
अमेरिका-इरान टकराव: क्या युद्धविराम संघर्ष समाप्त कर सकेगा?
इरान और संयुक्त राज्य अमेरिका ने दो सप्ताह के लिए युद्धविराम पर सहमति जताई है, जिसके तहत पाकिस्तान में बातचीत आयोजित करने की तैयारी की गई है। एक इरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है, वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को वार्ता में शामिल किया गया है। हैरिस ने कहा है कि इरान ने “सद्भावपूर्वक” व्यवहार नहीं किया और “धोखाधड़ी” करने का प्रयास किया, जिसे अमेरिका स्वीकार नहीं करेगा। इरानी अधिकारियों ने वार्ता शुरू होने से पहले लेबनान में भी युद्धविराम आवश्यक बताया है, जिससे वार्ता की स्थिति में अनिश्चय बढ़ गया है।
इज़राइल ने बुधवार को लेबनान में सबसे कड़ा हमला किया, जिसमें 300 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इरानी अधिकारियों ने लेबनान पर हमले की कड़ी निंदा की है और इज़राइल पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया है। लेकिन इज़राइल और अमेरिका युद्धविराम में लेबनान को शामिल नहीं करने का दावा करते रहे हैं। प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को मंत्रिमंडल को निर्देश दिया कि वे लेबनान के साथ सीधे वार्ता करें, जबकि बेरूत ने भी वार्ता के लिए तत्परता जताई है।
युद्धविराम अवधि में इरान ने होर्मुज जलसंधि में समुद्री आवाजाही में बाधा नहीं डालने का आश्वासन दिया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा इरान पर हमले शुरू किए 40 दिन बाद यह युद्धविराम घोषित किया गया। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रूथ सोशल’ पर खुलासा किया कि वे युद्धविराम पर सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा, “हम इरान के साथ दीर्घकालिक शांति और मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए निर्णायक समझौते पर पहुँचे हैं।”
पाकिस्तान ने मध्यस्थता करते हुए इस युद्धविराम को संभव बनाया है। इरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की घोषणा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की है। उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों ने उल्लेखनीय बुद्धिमत्ता और समझदारी दिखाई है तथा शांति और स्थिरता के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाई है।” संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मध्य पूर्व में “दीर्घकालिक और व्यापक शांति के मार्ग खोलने” के लिए सभी पक्षों से अपील की है।