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सय रुपैयाँ बढीको सामानमा भन्सार शुल्क लिने निर्णयमा सर्वोच्चको रोक

सर्वोच्च अदालत ने 100 रुपये से अधिक मूल्य वाली वस्तुओं पर भन्सार शुल्क पर अंतरिम रोक लगाई

१ जेठ, काठमाडौं । सर्वोच्च अदालत ने दैनिक उपभोग्य वस्तुओं पर 100 रुपये से अधिक मूल्य वाली वस्तुओं पर सरकार द्वारा लगाए जाने वाले भन्सार शुल्क पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश जारी किया है। नेपाल-भारत सीमा नाकों से आम जनता द्वारा लाई जाने वाली 100 रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं पर भन्सार कर लगाने के निर्णय पर सर्वोच्च अदालत ने फिलहाल रोक लगा दी है। शुक्रवार को न्यायाधीश हरिप्रसाद फुयाल और टेकप्रसाद ढुंगानाद्वारा संयुक्त इजलास ने दैनिक उपभोग्य वस्तुओं पर भन्सार शुल्क न लगाए जाने हेतु प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद कार्यालय, अर्थ मन्त्रालय एवं सम्बंधित निकायों को अंतरिम आदेश दिया है।

अर्थ मन्त्रालय के इस कदम का विरोध करते हुए अधिवक्ता अमितेश पण्डित, आकाश महतो, सुयोग्य सिंह और प्रशांत विक्रम शाह ने वैशाख १४ गते सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की थी। अधिवक्ता महतो के अनुसार, भन्सार महसूल ऐन २०८१ की धारा १३(२) के अंतर्गत इस मामले में अदालत ने आदेश दिया है। ‘भन्सार महसूल ऐन २०८१ की धारा १३(२) में भन्सार छुट देने की व्यवस्था है। लेकिन राजपत्र २०८५ जेठ १५ को सूचना में 100 रुपये से ऊपर की वस्तुओं पर भन्सार कर लगाया गया है, जो कि इस ऐन के अनुरूप नहीं है। इस आधार पर हमने भन्सार ऐन २०८१ की धारा १३(२) के अंतर्गत मांग की थी और अदालत ने उसी के अनुसार आदेश दिया है,’ उन्होंने बताया।

इससे पूर्व अर्थ मन्त्रालय ने 100 रुपये से अधिक मूल्य वाली वस्तुओं पर भन्सार कर अनिवार्य करने का निर्णय लिया था। इसके तहत तराई-मधेश क्षेत्र के सीमा नाकों पर कड़ी कार्यवाही की गई थी, जिससे स्थानीय लोग आक्रोशित थे। अधिवक्ताओं द्वारा दायर रिट याचिका में नेपाल-भारत सीमा नाकों से 100 रुपये से अधिक मूल्य की दैनिक उपभोग्य वस्तुओं के आयात की प्रथा को प्रावधानों के विरुद्ध बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी। सर्वोच्च के आदेश के साथ ही इस याचिका के अंतिम नतीजे आने तक सरकार दैनिक उपभोग्य वस्तुओं पर भन्सार शुल्क वसूल नहीं कर पाएगी।

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