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साहित्य के माध्यम से राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा

इलाम साहित्य महोत्सव–२०८३ के पहले दिन कविता, आख्यान, पत्रकारिता और पर्यटन विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। पर्यटन के वैभव संबंधी सत्र में पर्यटन व्यवसायी अमिर राई ने राज्य की पर्यटन प्रचार कार्यशैली में असंतोष व्यक्त किया। महोत्सव में ५० हजार रुपये का हाङयुकजुनिता साहित्यिक पुरस्कार सुन्दर कुरूप को प्रदान किया गया। १८ वैशाख, इलाम। शुक्रवार को इलाम के बड़े टुँडिखेल से शुरू हुई सांस्कृतिक झांकी गौतम बुद्ध सभाहल पहुंचकर पूर्ण उत्सव में परिवर्तित हो गई। यह उत्सव साहित्यकारों के केन्द्रित होने के बावजूद राष्ट्र के विभिन्न विषयों पर चल रही बहस इसे और व्यापक बना रही है।

इलाम साहित्य महोत्सव–२०८३ इलाम में प्रारंभ हुआ है। महोत्सव के पहले दिन कविता, आख्यान, पत्रकारिता और पर्यटन संबंधित मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। ‘विरासत से रिल्स तक’ शीर्षक के तहत कविता के विभिन्न संदर्भों पर चर्चा हुई। विनोदविक्रम केसी, रमेशचन्द्र अधिकारी, समदर्शी काइला एवं रिमा केसी ने कविता लेखन की वर्तमान स्थिति और आगामी संभावनाओं पर अपने विचार रखे। वालिका थपलियाले इस सत्र का संचालन किया। कविता सत्र के बाद ‘डिजिटल मासु भात और हम पत्रकार’ विषय में ऑनलाइनखबर के प्रधान संपादक बसंत बस्नेत ने संवाद प्रस्तुत किया।

‘पर्यटन का वैभव: समृद्धि की आधारशिला’ सत्र में नेपाल में पर्यटन विकास की संभावनाओं, अवसरों और चुनौतियों पर बातचीत हुई। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण करते हुए पर्यटन अवसंरचना निर्माण पर बल दिया। इस सत्र में पर्यटन कार्यालय काकरिभिट्टाका अधिकारी निरोज कट्टेल, उद्योग वाणिज्य संघ इलाम की पूर्व अध्यक्ष सुसिला सापकोटा, पर्यटन व्यवसायी अमिर राई और पत्रकार गिरिराज बाँस्कोटा ने चर्चा की। आख्यान और उपआख्यान में केशव दाहाल, उमा सुवेदी, अमर न्यौपाने, श्याम सिंघक के साथ शैलेन्द्र अधिकारी ने बहस की। विभिन्न विषयों पर चर्चा के बाद गजल साझ का आयोजन हुआ।

गजल साझ में योगनीधि भटराई, जिआर न्यौपाने, पवित्रा प्रयत्न, भुइमान्छे, लोकेन खतिवडा, सागर बगर और सिंधु निरौलाले प्रस्तुतियाँ दीं। आयोजक नगर साहित्य कला संगीत प्रतिष्ठान इलाम के अध्यक्ष प्रकाश थामसुहाङ ने बताया कि शनिवार को भी विभिन्न सत्र आयोजित होंगे। सम्मान एवं विमोचन कार्यक्रम के अंतर्गत ५० हजार रुपये का हाङयुकजुनिता साहित्यिक पुरस्कार सुन्दर कुरूप को प्रदान किया गया। साथ ही राधिका नेम्वाङ स्मृति पुरस्कार कविता नेपाल को दिया गया।

दिनेश डिसी और गायक पुष्पन प्रधान को इलाम नगरपालिक ने सम्मानित किया। इसी दौरान सगरमाथा आरोही जुनिता सुब्बा की कविता संग्रह “प्रिय आत्मन” एवं प्रतिष्ठान की स्मारिका का विमोचन किया गया। साहित्य महोत्सव में पर्यटन संबंधी चिंताएं भी उठीं। ४२०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित पाँचथर और ताप्लेजुङ के सीमावर्ती क्षेत्र में बाहरी जिलों से आकर कंचनजंगा क्षेत्र में होटल व्यवसाय संचालित करना साहसिक होता है। झापा के अमिर राई पांचथर–ताप्लेजुङ सीमा स्थित तिम्बुङ पोखरी क्षेत्र में छह वर्षों से होटल व्यवसाय चला रहे हैं, जहां दुर्लभ ‘केन्जो’ फूल पाया जाता है।

पांचवें संस्करण के इलाम साहित्य महोत्सव के तहत ‘पर्यटन का वैभव, समृद्धि की आधार’ विषय पर पत्रकार गिरिराज बाँस्कोटा के संयोजन में हुई चर्चा में पैनल सदस्य अमिर राई ने राज्य की पर्यटन प्रचार कार्यशैली पर असंतोष जताया। ऊँचे हिमालयी क्षेत्र में वर्ष भर केवल चार महीने व्यापार संभव होने की स्थिति के बीच पर्यटन व्यवसायी की चुनौतियों और राज्य की दूरदर्शिता की कमी पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की। स्थानीय से लेकर प्रदेश सरकार तक पर्यटन के लिए बजट खर्च करने को ‘बालू में पानी डलाने जैसा’ बताते हुए उन्होंने अपनी आपत्ति जाहिर की। दूसरी पैनलिस्ट सुशीला सापकोटा ने डिजिटल माध्यम से पर्यटन प्रचार ना होने पर व्यवसायी पिछड़ने का खतरा बताया।

राज्य विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से होमस्टे संचालन में बजट खर्च कर रहा है, लेकिन व्यवसायी खुद सक्रिय नहीं होंगे तो आर्थिक लाभ प्राप्त करना संभव नहीं होगा, ऐसा उनका मानना था। पर्यटन कार्यालय झापा के अधिकारी निरोज कट्टेल ने कहा कि सरकार ऐसे पर्यटन को प्रभावी बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने हाल ही में भारत के पश्चिम बंगाल से इलाम, पाँचथर और ताप्लेजुङ में पर्यटकों की संख्या बढ़ने का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमावर्ती दार्जिलिंग के टूर ऑपरेटरों के साथ सहयोग कर क्रॉस-बॉर्डर पर्यटक लाना संभव होगा।

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