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एप्पल के खिलाफ यूट्यूब क्रिएटर्स ने कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दायर किया

तीन प्रमुख यूट्यूब क्रिएटर्स ने कैलिफोर्निया की अदालत में एप्पल के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दायर किया है। उनके अनुसार, एप्पल ने यूट्यूब की सुरक्षा प्रणाली को उल्लंघन करते हुए लाखों वीडियो कंटेंट को अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग किया है। यूट्यूब क्रिएटर्स टेड इंटरटेनमेंट, मैट फिशर और गल्फहोलिक ने एप्पल पर कॉपीराइट कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए यह मामला दर्ज किया है।

उनका दावा है कि एप्पल ने अपने जेनेरेटिव एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए यूट्यूब की वीडियो सामग्री का अवैध रूप से उपयोग किया है। मुकदमा दायर करने वाले क्रिएटर्स ने कहा है कि एप्पल ने यूट्यूब की तकनीकी सुरक्षा उपायों (टीपीएम) का उल्लंघन करते हुए “पांडा-70 एम” नामक डेटासेट के माध्यम से 30 लाख से अधिक वीडियो क्लिप्स तक अवैध पहुंच हासिल की। उन्होंने यूट्यूब कंटेंट के इस अनधिकृत उपयोग को रोकने और क्षतिपूर्ति की मांग के लिए अदालत का रुख किया है।

एप्पल पर आरोप है कि उसने स्वचालित उपकरणों का प्रयोग कर यूट्यूब के कैप्चा और रेट लिमिट जैसे सुरक्षा तंत्रों को छलते हुए बड़े पैमाने पर डेटा एकत्रित किया। एप्पल ने आईपी एड्रेस बदलकर और वैधानिक अनुरोधों की नक़ल कर डेटा निकासी की, जो कि अमेरिका की डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन है। मुकदमे का केंद्र बिंदु “पांडा-70 एम” नामक डेटासेट है, जिसमें करीब 30 लाख यूट्यूब वीडियो के रेफरेंस शामिल हैं।

क्रिएटर्स का कहना है कि यूट्यूब कंटेंट एक बार एआई मॉडल में इस्तेमाल होने के बाद उसे वापस लेना असंभव होता है, जिससे सर्जकों की बौद्धिक संपत्ति पर नियंत्रण खोने का खतरा उत्पन्न होता है। इसलिए, उन्होंने यूट्यूब कंटेंट से निर्मित एप्पल के एआई उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने और अनधिकृत उपयोग के लिए उचित मुआवजा देने की भी मांग अदालत से की है।

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