
अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे की वार्ता: इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़
11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे की वार्ता सम्पन्न हुई, जो 1979 के बाद पहली बार उच्चस्तरीय प्रत्यक्ष संवाद था। पाकिस्तान ने मध्यस्थता करते हुए युद्धविराम बनाए रखने के लिए अमेरिका का 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव ईरान तक पहुँचाया और वार्ता का आयोजन किया। हालांकि वार्ता सफल नहीं हुई, लेकिन संवाद पुनर्स्थापित हुआ और पाकिस्तान की विश्वसनीयता उजागर हुई है।
12 अप्रैल की सुबह 21 घंटे की वार्ता समाप्त हुई। कोई समझौता तो नहीं हुआ पर यह दिन इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा। वार्ता की पृष्ठभूमि में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनी की हत्या के बाद उत्पन्न तनाव और युद्ध की पीड़ा ने दोनों पक्षों को वार्ता के लिए प्रेरित किया।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी व्हांस और ईरानी संसद के सभापति मोहम्मद-बागेर गालिबाफ के नेतृत्व में 70 से अधिक सदस्यों वाली ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता में शामिल था। वार्ता में दोनों पक्षों ने अपने प्रस्ताव रखे, लेकिन मुख्य मुद्दों पर बड़े मतभेद बने रहे।
वार्ता असफल रहने के बावजूद, इसने संवाद को पुनर्स्थापित किया और भविष्य की वार्ताओं के लिए आधार तैयार किया। अब युद्धविराम अवधि 22 अप्रैल को समाप्त हो रही है और पुनः वार्ता की संभावना बनी हुई है। पाकिस्तान आगामी दिनों में संलग्नता और वार्ता को सुगम बनाने की अपनी भूमिका जारी रखेगा।