
बुद्ध जन्मजयन्ती पर प्रधानमंत्री का संदेश: सत्य ज्ञान से ही क्रांति की शुरुआत होती है
प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह ने बुद्ध जयन्ती के अवसर पर दुःख निवारण के चार आर्य सत्यों को स्मरण करते हुए विश्वशांति की कामना की। उन्होंने कहा, ‘दुःख है, दुःख के कारण हैं, दुःख निवारण है और दुःख निवारण का मार्ग है।’ प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि बुद्ध का जन्म होने से नेपाल की भूमि सदैव अहिंसा और शांति के मार्ग पर रही है और सच्ची क्रांति ज्ञान से शुरू होती है। (१९ वैशाख, काठमांडू)
प्रधानमंत्री शाह ने शांति के महान प्रवर्तक गौतम बुद्ध की जन्मजयन्ती के अवसर पर सभी को प्रज्ञामय शुभकामनाएं देते हुए सोशल मीडिया फेसबुक पर अर्जित दुःख निवारण के मार्ग को अपनाने का उल्लेख किया। उन्होंने बुद्ध के चार आर्य सत्यों को याद करते हुए कहा, ‘हमारी यात्रा ज्ञान के उजाले की खोज और समस्याओं के समाधान के मार्ग पर होनी चाहिए।’
अंधकार को उजाले की कमी के रूप में व्याख्यायित करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा, उजाले की एक किरण चलने मात्र से अंधकार स्वतः दूर हो जाता है और इसलिए ज्ञान का महत्व अत्यंत है। उन्होंने यह भी बताया कि बुद्ध के जन्म से नेपाल की भूमि सदैव अहिंसा और शांति की निर्णायक पक्ष में रही है। ‘सच्ची क्रांति ‘क’ से नहीं ‘ज्ञ’ से शुरू होती है, और वह ‘ज्ञ’ है ज्ञान।’ प्रधानमंत्री शाह के शब्द थे।
बुद्ध के सुप्रसिद्ध उपदेश ‘अप्प दीपो भवः’ (अपने ही प्रकाश स्वयं बनो) का उद्धरण देते हुए प्रधानमंत्री शाह ने सभी को शुभकामनाएं दीं। उनके शब्द हैं, “दुःख है, दुःख के कारण हैं, दुःख का निवारण है, दुःख निवारण का मार्ग है। बुद्ध ने जिस मार्ग को दिखाया वह दुःख निवारण का मार्ग है। उजाले की कमी को ही अंधकार कहा जाता है; जब उजाले की किरणें कदम छूना शुरू करती हैं, तब अंधकार स्वतः दूर हो जाता है। हमारी यात्रा ज्ञान के उजाले की खोज और समस्याओं के समाधान के मार्ग पर होनी चाहिए। शांति के सर्वकालीन महान प्रवर्तक बुद्ध की जन्मजयन्ती के अवसर पर विश्वशांति की कामना करता हूँ। बुद्ध के जन्म से धन्य हमारी नेपाल भूमि सदैव अहिंसा और शांति के पक्ष में है। सच्ची क्रांति ‘क’ से नहीं ‘ज्ञ’ से शुरू होती है, और वह ‘ज्ञ’ ज्ञान है। बुद्ध जयन्ती के शुभ अवसर पर सम्पूर्ण को प्रज्ञामय शुभकामनाएं। अप्प दीपो भवः।”