब नेपाली रुपये का आर्थिक नुकसान होता है, जो नेपाल की कुल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.25 प्रतिशत है।
चरम मौसमी घटनाएँ
विश्व मौसम संगठन के अनुसार, सन् 2025 अब तक का तीसरा सबसे गर्म वर्ष रहा है। औद्योगिक क्रांति से पूर्व की तुलना में पृथ्वी का तापमान 1.48 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव मानसून के पैटर्न में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। कभी अतिवृष्टि और कभी सूखे की स्थिति उत्पन्न हो रही है। तराई क्षेत्र में गर्म हवाओं की लहर (लू), समुद्र तल में वृद्धि, और शक्तिशाली चक्रवातों का खतरा भी बढ़ गया है।
इसी कारण इस वर्ष का नारा कहता है कि प्रभावी पूर्वसूचना प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) को प्रभावी और सबके लिए सुलभ बनाना क्षति को कम करने का मुख्य उपाय है। नेपाल ने सन् 2027 तक ‘सभी के लिए पूर्वसूचना’ पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों के अनुसार अत्याधुनिक रडार और मौसम स्टेशन के माध्यम से दी जाने वाली सटीक जानकारी किसानों से लेकर आम जनता तक सुरक्षित रहने में मदद करेगी। हालांकि, इसिमोड जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान वृद्धि में मुख्य भूमिका निभाने वाले हरितगृह गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए बड़े देशों को जल्द कदम उठाना आवश्यक है।