
‘नीति तथा कार्यक्रममा चुरे खनिज दोहन पर चर्चा है, संरक्षण का कोई उल्लेख नहीं’
नेपाल के प्रथम राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव ने चुरे क्षेत्र में तीव्र खनिज दोहन को तत्काल रोकने की चेतावनी दी है, अन्यथा तराई क्षेत्र कुछ दशकों में मरुस्थल बन जाएगा। सरकार की नीति तथा कार्यक्रम में चुरे संरक्षण पर चर्चा न होकर खनिज उत्खनन की बात किए जाने से वे चिंतित हैं। देश की लगभग ६० प्रतिशत जनसंख्या चुरे और तराई क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए उन्होंने सरकार से इस क्षेत्र को बचाने हेतु कानूनी व्यवस्था और बजट सुनिश्चित करने की मांग की है।
डा. यादव ने कहा, “यदि चुरे और तराई का तीव्र दोहन नहीं रोका गया तो कुछ दशकों में तराई मरुस्थल बन जाएगी।” उनके कार्यकाल के दौरान, नेपाल सरकार ने आर्थिक वर्ष २०६६/६७ में राष्ट्रपति चुरे संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया था। २०७१ असार २ गते राष्ट्रपति चुरे-तराई मधेश संरक्षण विकास समिति का गठन किया गया तथा २०७४ जेठ में गुरुयोजना स्वीकृत की गई थी। लेकिन इस बार सरकार की नीति तथा कार्यक्रम में ‘चुरे संरक्षण’ का कोई उल्लेख नहीं है।
उन्होंने अपने जीवन में चार कोसे क्षेत्र में झाड़ी कटान और चुरे के आधे जंगलों के नष्ट होने की याद करते हुए बताया कि जंगलों के विनाश से तराई-मधेश में अन्न और पानी की गंभीर संकट की स्थिति पैदा हो गई है। वे कहते हैं, “अगर तराई मरुस्थल बन गई तो हिमालय के हिम २० वर्षों में पिघल जाएंगे और हमारी सभ्यता समाप्त हो जाएगी।” इसीलिए उन्होंने वर्तमान सरकार से चुरे संरक्षण के लिए आवश्यक कानून और बजट सुनिश्चित करने का विशेष अनुरोध किया है।
डा. यादव ने कहा कि चुरे की मिट्टी, बालू, पत्थर, जंगल, पशु-पक्षी और जैविक जीवन प्रणाली का संरक्षण राष्ट्रीय हित में है। वे कहते हैं, “यदि तराई मरुस्थल बन गया तो हिमालय के हिम २० वर्षों में पिघल जाएंगे और हमारी सभ्यता नष्ट हो जाएगी।”