
संक्रमणकालीन न्याय आयोग के दोनों पदाधिकारी पदमुक्त किए जाएंगे
सरकार ने संक्रमणकालीन न्याय से संबंधित सत्य निरुपण तथा मेलमिलाप आयोग और बेपत्ता व्यक्तियों की छानबीन आयोग के पदाधिकारियों को पदमुक्त करने का अध्यादेश जारी किया है। राजपत्र में इस अध्यादेश के प्रकाशन के साथ ही दोनों आयोगों के 5-5 पदाधिकारी पदमुक्त हो जाएंगे। इन पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने की थी। दोनों आयोग द्वंद्वकालीन घटनाओं की छानबीन और जांच को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं थे और द्वंद्व पीड़ितों ने भी असहमति जताई थी।
19 वैशाख, काठमाडौं। सरकार ने संक्रमणकालीन न्याय से जुड़े इन दोनों आयोगों के पदाधिकारियों को पदमुक्त करने के लिए नया अध्यादेश जारी किया है। शनिवार को जारी राजनीतिक नियुक्ति से संबंधित पदाधिकारी पदमुक्त करने वाले इस अध्यादेश में सत्य निरुपण तथा मेलमिलाप आयोग और बेपत्ता व्यक्तियों की छानबीन आयोग के पदाधिकारियों को पदमुक्त करने का प्रावधान शामिल किया गया है। राजपत्र में इसके प्रकाशित होते ही दोनों आयोगों के पांच-पांच पदाधिकारी मुक्त हो जाएंगे। इन पदाधिकारियों की नियुक्ति ओली सरकार ने की थी।
दोहों आयोग के पदाधिकारियों के चयन पर द्वंद्व पीड़ितों ने असहमति व्यक्त की थी। साथ ही, ये आयोग द्वंद्वकालीन घटनाओं की छानबीन और जांच की प्रक्रिया को प्रभावशाली ढंग से आगे नहीं बढ़ा पाए थे। सत्य निरुपण तथा मेलमिलाप आयोग के अध्यक्ष महेश थापा हैं, जबकि सदस्य हैं अच्युत प्रसाद भण्डारी, टीकाप्रसाद ढकाल, पदमबहादुर शाही और कुमारी कौशल्या ओझा। वहीं, बेपत्ता व्यक्तियों की छानबीन आयोग के अध्यक्ष लिलादेवी गड्तौला हैं और सदस्य हैं गोपालनाथ योगी, अग्नी प्रसाद थपलिया, श्रृजना पोखरेल तथा विनिता नेपाली।