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गोरखा की सुमित्रा पुडासैनी के विरुद्ध 50 लाख रुपये जुर्माना सहित भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने 50 लाख रुपये के घूस प्रकरण में चन्द्र बहादुर अधिकारी और सुमित्रा कुमारी घिमिरे पुडासैनी के विरुद्ध विशेष अदालत काठमांडू में आरोप पत्र दायर किया है। सुमित्रा कुमारी द्वारा आयोग को दी गई बयान और अदालत में दिए गए हलफनामे में अंतर पाए जाने के बाद अतिरिक्त जांच की गई थी। पुडासैनी ने चन्द्र बहादुर अधिकारी द्वारा दिया गया चेक वापस किया और घूस के लेन-देन में सहयोग करने की पुष्टि होने पर उन्हें भी दोषी माना गया है। 29 वैशाख, काठमांडू।

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने 50 लाख रुपये के घूस/रिसवत प्रकरण में विशेष अदालत काठमांडू में मंगलवार को आरोप पत्र दायर किया है। आयोग के अनुसार वादी नेपाल सरकार और प्रतिवादी चन्द्र बहादुर अधिकारी भी हैं। भ्रष्टाचार मामले में सरकारी गवाह के रूप में पेश की गईं गोरखा बारपाक सुलिकोट गाउँपालिका–7 की निवासी और वर्तमान में काठमांडू चन्द्रागिरी नगरपालिका–5 में रहने वाली सुमित्रा कुमारी घिमिरे पुडासैनी ने अदालत में दिए हलफनामे और जांच के दौरान दी गई बयान में असमानता होने के कारण अतिरिक्त जांच की गई थी।

जांच के दौरान पुडासैनी द्वारा आयोग को दी गई बयान के विपरीत विशेष अदालत में 2083 साल वैशाख 9 को हलफनामा देने की पुष्टि हुई है। चन्द्रबहादुर अधिकारी द्वारा लिए गए घूस की रकम का चेक “सुमित्रा कस्मेटिक एंड फेन्सी” नामक संस्था के नाम पर काटा गया था और उक्त संस्था की संचालिका पुडासैनी को वह चेक दिया गया था, ऐसा अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने दावा किया है। चेक मिलने के बाद पुडासैनी ने बैंक में सटही के लिए प्रयास किया, लेकिन सटही न मिलने पर चेक वापस किया गया, यह भी आयोग ने उजागर किया है।

आयोग के अनुसार इस तरह घूस के लेन-देन में सहयोग करना अपराध है, इसलिए उन्हें दोषी माना गया है। इस मामले में सुमित्रा पुडासैनी के खिलाफ 50 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 2059 के दफा 3(2) के तहत कैद और जुर्माना की मांग की गई है।

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