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जापानमा दशकौंपछि रक्षा निर्यात नियममा परिवर्तन, हट्यो हतियार बिक्री प्रतिबन्ध

जापान ने दशकों बाद रक्षा निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए हथियार बिक्री पर प्रतिबंध हटाया

जापान ने दशकों बाद रक्षा निर्यात नियमों में सबसे बड़ा बदलाव करते हुए हथियार बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध पूरी तरह हटा दिए हैं। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने रक्षा उपकरण क्षेत्र में साझेदार देशों की आवश्यकताओं को उजागर किया है। चीन ने जापान की इस पहल को ‘नए प्रकार के सैन्यीकरण’ के रूप में बताया है और उच्च सतर्कता बरतने की चेतावनी दी है।

जापान ने मंगलवार को अपने रक्षा निर्यात नियमों में दशकों बाद सबसे बड़ा परिवर्तन करते हुए हथियार बिक्री पर लागू पुराने प्रतिबंध पूरी तरह हटाने की घोषणा की। इस निर्णय के बाद जापान युद्धपोत, मिसाइल और अन्य उन्नत सैन्य उपकरणों को विश्व बाजार में निर्यात करने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शान्तिवादी नीतियों में संशोधन करते हुए जापान अपनी रक्षा उद्योग को मजबूत करने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए कड़ा कदम उठा रहा है।

प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि आज के विश्व में किसी भी देश के लिए अकेले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना संभव नहीं है, इसलिए रक्षा उपकरण क्षेत्र में साझेदार देशों के सहयोग की आवश्यकता है। इस रणनीतिक बदलाव के पीछे मुख्य रूप से एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को संतुलित करने का जापान का प्रयास नज़र आता है। साथ ही यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण अमेरिकी हथियार उत्पादन पर दबाव बढ़ने से जापान के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर उत्पन्न हुए हैं।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिकी सुरक्षा प्रतिबद्धताएं अनिश्चित होती जा रही हैं, जिसके कारण यूरोप और एशिया के कई देशों ने हथियार आपूर्ति के लिए नए विश्वसनीय विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं, जिसका लाभ जापान उठा रहा है। पहले जापान ने उद्धार, परिवहन, चेतावनी, निगरानी और माइन-स्वीपिंग जैसे पांच सीमित वर्गों में ही सैन्य उपकरणों के निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन अब ये सभी प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं। जापान ने युद्धरत देशों को हथियार न बेचने और तीसरे देशों को हस्तांतरण के मामले में कड़े नियंत्रण बनाए रखने के अपने पुराने सिद्धांत को कायम रखा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार अपवाद स्वीकारने की सरकार की स्पष्ट नीति है।

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