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छिमेकसँग सीमा समस्या संवादबाटै समाधान गर्ने सरकारी सन्देश

सीमा विवाद समाधान के लिए सरकार ने कूटनीतिक संवाद को प्राथमिकता दी

राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने संघीय संसद में सीमा विवाद को कूटनीतिक संवाद के माध्यम से सुलझाने की नीति पर पुनः ज़ोर दिया। सरकार ने २० वैशाख को लिपुलेक क्षेत्र में सीमा संबंधी मुद्दे पर भारत और चीन को पत्राचार किया था। नीति तथा कार्यक्रम में नेपाल ने बहुपक्षीय सहयोग और संतुलित कूटनीति अपनाने की स्पष्ट दिशा दिखाई है। २९ वैशाख, काठमांडू। नेपाल ने बार-बार सीमा विवाद का समाधान वार्ता के जरिये किए जाने की इच्छा जताई है। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने सोमवार को संघीय संसद में प्रस्तुत सरकार के नीति तथा कार्यक्रम में कहा, ‘सीमा विवाद का समाधान कूटनीतिक संवाद के माध्यम से किया जाएगा।’ सरकार ने २० वैशाख को लिपुलेक पास के संदर्भ में भारत और चीन को कूटनीतिक नोट भेजा था। इस संदर्भ में एक सप्ताह पहले ही इन पड़ोसी देशों को नोट भेजा गया था, जिससे नीति तथा कार्यक्रम में उल्लिखित वाक्यांश का एक विशेष महत्व है, विशेषज्ञों ने बताया।
गत चैत्र में नवें हिन्द महासागर सम्मेलन में भाग लेने मॉरीशस गए विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। उस वक्त दोनों पक्षों ने संवाद को सौहार्दपूर्ण बताया था। लगभग एक माह पहले दिल्ली के साथ संबंधों में तनाव की आशंका जताई गई थी। अपने क्षेत्र लिपुलेक पास होते हुए भारत और चीन ने तीर्थयात्रियों के आवागमन की घोषणा करने के बाद नेपाल ने कूटनीतिक नोट भेजा था। इस विषय से संबंधों में मतभेद आने की भी समीक्षकों की राय है। नेपाल द्वारा पत्र भेजे जाने के एक सप्ताह में भारत के विदेश मंत्रालय ने दो बार जवाब दे दिया है, जबकि बीजिंग ने सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।
‘ऐसा हालात नेपाल की कमजोरी नहीं है। पड़ोसी जब चोट पहुंचाते हैं तो नेपाल ने जवाब दिया है,’ पूर्व राजदूत नीलाम्बर आचार्य ने कहा, ‘विवाद की शुरुआत तो वे ही थे।’ नेपाल ने १८१६ की सुगौली संधि सहित ऐतिहासिक आधारों पर लिम्पियाधुरा और पूर्वी भूभाग अपना दावा करते आए हैं। २०७७ के सरकार के नीति तथा कार्यक्रम में लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेक का नया नक्शा जारी करने की प्रतिबद्धता थी। उसी अनुसार सरकार ने नया ‘चुच्चे नक्शा’ जारी किया।
२०७६ में भारतीय सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा जारी नक्शे में कालापानी, लिपुलेक और लिम्पियाधुरा सहित क्षेत्र भारत की ओर दिखाए गए थे। इसके पश्चात सरकार ने कूटनीतिक नोट से कई बार बातचीत की मांग की लेकिन भारत ने अस्वीकार किया। फिर २०७७/०७८ के नीति तथा कार्यक्रम में उल्लेखित करते हुए नेपाल ने नया नक्शा जारी किया था। ताजा २०८३/०८४ के नीति तथा कार्यक्रम में भी नेपाल ने संवाद और वार्ता का कोई विकल्प नहीं होने का संदेश दिया है, जो पुरानी नीति की निरंतरता है। सीमा विवाद नई समस्या नहीं है और इसे निपटाने में लंबा समय लग सकता है, विशेषज्ञ बताते हैं। पड़ोसियों के साथ संबंध केवल सीमा विवाद के आधार पर देखने योग्य नहीं है, उनकी राय है। पूर्व विदेश मंत्री कमल थापा ने कहा, ‘सीमा समस्या कूटनीतिक प्रयास से ही सुलझानी चाहिए और निरंतर कोशिश आवश्यक है। लेकिन इसे मुद्दा बनाकर पड़ोसियों के साथ रिश्ते खराब नहीं करने चाहिए।’
नेपाल आने वाले भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिश्री के दौरे को रोके जाने पर विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस तरह के दौरे के लिए दोनों पक्षों को पहल करनी चाहिए। सरकार ने नीति तथा कार्यक्रम में बहुआयामिक संबंधों पर जोर दिया है। नेपाल की संप्रभुता, भौगोलिक अखंडता और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र की चार प्रस्तावनाएं, असंलग्नता और पंचशील सिद्धांत आधारित संतुलित कूटनीति अपनाने की प्रतिबद्धता जताई गई है। राष्ट्रपति पौडेल ने नीति तथा कार्यक्रम में कहा, ‘पड़ोसी और मित्र राष्ट्रों के साथ पारस्परिक लाभ, सम्मान और बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित संबंध स्थापित किए जाएंगे।’
सरकार ने पारंपरिक कूटनीति को आर्थिक कूटनीति में परिवर्तित करते हुए नेपाल को सूचना प्रौद्योगिकी, नवाचार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाने, पर्यटन अवसंरचना, ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। विदेशी सहायता, निवेश और विकास सहयोग को नेपाल की संप्रभुता और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित के अनुरूप चलाने की नीति अपनाई गई है। भारत के साथ पञ्चेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना और चीन के साथ परिवहन संधि जैसे महत्वपूर्ण विषय फिलहाल अनदेखे रह गए हैं। नीति तथा कार्यक्रम में उल्लिखित इन विषयों को लागू करने के लिए सरकार को अग्रसर होना चाहिए, पूर्व विदेश मंत्री थापा का कहना है। वे यह भी बताते हैं कि पुराने समझौतों और संधियों का पालन कराने के लिए दोनों पड़ोसियों को समय-समय पर याद दिलाना जरूरी है। स्वाभिमान के साथ करते हुए अनावश्यक अहंकार दिखाने की जरूरत नहीं, थापा ने कहा। उनके अनुसार, ‘कोई भी देश का मंत्री आए और अगर मुलाकात न हो तो फर्क नहीं पड़ता, लेकिन चीन और भारत के साथ हमारे संबंध उससे भी उच्च स्तर के हैं।’
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री के नेपाल दौरे के रूकने पर विशेषज्ञों ने दोहराया है कि ऐसे दौरों को स्थगित नहीं होना चाहिए और बातचीत जारी रखनी चाहिए। पूर्व राजदूत आचार्य ने कहा, ‘ऐसे दौरे रोकने से कोई लाभ नहीं, संवाद चालू रहना चाहिए।’ पड़ोसी तथा अन्य मित्र राष्ट्रों के साथ नेपाल के संबंध स्पष्ट हैं और हाल की घटनाओं में नेपाल सरकार को दोष देना उपयुक्त नहीं है, उन्होंने कहा। दोनों पक्षों को संवाद के लिए बराबर जिम्मेदारी लेनी होगी। आचार्य ने कहा, ‘नीति तथा कार्यक्रम में संवाद का रास्ता खुला रखा गया है और हम इन दौरों के विरोध में नहीं हैं।’

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