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जनता पर बढ़े महंगाई का बोझ, आयल निगम को मिली कर में छूट का तोहफा

समाचार सारांश

  • सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले कर में 50 प्रतिशत की छूट दी है, लेकिन दो दिन बाद ही नेपाल आयल निगम ने ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि कर दी है।
  • नई कीमतों के अनुसार, पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 17 रुपये तथा डीजल/मट्टीतेल में 25 रुपये बढ़ाकर पेट्रोल 219 और डीजल 207 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
  • उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिना ने निगम और सरकार के इस कदम को ‘बड़ी साजिश और धोखाधड़ी’ करार देते हुए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

27 चैत, काठमाण्डू। सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले कर में 50 प्रतिशत की छूट दी, लेकिन दो दिन भी पूरे न हुए नेपाल आयल निगम ने ईंधन की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि कर दी।

24 चैत को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय घोषित करते हुए संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले करों में 50 प्रतिशत की छूट की जानकारी दी थी।

उन्होंने कहा, ‘सरकार पारदर्शी है, तथ्य छुपाती नहीं और जनता की दुर्दशा समझती है। सबसे अधिक कर लगने वाले शीर्षक से 50 प्रतिशत कटौती कर मूल्य नियंत्रण में सहायता की उम्मीद है।’

सरकार के इस निर्णय से उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में कमी और कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी।

लेकिन, मूल्य घटने की आशा रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए निगम ने विरोधाभासी कदम उठाते हुए आधी रात से लागू होने वाली कीमतों में भारी वृद्धि कर महंगाई का बोझ बढ़ा दिया।

इस निर्णय के बाद सरकार से जनता को संकट से राहत देने की उम्मीद थी, लेकिन उलट महंगाई बढ़ाने से उपभोक्ताओं में गुस्सा दिखा है।

नयी कीमतों के अनुसार, पेट्रोल में प्रति लीटर 17 रुपये और डीजल/मट्टीतेल में 25 रुपये का इजाफा किया गया है, जिससे पेट्रोल 219 रुपये प्रति लीटर और डीजल एवं मट्टीतेल 207 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं।

एलपी गैस की कीमत सिलेंडर प्रति 100 रुपये और आंतरिक हवाई ईंधन में 6 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे खाना पकाने वाले एलपी गैस की कीमत 2,010 रुपये प्रति सिलेंडर और हवाई ईंधन का दाम 257 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

नेपाल और भारत के बाज़ार की कीमतों की तुलना में बड़ा अंतर पाया गया है। शुक्रवार को नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94 रुपये 77 पैसे और डीजल 87 रुपये 67 पैसे थी, जबकि नेपाल में पेट्रोल 151 रुपये 63 पैसे और डीजल 140 रुपये 27 पैसे है।

यह दिखाता है कि नेपाल में पेट्रोल करीब 67 रुपये 37 पैसे और डीजल 66 रुपये 73 पैसे महंगा है।

नेपाल आयल निगम के प्रवक्ता मनोज ठाकुर ने कहा कि भारत के आंतरिक बाजार के मुकाबले नेपाल की कीमतें अलग हैं क्योंकि भारत की अपनी रिफाइनरी है जबकि नेपाल को तेल आयात करते समय अधिक लागत लगती है।

ठाकुर ने बताया कि निगम इंडियन आयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) से पेट्रोल के लिए प्रति लीटर 153 रुपये 78 पैसे और डीजल के लिए 242 रुपये 49 पैसे देता है। इसके बाद नेपाल सरकार के कस्टम, कर, परिवहन भाड़ा, प्रशासनिक खर्च और डीलर कमीशन जोड़ने पर पेट्रोल की कुल लागत लगभग 221 रुपये 32 पैसे और डीजल की 294 रुपये 99 पैसे पहुंच जाती है।

निगम की जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी होने के बाद भी कस्टम और पूर्वाधार कर आधे घटाए गए हैं, लेकिन घाटा कम नहीं होगा। कर कटौती के बावजूद निगम को पेट्रोल पर 16.65 रुपये, डीजल पर 109.50 रुपये और गैस पर 416 रुपये तक का घाटा हो रहा है और 15 दिनों में 10 अरब 21 करोड़ रुपए का घाटा सामने आ रहा है, इसलिए कीमतें बढ़ानी पड़ीं।

निगम ने कीमत बढ़ाने के बावजूद उस पर होने वाले मासिक 7 अरब से अधिक के घाटे के बीच उपभोक्ताओं से ईंधन कम उपयोग करने की अपील भी की है।

नेपाल आयल निगम का भवन

नेपाल आयल निगम पूर्णतया सरकारी स्वामित्व वाली संस्था है। सरकार ने कस्टम और पूर्वाधार करों में 50 प्रतिशत छूट देकर निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। कुल मिलाकर राज्य को न तो लाभ होता है न ही नुकसान, लेकिन यह बोझ उपभोक्ताओं पर आ जाता है।

