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सुदन किराँती ने राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी पर तानाशाही का आरोप लगाया

श्रम संस्कृति पार्टी के वरिष्ठ नेता सुदन किराँती ने राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी को अलोकतांत्रिक और तानाशाही प्रवृत्ति का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार पर न्यायालय में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए राजनीतिक दलों के धार्मिक संस्थाओं के समानकरण और नेताओं की देवत्वकरण की बढ़ती प्रवृत्ति पर अपनी चिंता व्यक्त की। किराँती ने बताया कि पुराने दलों में तानाशाही प्रवृत्ति बढ़ रही है और उन्होंने नेकपा माओवादी केन्द्र छोड़ने का मुख्य कारण आंतरिक लोकतंत्र की कमी और नेतृत्व की कार्यशैली को बताया। २५ वैशाख, काठमाडौँ।

शुक्रवार को काठमाडौँ में आयोजित एक कार्यक्रम में हर्कराज राई के नेतृत्व वाली श्रम संस्कृति पार्टी में शामिल होते हुए किराँती ने ये टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने सरकार पर न्यायपालिका में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए दलों के धार्मिक संस्थाओं के समान बनने और नेताओं की देवत्वकरण की प्रवृत्ति को लेकर चिंता जताई। पुराने राजनीतिक दलों में तानाशाही की बढ़ती प्रवृत्ति और नेतृत्वकर्ता के बीच के दबाव को लेकर भी उन्होंने अपनी बात रखी। पार्टी प्रवेश समारोह में उन्होंने कहा, “सरकार नाज़ीवाद के घोड़े पर सवार होकर चल रही है। लेकिन याद रखिए, नाज़ीवाद और फासिस्टवाद इतिहास के अंत को दर्शाते हैं। मैंने छोड़ते समय दो मिनट भी बोलने का मौका नहीं पाया।”

किराँती ने पार्टी और सरकार के संचालन में हो रहे निराशाजनक हस्तक्षेप को अब स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, यह बात भी स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि आने वाला राजनीतिक मार्ग प्रकृति, संस्कृति और प्रौद्योगिकी के संयोजन पर आधारित होना चाहिए।

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