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वर्ष में दो बार वैक्सीन के जरिए उच्च रक्तचাপ नियंत्रण करने वाली नई दवा का परीक्षण

‘क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन’ के शोधकर्ताओं ने वर्ष में केवल दो बार इंजेक्शन लगाकर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने वाली नई दवा ‘जिल्बेसिरन’ का परीक्षण किया है। ‘कार्डिया-2’ अध्ययन में 663 वयस्क प्रतिभागी शामिल थे और इस दवा ने सामान्य दवाओं के साथ मिलकर रक्तचाप में महत्वपूर्ण गिरावट लाई है। यह दवा शरीर में ‘एंजियोटेंसिनोजेन’ प्रोटीन के उत्पादन को रोकती है और छह महीने में केवल एक बार वैक्सीन लगाने से दीर्घकालिक प्रभाव देखने को मिलता है। दूसरा चरण परीक्षण वर्तमान में जारी है। 30 चैत्र, काठमांडू।

उच्च रक्तचाप के मरीज दैनिक दवा सेवन की झंझट से मुक्त हो सकते हैं। ‘क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन’ के नेतृत्व में किए गए इस विश्वव्यापी परीक्षण ने वर्ष में दो बार सुई लगाकर रक्तचाप नियंत्रित करने वाली नई विधि का खुलासा किया है। ‘जिल्बेसिरन’ नामक यह प्रयोगात्मक दवा उन मरीजों में सकारात्मक परिणाम दिखा रही है, जिनका रक्तचाप सामान्य दवाओं से नियंत्रित नहीं हो पा रहा था।

यह दवा यकृत में उत्पन्न विशेष प्रोटीन को रोकती है, जो रक्त वाहिकाओं को फैलाकर रक्तचाप कम करता है। सामान्य दवाओं के साथ इसे लगाकर रक्तचाप में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका दीर्घकालिक प्रभाव है। छह महीने में केवल एक बार वैक्सीन लगाने के कारण मरीजों को रोजाना दवा लेने की परेशानी से छुटकारा मिलता है।

वर्तमान में इसका दूसरा चरण परीक्षण चल रहा है और यह अध्ययन इस वर्ष से शुरू होगा कि यह हृदयाघात और स्ट्रोक के जोखिम को कितना कम करता है। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और उच्च रक्तचाप विशेषज्ञ डॉ. मनिष सक्सेना ने इस नई उपचार पद्धति को ‘गेम-चेंजर’ कहा है। उनका कहना है, “उच्च रक्तचाप दुनिया भर में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और केवल कम प्रतिशत लोग इसका सही नियंत्रण कर पाते हैं। यह नई उपचार विधि विश्व के लाखों लोगों को अपनी स्वास्थ्य को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद करेगी।”

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