
समुद्र सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है, आने वाला वर्ष सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना
२६ वैशाख, पेरिस । विश्व के महासागरों की सतह का तापमान लगातार बढ़ने के कारण यूरोपीय संघ के अंतर्गत जलवायु निगरानी निकाय ने गंभीर चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान स्थिति २०२४ में टूटे सबसे उच्च समुद्री तापमान के रिकॉर्ड के लगभग बराबर है। इस गर्मी की वजह से कुछ दिनों या हफ्तों के भीतर नया रिकॉर्ड बनने की संभावना बढ़ गई है। यूरोपीय मध्यम दूरी मौसम पूर्वानुमान केंद्र की जलवायु प्रमुख सामन्था बर्गेस ने कहा कि महासागर सतह का लगातार गर्म होना विश्व जलवायु व्यवस्था में व्यापक बदलाव ला रहा है। उन्होंने कहा, ‘मई के महीने में समुद्री तापमान नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ सकता है।’
यूरोपीय संघ के कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा ने अप्रैल में वैश्विक समुद्री तापमान में वृद्धि की पुष्टि की है, जो अब तक मापी गई दूसरी सबसे उच्चतम तीव्रता है। खासकर प्रशांत महासागर से लेकर उत्तर अमेरिका तक फैले क्षेत्र में समुद्र की गर्मी की लहर में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे कई जगह जलवायु असंतुलन पैदा हुआ है। इसी बीच, विश्व मौसम संगठन ने मई से जुलाई तक ‘एल निनो’ की संभावना पर चेतावनी जारी की है। ‘एल निनो’ प्रशांत महासागर में तापमान और वायु प्रवाह में प्राकृतिक बदलाव है, जो सूखा, भारी वर्षा, तूफान और अन्य चरम मौसमी घटनाएं विश्वभर बढ़ाता है।
वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार, तापमान वृद्धि का कारण केवल एल निनो नहीं है, बल्कि मानव गतिविधियों से उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों के कारण दीर्घकालीन वैश्विक ताप वृद्धि भी है जो पृथ्वी के तापमान को तेजी से बढ़ा रही है। इसी वजह से सन् २०२३ और २०२४ एल निनो अवधि में क्रमशः दूसरा और सबसे गर्म वर्ष बन चुके हैं। कुछ मौसम पूर्वानुमान आगामी एल निनो को अधिक शक्तिशाली होने का संकेत देते हैं, जिसे तीन दशकों पहले आए अत्यंत शक्तिशाली एल निनो से तुलना किया जा सकता है। बर्कले अर्थ अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक जेक हाउसफादर के अनुसार, यदि आगामी एल निनो शक्तिशाली रहा तो सन् २०२७ अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना और बढ़ जाएगी। हालांकि जलवायु प्रमुख बर्गेस ने कहा कि इस समय इसकी तीव्रता का निर्धारण करना कठिन है। उन्होंने कहा, ‘वसंत ऋतु में किए जाने वाले पूर्वानुमान अक्सर असमंजसपूर्ण होते हैं, लेकिन इसका प्रभाव विश्व स्तर पर स्पष्ट रूप से महसूस किया जाएगा।’
उनके अनुसार, एल निनो का चरम प्रभाव आमतौर पर इसके चरम वर्ष के बाद दिखाई देता है, जिससे आगे आने वाले वर्षों में तापमान में और वृद्धि हो सकती है। कोपरनिकस ने मार्च और अप्रैल में समुद्र सतह के तापमान में निरंतर वृद्धि दर्ज की है, जो एल निनो के आगमन का संकेत है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस अत्यधिक तापमान वृद्धि में केवल प्राकृतिक एल निनो ही नहीं, बल्कि जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक उपयोग से होने वाला दीर्घकालीन जलवायु परिवर्तन भी मुख्य भूमिका निभा रहा है। अप्रैल में विश्व का औसत तापमान औद्योगिक युग (१८५०-१९००) के स्तर से १.४३ डिग्री सेल्सियस अधिक नापा गया। साथ ही, आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री बर्फ भी लगभग ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे पृथ्वी की जलवायु प्रणाली पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। -एएफपी के सहयोग से