
फेवाताल के मापदंड में बालेन और धनराज की भूमिका
पोखरा महानगरपालिकाने फेवाताल के मापदंड के अंतर्गत आने वाली लगभग ३२ संरचनाओं को डोज़र द्वारा ध्वस्त कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने फेवाताल के ६५ मीटर के मापदंड को कायम रखते हुए छह महीने के भीतर इन संरचनाओं को हटाने का आदेश दिया है। फेवाताल के क्षेत्रफल में वृद्धि हुई है और प्रदूषित भूखंडों की पहचान कर मुआवजा देने का कार्य चल रहा है। २१ चैत, पोखरा।
फेवाताल के पानी में प्रवेश कर सकने वाली संरचनाओं को हटाने के उद्देश्य से शनिवार सुबह पोखरा महानगरपालिकाक टीम खपौंदी में पहुंची, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ। राज्य की उदासीनता और कमजोर कानून का फायदा उठाते हुए फेवाताल के किनारे बनी संरचनाओं पर डोज़र चलाया गया, जिससे कई लोग आश्चर्यचकित रह गए। जब अधिकांश लोग घरों में सो रहे थे, तभी डोजर ने कुछ हिस्सों को तोड़कर बाकी सामान निकालने और स्थान खाली करने की चेतावनी दी।
पोखरा महानगरपालिक के डोजर लेकर आने पर स्थानीय लोगों ने विरोध किया। उन्होंने महानगर के इस कदम के खिलाफ खपौंदी में सड़क को अस्थायी रूप से अवरुद्ध कर विरोध जताया। बिना सूचना दिए तोड़फोड़ करने पर वे नाराज थे। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) को फेवाताल का स्थल अध्ययन कर स्थिति समझने के लिए भी सुझाव दिया गया था, जबकि मेयर धनराज आचार्य के विरोध में भी आवाज उठी।
सर्वोच्च न्यायालय ने २०८० असार ४ को फेवाताल के लिए ६५ मीटर के मापदंड को लागू करने का आदेश दिया था। हालांकि, २०७८ चैत १६ को पोखरा महानगरपालिका ने इस मापदंड को घटाकर ३० मीटर करने का निर्णय लिया, जिसके विरुद्ध याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में न्यायाधीश कुमार रेग्मी और हरिप्रसाद फुयाँल की इजलास ने मुख्य सरकार को चार आदेश जारी किए थे।