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संवैधानिक पदाधिकारी नियुक्तिको बाटो खुल्यो, प्रधानन्यायाधीश सिफारिस कहिले ?

संवैधानिक पदाधिकारियों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त, प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश कब होगी?

समाचार सारांश

समीक्षित और संक्षिप्त।

  • राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संवैधानिक परिषद से जुड़ा अध्यादेश जारी कर प्रधान न्यायाधीश समेत खाली संवैधानिक पदाधिकारियों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया है।
  • अध्यादेश के अनुसार, संविधानिक परिषद में अध्यक्ष सहित चार सदस्य मौजूद होने पर निर्णय वैध माना जाएगा।
  • प्रधान न्यायाधीश का पद खाली है और न्याय परिषद परंपरा अनुसार योग्य न्यायाधीश का नाम सिफारिश करती है।

२२ वैशाख, काठमांडू। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा संवैधानिक परिषद से जुड़ा अध्यादेश जारी करने के बाद प्रधान न्यायाधीश समेत खाली संवैधानिक पदाधिकारियों की नियुक्ति का मार्ग खुल गया है। राष्ट्रपति ने एक बार वापस लौटाए गए विधेयक को सरकार द्वारा अपरिवर्तित पुनः भेजे जाने के बाद मंगलवार को अध्यादेश की घोषणा की है।

अध्यादेश के अनुसार, छह सदस्यीय संवैधानिक परिषद में अध्यक्ष सहित चार सदस्य उपस्थित होने पर गणना के लिए संख्या पूरी मानी जाएगी। इसी प्रकार, उन छह सदस्यों में से प्रधानमंत्री सहित तीन पदाधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णय को मान्य माना जाएगा।

नेपाल के संविधान की धारा २८४ में संवैधानिक परिषद से संबंधित प्रावधान है। इस परिषद की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं जिसमें प्रधान न्यायाधीश, सभामुख, राष्ट्रिय सभा के अध्यक्ष, विपक्षी दल के नेता और उपसभामुख सदस्य होते हैं। रिक्त प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश करते समय कानून मंत्री सदस्य के रूप में परिषद में भाग लेते हैं।

वर्तमान संरचना के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेन शाह संवैधानिक परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल, सभामुख डीपी अर्याल, राष्ट्रिय सभा के अध्यक्ष नारायण दाहाल, विपक्षी दल के नेता भीष्मराज आङदेम्बे और उपसभामुख रुवी कुमारी सदस्य हैं। प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश के दौरान सपना प्रधान मल्ल की जगह कानून मंत्री सोबिता गौतम प्रतिनिधित्व करेंगी।

वर्तमान संवैधानिक परिषद में राष्ट्रिय सभा के अध्यक्ष दाहाल, विपक्षी दल के नेता आङदेम्बे और उपसभामुख रुवी कुमारी विपक्षी सदस्य हैं। प्रधानमंत्री बालेन शाह के प्रस्ताव को स्वीकृति देने के लिए सभामुख डीपी अर्याल और प्रधान न्यायाधीश का समर्थन भी आवश्यक है। प्रधान न्यायाधीश के चयन हेतु प्रधानमंत्री को सभामुख अर्याल और कानून मंत्री गौतम का समर्थन चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश कौन होंगे?

१७ चैत को प्रकाशमान सिंह राउत के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रधान न्यायाधीश का पद रिक्त है। संवैधानिक परिषद को शीघ्र ही प्रधान न्यायाधीश के पद के लिए सिफारिश करनी होगी। सर्वोच्च अदालत में न्यूनतम तीन वर्ष न्यायाधीश के रूप में कार्य करने की योग्यता संविधान में निर्धारित है।

न्याय परिषद ने इसी मानदंड पर आधारित तीन वर्ष से अधिक समय तक सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीश रहे सपना प्रधान मल्ल, कुमार रेग्मी, हरि फुयाल, डा. मनोज शर्मा, डा. नहकुल सुवेदी और तिलप्रसाद श्रेष्ठ के नाम संवैधानिक परिषद को भेजे हैं।

वर्ष १९९७ से प्रधान न्यायालय की स्थापना के बाद प्रधान न्यायाधीश (न्यायाधीश जनरल) की नियुक्ति में न्यायिक इतिहास में केवल दो बार ही नियुक्ति के क्रम को तोड़ा गया है।

इसलिए न्याय परिषद की परंपरा है कि न्यायाधीश नियुक्त करते समय प्रधान न्यायाधीश के पद के लिए नाम उसी क्रम से सिफारिश करती है।

हालांकि इस बार न्यायिक क्षेत्र में नियुक्ति क्रम को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ का मानना है कि क्रम नहीं टूटेगा और अन्ततः कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल का नाम सिफारिश होगा, जबकि कुछ का अनुमान है कि रास्वपा के नेतृत्व वाली दो तिहाई बहुमत वाली सरकार इस परंपरा को नहीं दोहराएगी।

संवैधानिक परिषद के दो सदस्यों ने अनौपचारिक रूप से बताया है कि अभी तक प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश को लेकर किसी भी चर्चा का आयोजन नहीं हुआ है। एक सदस्य का कहना है, “पहली बैठक में कोई निष्कर्ष नहीं निकला था, अध्यादेश की चर्चा के बाद सभी का ध्यान वहीं केंद्रित हुआ है। अभी तो अध्यादेश जारी ही हुआ है, अब चर्चा चलनी शुरू होगी।”

अन्य कौन-कौन से पद रिक्त हैं?

दिनेशकुमार थपलिय के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रमुख निर्वाचन आयुक्त का पद रिक्त है। कार्यवाहक प्रमुख निर्वाचन आयुक्त रामप्रसाद भंडारी के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने पिछले फागुन में हुए चुनावों में दो पदों की रिक्ति बताई थी।

राष्ट्रीय प्राकृतिक स्रोत तथा वित्त आयोग का अध्यक्ष पद भी रिक्त है और एक सदस्य के अलावा अन्य सदस्य अनुपस्थित हैं। अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग में एक सदस्य पद खाली है। समावेशी आयोग में अध्यक्ष और एक सदस्य का पद रिक्त है। महिला आयोग में भी एक पद खाली है। मुस्लिम आयोग और थारू आयोग में भी रिक्त पद मौजूद हैं।

कहाँ-कहाँ रिक्तता है?

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