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शब्द, धुन र अनुभूतिको संगम – Online Khabar

शब्द, धुन और अनुभूति का संगम: ‘चियासँग कविता’ कंसर्ट

समाचार सारांश समीक्षा पश्चात प्रस्तुत। धनकुटा एफ.एम. के आयोजन में ‘चियासँग कविता’ नियमित रूप से संचालित हो रहा है। शुक्रवार के कार्यक्रम में कवि उत्तम तुम्सा और डिआर फुयल ने लगभग एक दर्जन कविताएँ प्रस्तुत कीं, जबकि गायक तेजेन्द्र गंधर्व ने गीतों से मंच सजाया। यह कार्यक्रम २०८१ माघ में कुछ साहित्यप्रेमियों की बैठक से जन्मा ‘चियासँग कविता’ का स्वरूप २०८१ फागुन २ से हर शुक्रवार नियमित रूप से आयोजित हो रहा है। ५ वैशाख, धनकुटा।
सरंगी की मधुर धुन ने माहौल को पूर्णता से भर दिया था, और उस धुन के साथ मंच से निकले शब्द सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंच रहे थे। कविता पाठ करते समय कभी-कभी दमाहा बजाकर रंगत दी जाती थी तो कभी उत्साहपूर्वक मंच पर झूम उठते थे। दर्शक भावुक हो जाते या ताल में झूमकर आनंदित होते थे। पहली नज़र में यह एक नाट्य कार्यक्रम जैसा लग सकता था, परंतु यह वास्तव में एक कविता कंसर्ट का दृश्य था। शुक्रवार की दोपहर धनकुटा स्थित हमारे बहुमुखी पाठशाला के प्रांगण में आयोजित ‘चियासँग कविता’ कंसर्ट ने ऐसा मनोहर और आकर्षक दृश्य प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम ने साहित्य और संगीत का मेल प्रस्तुत करते हुए धनकुटा में एक नई सौंदर्य अनुभूति प्रदान की।
औपचारिकताओं से अधिक आत्मीयता दिखाए इस कार्यक्रम में उपस्थित लोग केवल दर्शक नहीं, बल्कि शब्द, धुन और अनुभूति के साथ एक समान यात्रा पर थे। जब कवि मंच पर खड़े होते हैं तो माहौल गंभीर हो जाता है। प्रेम, दुख, समाज और जीवन के विभिन्न आयाम कविता के माध्यम से प्रस्तुत होते हैं। हर कविता के बाद बजने वाली तालें दर्शकों के मन में उन शब्दों की गहराई का संकेत देती हैं। इसी क्रम में गीत की सुर ने वातावरण को नया रंग दिया। कार्यक्रम में कवि उत्तम तुम्सा एवं डिआर फुयल ने लगभग एक दर्जन कविताएं सुनाईं, जबकि गायक तेजेन्द्र गंधर्व ने आधा दर्जन गीत प्रस्तुत किए। संगीत और साहित्य के मिलन ने न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि भावनात्मक संबंधों को भी मजबूत किया।
रेडियो धनकुटा एफ.एम. १०६.२ मेगाहर्ट्ज के आयोजन में सम्पन्न ‘चियासँग कविता’ कंसर्ट का यह ५५वां अंक था। नेपाल पत्रकार महासंघ, धनकुटा के अध्यक्ष विदुर खवास ने बताया कि इस कार्यक्रम में आक्रोश, दुःख और प्रेम से भरी कविताएं सुनाई गईं। उन्होंने कहा कि धनकुटा में चियासँग कार्यक्रम के माध्यम से साहित्यिक वातावरण विकसित हो रहा है तथा यह कवि वर्ग का ठिकाना बनता जा रहा है। बाल, युवा और वृद्ध सभी इस कार्यक्रम में सक्रिय भाग लेते हैं, अपनी कृतियां प्रस्तुत करते हैं और दूसरों की रचनाएं सुनने की उत्सुकता दिखाते हैं। यह पहल २०८१ माघ में साहित्यप्रेमियों के एक जमावड़े से शुरू होकर २०८१ फागुन २ से हर शुक्रवार नियमित रूप से हो रही है।
विभिन्न व्यवसायों और व्यस्तताओं के बाबजूद साहित्यकारों को एक जगह जोड़ने का माध्यम यह आयोजन बना हुआ है, रेडियो धनकुटा एफ.एम. के अध्यक्ष गोपाल बराइली ने बताया। उनके अनुसार प्रतिभागियों को कविता, गजल, मुक्तक या गीत प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है और प्रत्येक अंक किसी अलग अध्यक्ष के नेतृत्व में संचालित होता है। फागुन १ को आयोजित ५०वें आयोजन के साथ ही इस कार्यक्रम ने अपना प्रथम वार्षिकोत्सव मनाया और विभिन्न साहित्यिक विधाओं में पुरस्कार वितरित किए। प्रत्येक वर्ष श्रेष्ठ कविताओं का संग्रह ‘‘चियासँग कविता’’ नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाता है। इस कार्यक्रम के निरंतर संचालन के लिए अक्षय कोष भी स्थापित किया गया है, यह जानकारी बराइली ने दी। ‘चियासँग कविता’ कंसर्ट में कोशी प्रदेश के आंतरिक मामला एवं कानून मंत्री इन्द्रमणि पराजुली ने कहा कि साहित्य समाज में परिवर्तन लाने में सक्षम है और यह कार्यक्रम धनकुटा तथा पूरे देश को सकारात्मक संदेश देता है। मंत्री पराजुली ने चियासँग कविता अक्षय कोष में १० हजार रुपये आर्थिक सहयोग का भरोसा भी दिलाया।

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