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सरकार ने राजनीतिक नियुक्ति वाले अदालत सदस्यों को इस्तीफा देने का किया आग्रह

सरकार ने कानूनी सचिव के माध्यम से प्रशासकीय अदालत और श्रम अदालत के सदस्यों से इस्तीफा देने का आग्रह किया है। कानूनी सचिव पारश्वर ढुंगाना ने कहा कि राजनीतिक नियुक्ति पाने वालों को विदा कर योग्य प्रतिस्पर्धी के माध्यम से नियुक्ति करने की सरकार की नीति है। प्रशासकीय अदालत में नवलकिशोर यादव और आलोकचन्द्र श्रेष्ठ तथा श्रम अदालत में शैलेन्द्र कुमार चौरसिया और कुमारी खरेल सदस्य हैं। २३ वैशाख, काठमाडौं।

कानूनी सचिव ढुंगाना ने एक बातचीत में कहा, “राजनीतिक नियुक्ति वाले व्यक्तियों को हटाकर उन पदों पर योग्य और प्रतिस्पर्धी व्यक्तियों की नियुक्ति करना सरकार की स्पष्ट नीति है।” उन्होंने आगे कहा, “सरकार ने उन्हें नियुक्त किया है, लेकिन बिना प्रतिस्पर्धा के हुई राजनीतिक नियुक्तियों की वजह से सरकार का संदेश मैं ने उन्हें पहुंचा दिया है।”

कानूनी सचिव से फोन पर बातचीत में, दो न्यायाधिकरण सदस्यों ने बताया कि उन्हें सर्वोच्च अदालत के कुछ न्यायाधीशों द्वारा फोन कर इस्तीफा देने के निर्देश मिले हैं। प्रशासकीय अदालत के सदस्य नवलकिशोर यादव और आलोकचन्द्र श्रेष्ठ तथा श्रम अदालत के सदस्य शैलेन्द्र कुमार चौरसिया और कुमारी खरेल हैं। ये सभी सदस्य पूर्व सरकार द्वारा नियुक्त किए गए थे।

सचिव ढुंगाना ने कहा, “अध्यक्षों की नियुक्ति न्यायपरिषद की सलाह से होती है, इसलिए सरकार ने इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया है।” प्रशासकीय अदालत निजामती कर्मचारियों से जुड़े मामलों और विवादों का निपटारा करती है, जबकि श्रम अदालत कर्मचारी और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बीच विवादों को सुलझाती है। दोनों अदालतें न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) प्रकृति की हैं।

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