
संसद में तटस्थ सभामुख और सशक्त प्रतिपक्ष की तलाश
सोमवार प्रतिनिधिसभा में ११ सांसदों ने भाग लेते हुए नव निर्वाचित सभामुख डोलप्रसाद अर्याल को शुभकामनाएँ दीं। रास्वपा के सांसद मनिष झा ने संसद को गुरुकुल और विश्वविद्यालय के समान बनाने तथा सभामुख से तटस्थ भूमिका निभाने की अपेक्षा व्यक्त की। नेपाली कांग्रेस के सांसद अर्जुननरसिंह केसी ने १६४२ के इंग्लैंड के उदाहरण से सभामुख की तटस्थता और उनके विशेषाधिकारों के महत्त्व को समझाया। २४ चैत, काठमाडौं।
सोमवार को प्रतिनिधिसभा के विशेष सत्र में लगभग एक घंटे तक ११ सांसदों ने हिस्सा लिया। सभी ने नव निर्वाचित सभामुख डोलप्रसाद अर्याल को शुभकामनाएँ दीं तथा भविष्य में तटस्थ भूमिका निभाने की सलाह भी दी। सांसदों ने सभामुख अर्याल को शुभकामनाएं देते हुए इस आशंका व्यक्त की कि संसद कमजोर न हो, सरकार संसद की आवाज सुने, और कमजोर प्रतिपक्ष की आवाज दबाई न जाए। ऐसे विषयों पर चर्चा के मद्देनजर सभामुख की भूमिका पर आवाज उठने लगी।
सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद भी इस चर्चा में शामिल हुए। रास्वपा के सांसद मनिष झा और गणेश पराजुली के साथ नेपाली कांग्रेस के सांसद अर्जुननरसिंह केसी ने सांसदों और सभामुख के विशेषाधिकारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं और नेपाल के अतीत के उदाहरणों के माध्यम से संसद सदस्यों की अपेक्षित भूमिकाओं की व्याख्या की।
सभामुख अर्याल ने अपने कर्तव्य की तटस्थता बनाए रखने की प्रतिबद्धता कई बार व्यक्त की है। बैठक शुरू होने से पहले भी उन्होंने निष्पक्ष समन्वयकारी भूमिका निभाने का संकल्प जाहिर किया। नेपाली कांग्रेस के सांसद अर्जुननरसिंह केसी ने तटस्थ सभामुख के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “सभामुख को अपने विशेषाधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए, यही मूल रूप से तटस्थता कहलाती है।”