निगम यह दावा करता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की बढ़ी कीमतों के कारण स्वचालित मूल्य प्रणाली के तहत कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं, लेकिन सरकार की कर कटौती के बाद कीमतों में कमी नहीं हो पाती क्योंकि पुराना घाटा चुकाना बाकी रहता है। इससे मूल्य वृद्धि और कटौती में एक प्रकार की अन्यायाई स्थिति दिखती है।

उपभोक्ता मानते हैं कि ऐसी ‘स्वचालित’ प्रणाली केवल मूल्य वृद्धि के समय ही लागू होती है, कीमतों में कमी पर मैनुअल ब्रेक लगता है, जो सवाल उठाता है।

निगम के कार्यकारी निदेशक भट्ट का बयान

नेपाल आयल निगम के कार्यकारी निदेशक डॉ. चण्डिकाप्रसाद भट्ट ने कहा कि कर छूट के कारण संभावित बड़ी वृद्धि को रोका गया जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

डा. चण्डिकाप्रसाद भट्ट
डा. चण्डिकाप्रसाद भट्ट, कार्यकारी निदेशक, नेपाल आयल निगम

उन्होंने कहा, ‘अगर कर छूट नहीं दी जाती, तो डीजल की कीमत प्रति लीटर 70 से 75 रुपये तक बढ़ जाती। अब केवल 25 रुपये की वृद्धि होना उपभोक्ताओं के लिए राहत है।’

उन्होंने बताया कि निगम अब भी डीजल पर प्रति लीटर 95 रुपये के करीब घाटे में है और निगम वर्तमान में आर्थिक संकट में है। जल्द ही निगम 13 से 14 अरब रुपये का निवेश कर घाटे का प्रबंधन करने की योजना बना रहा है।

उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिना का आक्रोश

उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिना ने निगम और सरकार के इस कदम को ‘बड़ी साजिश और धोखाधड़ी’ बताया। उन्होंने कहा कि कर छूट का नाटक करके असल में जनता का कलेजा काटा जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घट रही हैं तब निगम पुरानी और अधिक महंगी कीमतें दिखाकर आधी रात को कीमतें बढ़ा रहा है, यह धोखाधड़ी है।’

तिमल्सिना के अनुसार, निगम जब लाभ में था तो कर्मचारियों को बोनस भी देता था लेकिन अब घाटे के कारण पूरी जिम्मेदारी उपभोक्ताओं पर डालना गलत है।

माधव तिमल्सिना
माधव तिमल्सिना, उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता

उन्होंने सवाल उठाया कि गैस उत्पादन से लेकर ढुलाई तक का काम निजी क्षेत्र का है, निगम केवल कागज पर हस्ताक्षर करता है, तो घाटे का बोझ जनता पर क्यों डाला जाता है? निगम की गैरजिम्मेदाराना खर्चों को सरकार करोड़ों की जमीन खरीदकर देती है, इसका भार उपभोक्ताओं को क्यों सहना पड़ता है?

जनता को कम तेल उपयोग करने की अपील के बीच मंत्री और अधिकारियों का अलग व्यवहार

तिमल्सिना ने कहा कि उपभोक्ताओं से ईंधन कम उपयोग करने को कहना अनुचित है क्योंकि मंत्रालय के सचिव और निगम के अधिकारी बेधड़क अकेले गाड़ी इस्तेमाल करते हैं।

उन्होंने बताया कि निगम में 20 निदेशक हैं जिन्हें 20 गाड़ियां चाहिए और कर्मचारी सार्वजनिक परिवहन का उपयोग नहीं करते। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से उपभोक्ताओं के हित में स्थायी योजना बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में जोर-जबर्दस्ती सिस्टम लागू किया जाना चाहिए, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और सार्वजनिक परिवहन के प्रबंधन की जरूरत है, मगर इसके बजाय कीमतें बढ़ाई गई हैं।

उन्होंने उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय के सचिव और प्रतिस्पर्धा बाजार बोर्ड के अधिकारियों पर उपभोक्ता संरक्षण कानून की अनदेखी का भी आरोप लगाया।

माधव तिमल्सिना प्रधानमंत्री कार्यालय से तत्काल हस्तक्षेप और अवैध मूल्य वृद्धि वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि आयल निगम की मूल्य वृद्धि उपभोक्ताओं की अनदेखी और पिछले घाटों का बोझ जनता पर डाले जाने का संकेत देती है।

पूर्व सचिव और प्रशासन विशेषज्ञ विमलप्रसाद वाग्ले ने निगम के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की कमी को उपभोक्ताओं की पीड़ा की वजह बताया है।

