
रबि की ‘मिश्रित खेती’ में 27 प्रकार की नगदे फसलें
मेचीनगर नगरपालिका-४ बाहुनडाँगी के किसान रबि नेपाल ने 12 बीघा जमीन में 27 प्रकार की नगदे फसलें लगाकर आधुनिक मिश्रित खेती की है। नेपाल चाय, रबर, अगरुद, आंवला, कटहर, तेजपत्ता सहित दर्जनों नगदे फसलें एक ही जमीन पर उगा रहे हैं। उन्होंने नारियल की खेती को चाय के बगान के अंदर सहायक फसल के रूप में प्रयोग करते हुए कृषि पर्यटन और उत्पादन में नया आयाम जोड़ने की योजना बनाई है। 1 वैशाख, झापा। मेचीनगर नगरपालिका-४ बाहुनडाँगी के किसान रबि नेपाल ने एक ही जमीन पर 27 प्रकार की नगदे फसलें लगाकर आधुनिक मिश्रित खेती के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। पिछले 13 वर्षों से व्यावसायिक कृषि में लगे नेपाल ने 12 बीघा जमीन के हर कोने को उत्पादन से जोड़ते हुए मिश्रित नमूना खेती की है। चाय की खेती से कृषि यात्रा शुरू करने वाले नेपाल अब एक ही जमीन में चाय, रबर, अगरुद, आंवला, कटहर, तेजपत्ता समेत दर्जनों नगदे फसलें एक साथ उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले चरण में चाय रोपाई की और चाय के बगान के भीतर मिश्रित नगदे फसलें उगाई हैं। चाय तीन वर्ष, आंवला पाँच वर्ष, कटहर चार वर्ष, रबर पांचवें वर्ष और तेजपत्ता तीसरे वर्ष से उत्पादन दे रहे हैं।
‘शुरुआत में निवेश और मेहनत अधिक होती है, खनिजोत से लेकर गोदमेल और पौधों को विकसित करने में समय लगता है’, उन्होंने कहा, ‘तीन साल बाद उत्पादन मिलने लगता है और सात वर्ष तक सभी फसलें आय देने लगती हैं।’ उनके अनुसार फिलहाल बगान में 27 प्रकार की नगदे फसलें हैं। औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन, मोरिंगा, रुद्राक्ष से लेकर दैनिक भोजन में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी और नींबू तक उत्पादन दे रहे हैं।
उनकी खेती की शैली नई और आकर्षक है। बड़े सुपारी बगान के भीतर मिर्च की लहलहाती फसल लगी है। मिर्च की लहरें सुपारी के पेड़ों पर आश्रित होकर फल रही हैं। हाल ही में उन्होंने चाय के बगान के भीतर एक नए प्रयोग के रूप में नारियल की खेती शुरू की है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने चाय के बगान में दो-दो पौधे हटाकर नारियल के पौधे लगाए। ‘चाय के बगान के अंदर सहायक फसल के रूप में नारियल की खेती यह पहला परीक्षण है। इससे झापा के कृषि पर्यटन और उत्पादन में नया आयाम जुड़ने की उम्मीद है’, उन्होंने कहा।
बाहुनडाँगी क्षेत्र के किसान हाथी, चीता, बन्दर सहित जंगली वन्यजीवों से प्रभावित हैं। चाय और नारियल जैसी फसलों को हाथी और बंदर से खास नुकसान नहीं होता, इसलिए किसान इन्हें वैकल्पिक खेती के रूप में उपयोग कर रहे हैं, नेपाल ने बताया। मिट्टी की जांच में पूर्व-पश्चिम राजमार्ग के बाहुनगाँडी, शनिश्चरे, बुधवारि क्षेत्र में नारियल की खेती उपयुक्त पाई गई है। एक नारियल के पेड़ से वार्षिक 17 से 18 हजार रुपये तक की आमदनी होती है, उनका कहना है। उन्होंने पिछले साल से सुपारी के बगान के भीतर नारियल लगाने शुरू किए हैं। ‘एक हजार पौधे लगाने की योजना है, पिछले साल 300 पौधे लगाए, इस साल 700 लगाऊंगा’, नेपाल ने कहा।
नारियल के पानी की बिक्री कच्चे फल की बिक्री की तुलना में ज्यादा होती है, इसलिए बाजार की कमी नहीं होगी, उन्होंने बताया। नारियल के पानी की मांग बाजार में बढ़ती जा रही है।
उनके 13 वर्षों के मिश्रित खेती के अनुभव के अनुसार नगदे फसलों के उत्पादन में बाजार की कोई समस्या नहीं है। सुपारी और तेजपत्ता सीधे बागानों से बिकते हैं और झापा में चाय व रबर के प्रसंस्करण के पर्याप्त उद्योग स्थापित हो चुके हैं। ‘बाजार खोजने और पहचानने में ध्यान देना जरूरी है, खेत में उत्पादन कर घर पर बैठे रहने भर से काम नहीं चलेगा’, नेपाल ने कहा, ‘एक बीघा जमीन पर व्यवस्थित मिश्रित खेती करने पर सालाना 8 से 9 लाख रुपये आसानी से कमा सकते हैं।’
अपनी मिट्टी में पसीना बहाने से पैसा कमाना है तो यूरोप या अमेरिका भागने की जरूरत नहीं, यह उनका सफल कृषि कार्य का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि युवाओं को मिश्रित खेती के प्रति आकर्षित करने के लिए सरकार को प्रोत्साहन नीति और कार्यक्रम लाना चाहिए। ‘जो तीन महीने में कमाना चाहते हैं उन्हें सब्जी, छह महीने में जो चाहते हैं उन्हें अनाज, और जो एक साल इंतजार कर सकते हैं उन्हें जड़ी-बूटी ठीक है’, उन्होंने खेती से आय के बारे में जानकारी देते हुए कहा, ‘लेकिन, तीन-चार वर्षों का धैर्य रखकर जो मिश्रित खेती करेगा उसे यह 50 साल तक लगातार आय देती रहेगी।’