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मष्तिष्कघात र हृदयघातको मुख्य कारण – Online Khabar

मस्तिष्काघात और हृदयाघात के मुख्य कारणों में नई वैज्ञानिक खोज

वैज्ञानिकों ने खोजा है कि विश्व के हर पाँच में से एक व्यक्ति में मस्तिष्काघात और हृदय संबंधी रोगों से मृत्यु के खतरे में एक वंशानुगत और छुपा हुआ कोलेस्ट्रोल जोखिम होता है। साधारण रक्त परीक्षण में कोलेस्ट्रोल की मात्रा सामान्य दिखने के बावजूद, इस विशेष प्रकार का तत्व हृदय स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, यह नया शोध बताता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, रक्त में पाया जाने वाला यह छुपा हुआ कोलेस्ट्रोल कण ‘लिपोप्रोटीन ए’ या Lp(a) कहलाता है। यह खराब कोलेस्ट्रोल जैसे दिखता है, पर इसमें एक अतिरिक्त प्रोटीन होता है जो इसे हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए और भी हानिकारक बनाता है। यह समस्या पूरी तरह वंशानुगत होती है और इसके कोई बाहरी लक्षण नहीं होते। इसलिए विश्व के लगभग 20 प्रतिशत लोग इस जोखिम के साथ जी रहे हैं, पर उनके पास इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

कनाडा के मॉन्ट्रियल में आयोजित ‘सोसाइटी फॉर कार्डियोवैस्कुलर एंजियोग्राफी एंड इंटरवेंशन’ 2026 के वैज्ञानिक सम्मेलन में यह रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान द्वारा संचालित तीन बड़े अध्ययनों में भाग लेने वाले 40 वर्ष से अधिक उम्र के 20,070 वयस्कों के रक्त नमूनों का परीक्षण कर यह निष्कर्ष निकाला गया। लगभग चार वर्षों के निगरानी अवधि के दौरान Lp(a) की मात्रा 175 nmo/L या उससे अधिक होने वाले व्यक्तियों में हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं पाई गईं। ऐसे मरीजों में हृदय रोग से मृत्यु की संभावना 49 प्रतिशत और मस्तिष्काघात का खतरा 64 प्रतिशत अधिक होता है। विशेष रूप से, पहले से हृदय रोगग्रस्त व्यक्तियों में इस मात्रा का अधिक होना जोखिम को और बढ़ाता है।

वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुभाष बनर्जी के अनुसार, यह अध्ययन पहली बार Lp(a) के उस स्तर को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है जो मरीज को मृत्यु और स्ट्रोक के जोखिम में डालता है। उन्होंने कहा कि चाहे उम्र कोई भी हो, लोगों को एक बार साधारण और सस्ता रक्त परीक्षण कर अपने शरीर में इस वंशानुगत जोखिम की जांच करानी चाहिए। यदि रक्त में इसकी मात्रा अधिक पाई जाती है तो डॉक्टर की सलाह अनुसार अन्य जोखिमों जैसे एलडीएल कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करना और हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के उपाय कड़ाई से अपनाने चाहिए। भविष्य में इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर उपचार की नई विधियाँ विकसित की जा रही हैं, जिससे यह जानकारी मरीजों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनी रहेगी, वैज्ञानिकों का विश्वास है।

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