विमलप्रसाद वाग्ले
विमलप्रसाद वाग्ले, पूर्व सचिव एवं प्रशासन विशेषज्ञ

उनका कहना है कि सामान्यतः अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से प्रत्येक 15 दिन में नई कीमतें लागू होनी चाहिए, लेकिन निगम हर बार पुराने घाटे की भरपाई के कारण कीमतें नहीं घटाता।

उन्होंने बताया कि निगम ने पिछले वर्ष 32 अरब रुपये का घाटा सहा जो भरपाई में डेढ़ से दो साल लग गए। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को इस भार को सहन करना नहीं पड़ना चाहिए।

राज्य इस बड़े घाटे को सीधे नहीं झेल सकता, इसलिए निगम द्वारा इसे आमदनी से पूरा करना पड़ता है और परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को अधिक दबाव सहना पड़ता है, जिस पर उन्होंने चिंता व्यक्त की।

सरकारी खर्च कटौती को ही समाधान बताया

पेट्रोलियम पदार्थों के कम उपयोग के लिए कीमतें बढ़ाना समस्या का समाधान नहीं है, वाग्ले ने कहा कि इससे परिवहन खर्च बढ़ेगा और महंगाई भी बढ़ेगी, जिसका समग्र आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

वास्तविक समाधान के लिए उन्होंने सरकारी खर्चों में कटौती करने पर जोर दिया, खासकर सरकारी लाल नंबर वाले वाहनों को सफेद नंबरों में बदलना और अनावश्यक उपयोग रोकना आवश्यक बताया।

साथ ही उन्होंने तेल कूपन प्रणाली खत्म कर लाभार्थियों को नकद में धन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया जिससे भ्रष्टाचार घटे और उपभोग नियंत्रित हो सके।

क्रास-सब्सिडी प्रणाली अपनाने का सुझाव

पेट्रोलियम मूल्य प्रबंधन के लिए उन्होंने क्रास-सब्सिडी मॉडल लागू करने की बात कही। सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले डीजल और मट्टीतेल पर सब्सिडी देने के लिए पेट्रोल और हवाई ईंधन से इकठ्ठा राजस्व का उपयोग करने की सलाह दी।

पेट्रोलियम पाइपलाइन

उन्होंने कहा, ‘पेट्रोल और हवाई ईंधन का उपयोग करने वाले वर्ग तुलनात्मक रूप से संपन्न हैं। उनसे अधिक राजस्व इकट्ठा कर डीजल पर सब्सिडी देकर परिवहन लागत कम की जा सकती है, जिससे महंगाई घटाने में मदद मिलेगी।’

उपभोक्ताओं को कम खपत करने से पहले सरकारी विभागों को मितव्ययिता अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत करना आवश्यक है, वाग्ले ने कहा।

सरकार के निर्णय को ‘अपरिपक्व और अविश्वसनीय’ बताया : अर्थशास्त्री डॉ. खनाल

अर्थशास्त्री डॉ. डिल्लीराज खनाल ने कहा कि सरकार द्वारा कर में कटौती के कुछ ही दिन बाद कीमत बढ़ाना सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।

उन्होंने इस निर्णय को ‘अपरिपक्व और अविश्वसनीय’ कहा और कहा कि इसने सरकार की साख पर संकट ला दिया है। कर कम करने और निगम द्वारा कीमत बढ़ाने के विरोधाभास ने प्रक्रिया को विफलता की तरह दिखाया है।

डा. डिल्लीराज खनाल
डा. डिल्लीराज खनाल, अर्थशास्त्री

उन्होंने कहा, ‘अगर कल ही कीमत बढ़ाने की तैयारी थी तो आज कर क्यों घटाया गया? इससे सरकार के निर्णय प्रक्रिया में गंभीर भरोसा संकट पैदा हुआ है।’

डा. खनाल ने कहा कि आयल निगम पूर्णतया सरकारी स्वामित्व वाला संस्थान है, जो संकट के समय अपने घाटे को खुद उठाने के लिए जिम्मेदार है और यह जिम्मेदारी अटालनी नहीं चाहिए।

‘निगम 100 प्रतिशत सरकारी संस्था है, जब लाभ होता है तो मनमानी लाभांश बांटता है मगर नुकसान पर तुरंत उपभोक्ताओं पर बोझ डालता है, इससे सामाजिक जिम्मेदारी पर सवाल उठता है।’

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कम होने के बाद भी नेपाल पर इसका प्रभाव दिखने में समय लग सकता है, लेकिन समग्र निर्णय प्रक्रिया अभी भी परिपक्व नहीं है, डॉ. खनाल बताते हैं।

अंततः, कर कटौती तो सकारात्मक है, लेकिन कीमत बढ़ जाने के कारण इसका अमल सरकार के निर्णय को निरर्थक बना देता है, उन्होंने कहा।

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