
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की ‘बालेनोमिक्स’ और आर्थिक प्राथमिकताएँ
वर्तमान प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ‘बालेन’ ने अपने चुनावी प्रचार के दौरान कुल २६ मिनट ही चुनावी सभाओं को संबोधित किया, यह तथ्य सामने आया है। लेकिन उन २६ मिनटों में उन्होंने देश की समस्याओं के कौन-कौन से आयामों को प्राथमिकता दी और प्रधानमंत्री बनने के बाद उन विषयों को कैसे लागू कर रहे हैं, इस बारे में गंभीर चर्चा नहीं हुई है। वास्तव में उन २६ मिनटों में से २१ मिनट उन्होंने देश की आर्थिक समृद्धि के लिए योजनाओं और जनता के जीवन स्तर को उठाने वाली आर्थिक प्राथमिकताओं पर अपने दृष्टिकोण रखने में बिताए। खासकर कृषि उत्पादकता वृद्धि, किसानों को मिलने वाले लाभ और पर्यटन के विकास पर उनका ध्यान स्पष्ट रूप से देखा गया। एक चुनावी सभा में उन्होंने कहा, ‘देशवासियों को यहीं की ताजा सब्जियाँ खिलाने, किसानों को उचित मूल्य दिलाने का लक्ष्य है।’ पर्यटकों को थारू खाना खिलाने से लेकर बडिमालिका के पर्यटन विकास तक उनके भाषण में शामिल था।
प्रधानमंत्री बनने के दो महीने के अंदर ही उन्होंने शहरों के डिपार्टमेंटल स्टोरों से आयातित चीज-बटर के स्टाल हटा दिए हैं। देशी केले के बाजार के पकने की खबर चर्चा में है। पिछले सप्ताह ही उन्होंने नेपाल की सरकारी स्वामित्व वाली दुग्ध विकास संस्थान द्वारा निर्मित ‘डीडीसी चीज’ के ब्रांडिंग दृश्य को प्रचार में देखा जा सका, जिसके बाद उस कंपनी के उत्पादों की मांग काफी बढ़ी है। डीडीसी अपने उत्पाद बेचने में असमर्थ होने के कारण स्टोरों में जमा थे तथा वर्षों से दूध उत्पादकों को भुगतान नहीं कर पा रही थी, ऐसे सरकारी पिछड़ेपन की कहानियों के बीच यह उत्साहजनक खबर है। इसी बीच, नेपाली सरकार ने सीमावर्ती भारतीय बाजार से मूल्य १०० रुपये से ऊपर के सामान बिना भन्सार शुल्क चुकाए नेपाल में लाने पर रोक लगा दी है और न्यूनतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की प्रमाणिकता भन्सार स्थल पर ही कराने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे सीमावर्ती क्षेत्र के द्विपक्षीय व्यापार और सामाजिक संबंधों पर प्रभाव पड़ा है, जिस पर सरकार पर भी आरोप लगे हैं।
इसी प्रकार, विदेश में अध्ययन कराने के नाम पर नेपाली प्रतिभा और पूंजी के तीव्र पलायन का कारण बने लगभग १०० शैक्षिक परामर्शदाताओं की गतिविधियों पर आक्रामक नियंत्रण भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त इस विषय की गहराई से जांच और राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता है। इन सभी विषयों की समीक्षा करने पर सबसे बड़ा सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा निर्मित नेपाल की आर्थिक नीति (जिसे ‘बालेनोमिक्स’ कहा जाए) कैसा स्वरूप ले रही है? और यह नीति देश की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की आवश्यकता के अनुसार कितनी उपयुक्त और क्रियान्वयन योग्य है?