
झापा में पहली बार मखना की व्यावसायिक खेती की शुरुआत
१६ जेठ, भद्रपुर (झापा) । धान की खेती के लिए प्रसिद्ध झापा के दक्षिणी सीमावर्ती क्षेत्र कचनकवल में पहली बार व्यावसायिक रूप से मखना की खेती शुरू की गई है। पानी में उगने वाली कमल प्रजाति के पौष्टिक खाद्य पदार्थ मखना की खेती युवा कृषक द्वारा नेपाल में पहली बार बड़े क्षेत्रफल में शुरू होने के कारण यह खेती स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। कचनकवल गाउँपालिका–४ के केचाना के ३९ वर्षीय कृषक चन्द्र राजवंशी ने भारत के बिहार से तकनीक सीखकर २० विघा क्षेत्र में मखना की खेती शुरू की है। धान और मक्के की खेती वाले खेत में पानी भरकर की जाने वाली यह खेती झापा में नई और अनूठी कृषि प्रणाली के रूप में देखी जा रही है।
राजवंशी ने बताया कि उन्होंने १० वर्ष के लिए प्रति विघा ३० मन धान के मूल्य के बराबर अग्रिम राशि देकर भाड़े पर ली गई जमीन पर मखना की खेती शुरू की है। उन्होंने कहा, ‘भारत के सीमावर्ती क्षेत्र में मखना की खेती से अच्छी आमदनी होती देख इसके लिए नेपाल में भी अवसर तलाशने का विचार आया। जोखिम जरूर है, लेकिन नई खेती के परीक्षण के रूप में बड़ी निवेश कर इसे प्रारंभ किया है।’ मखना पानी में फलने वाली कमल प्रजाति की वनस्पति है। इसके चौड़े पत्ते कांटेदार होते हैं और पत्तों के बीच फूल और फल लगते हैं।
वैशाख के अंतिम सप्ताह से फूलने लगने वाली मखना साउन के अंतिम सप्ताह से पकने लगती है, कृषि किसान राजवंशी ने बताया। उनके अनुसार मखना खेती शुरू करने में काफी मेहनत लगती है। उन्होंने कहा, ‘पुष महिनے से खेत खोदकर इसकी तैयारी शुरू की जाती है, खेत को मिहनत से तैयार करते हुए मजबूत आड़ी बनानी पड़ती है और निरंतर पानी पहले की तरह बनाए रखना होता है।’ आठ महीने बाद ही उत्पादन होता है, इसलिए यह खेती धैर्य और निवेश दोनों मांगती है, जो उन्होंने अपने अनुभव में बताया। उन्होंने कहा कि बीज से लेकर तकनीक तक उन्होंने भारत से लाई है और अभी तक करीब १४ लाख रु. का खर्च कर चुके हैं। उत्पादित मखना को यदि भारत को निर्यात किया जाए तो प्रति विघा ३ लाख रुपये तक की आय होने का अनुमान है।
राजवंशी के अनुसार नेपाल में अभी तक व्यावसायिक स्तर पर मखना की खेती नहीं हुई है इसलिए इसकी बाज़ार व्यवस्था और सरकारी नीतियां स्पष्ट नहीं हैं। उत्पादन के बाद बिक्री और निर्यात प्रक्रिया में सहूलियत की आवश्यकता है। मखना की खेती शुरू होते ही कचनकवल क्षेत्र में लोगों की आंतरिक रुचि बढ़ी है। स्थानीय लोग खुशी व्यक्त करते हुए बताते हैं कि यह अनूठी खेती देखने रोजाना कई किसान खेत तक पहुंचते हैं। राजवंशी ने कहा, ‘धान के खेत में पानी भरकर अलग तरह की खेती देख कई लोगों में उत्सुकता जागी है।’ मखना धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ माना जाता है। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ में प्रसाद के रूप में उपयोग होने वाला मखना नेपाल में मुख्यत: भारत से आयात किया जाता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार मखना में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और विटामिन ‘सी’ अच्छी मात्रा में पाया जाता है। स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद मखना को ‘सुपर फूड’ और ‘ऑर्गेनिक खाद्य’ भी कहा जाता है, कृषि किसान राजवंशी ने बताया। रासायनिक उर्वरक और कीटनাশक के बिना उत्पादन किया जा सकने के कारण इसका मांग भारत सहित अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि बिना सरकारी सहायता अपने निजी निवेश से बोरिंग कर खेती कर रहे हैं। मखनाको उचित बाजार मिलने पर आगामी वर्षों में इस खेती को और भी विस्तार देने की योजना है।