
१० महीनों में विकास खर्च खर्ब पहुंचा, लक्ष्य का मात्र २७.९१ प्रतिशत पूरा
समाचार सारांश
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- चालू आर्थिक वर्ष २०८२/८३ के १० महीनों में पूंजीगत खर्च मात्र १ खर्ब १३ अरब ८४ करोड़ रुपए हुआ है।
- अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने इस वर्ष सर्वाधिक पूंजीगत खर्च की उम्मीद जताई है।
- सरकार के १० महीनों के कुल खर्च ११ खर्ब ७३ अरब ५२ करोड़ तथा आय १० खर्ब १२ अरब ही रही, जिससे डेढ़ खर्ब का घाटा दिखा।
१ जेठ, काठमांडू। चालू आर्थिक वर्ष २०८२/८३ के १० महीने (साउन-वैशाख) पूरे होने पर पूंजीगत खर्च लगभग १ खर्ब रुपए के करीब पहुंच गया है।
महालेखा नियंत्रक कार्यालय के अनुसार वैशाख के अंत तक पूंजीगत खर्च १ खर्ब १३ अरब ८४ करोड़ रुपए के बराबर हुआ है, जो कि इस वर्ष के वार्षिक आवंटन के मुकाबले मात्र २७.९१ प्रतिशत है।
इस वर्ष अर्थ मंत्रालय ने बजट प्रावधान लचीला बनाया है, फिर भी विकास खर्च अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है। हालांकि अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने इस वर्ष सर्वाधिक पूंजीगत खर्च होने की आशा जताई है। उन्होंने इसी सप्ताह अर्थ समिति में हुई चर्चा में यह बात कही थी।
अर्थमंत्री की आशा के अनुसार खर्च में गति आने के लिए वर्ष के अंत तक विकास कार्यों और भुगतान में तेजी लाना आवश्यक होगा। इस वर्ष सरकार ने ४ खर्ब ७ अरब ८८ करोड़ रुपए के पूंजीगत खर्च का लक्ष्य रखा है।
वैशाख के अंत तक चालू खर्च ८ खर्ब १४ अरब ६५ करोड़ रुपए पहुंच गया है, जिसमें वित्तीय हस्तांतरण राशि भी शामिल है। चालू खर्च ६८.९८ प्रतिशत हो चुका है। सरकार ने इस वर्ष ११ खर्ब ८० अरब ९८ करोड़ रुपए का चालू खर्च लक्षित किया है।
वित्तीय प्रबंधन की ओर खर्च २ खर्ब ४५ अरब रुपए पहुंचा है, जिसका अधिकांश हिस्सा सार्वजनिक ऋण के ब्याज भुगतान पर गया है। वित्तीय प्रबंधन खर्च विनियोजन के मुकाबले ६५.३ प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस वर्ष सरकार ने ३ खर्ब ७५ अरब रुपए वित्तीय प्रबंधन के लिए आवंटित किए हैं।
कुल बजट खर्च १० महीनों में ११ खर्ब ७३ अरब ५२ करोड़ रुपए रहा, जो कुल आवंटन का ५९.७५ प्रतिशत है। सरकार इस वर्ष १९ खर्ब ६४ अरब रुपए के बजट को लागू कर रही है।
वहीं, राजस्व संग्रह धीमा रहा है। १० महीनों में सरकार ने लक्ष्य का केवल ६६.७९ प्रतिशत राजस्व संग्रह किया है। इस वर्ष सरकार ने १४ खर्ब ८० अरब रुपए राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा था।
संकलित राशि ९ खर्ब ८८ अरब ५५ करोड़ रुपए पहुंची है, जिसमें कर राजस्व ८ खर्ब ९३ अरब और गैरकर राजस्व ९४ अरब ९८ करोड़ रुपए है। इस वर्ष सरकार ने ५३ अरब ४४ करोड़ रुपए विदेशी अनुदान प्राप्त करने का अनुमान जताया था।
प्राप्ति मात्र १० महीनों में १७ अरब ७८ करोड़ रुपए रह गई, जो लक्ष्य का ३३.२८ प्रतिशत है। सरकार ने इन तीनों खर्च शीर्षकों में आवंटन के अनुरूप खर्च न होने पर अर्धवार्षिक समीक्षा कर लक्ष्य कम किया है।
आय और खर्च में डेढ़ खर्ब रुपए का अंतर
सरकार की आय और खर्च के बीच अभी डेढ़ खर्ब रुपए का अंतर है। १० महीनों में ११ खर्ब ७३ अरब ५२ करोड़ रुपए खर्च के मुकाबले राजस्व, विदेशी अनुदान और अन्य आय से कुल १० खर्ब १२ अरब रुपए ही प्राप्त हुए हैं।
इस कारण सरकार के खाते में डेढ़ खर्ब रुपए का घाटा दिखता है। इसे पूरा करने के लिए सरकार आंतरिक और बाह्य ऋण पर निर्भर है।