
जीपीएस स्पूफिंग: वैश्विक उड्डयन क्षेत्र में चुनौती बनता अदृश्य ‘युद्ध’
यूके के रक्षामंत्री के नेतृत्व वाले ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स का विमान कुछ दिन पहले एस्टोनिया पहुंचते ही एक असामान्य घटना का सामना करना पड़ा। बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा परीक्षण किए गए उड़ान डेटा के अनुसार, वह विमान अचानक कुछ सेकंडों में ही लगभग ३०० किलोमीटर दूर रूसी क्षेत्र में पहुंच गया। विमान सेंट पीटर्सबर्ग के पास एक ताल के ऊपर मात्र ११ किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ रहा था। हालांकि ये सभी विवरण वास्तविक नहीं थे। इस घटना का कारण “जीपीएस स्पूफिंग” नामक एक तरह की भ्रामक प्रणाली थी, जिसने विमान के नेविगेशन सिस्टम को भ्रमित कर दिया। जीपीएस सेटेलाइट से आने वाले सिग्नल्स को कई रेडियो सिग्नल्स नकल करके प्रसारित करते हैं, क्योंकि सेटेलाइट से पृथ्वी पर आने वाले संकेत कमजोर हो जाते हैं और जमीन पर स्थित ट्रांसमीटर अधिक शक्तिशाली सिग्नल भेजते हैं। इस प्रकार विमान के नेविगेशन सिस्टम को गुमराह किया जाता है।
स्पूफिंग का उपयोग आमतौर पर सैनिक करते हैं। वे लंबी दूरी के मिसाइल और छोटे ड्रोन सहित जीपीएस नेविगेशन तकनीक वाले दुश्मन के हथियारों के लक्ष्य को कमजोर करने के लिए इस प्रकार की तकनीक अपनाते हैं। कई देशों की सेनाएं इस प्रकार के ट्रांसमीटर बनाकर उन्हें निश्चित स्थानों पर या वाहनों में स्थापित कर संचालित करती हैं। लेकिन युद्ध काल के इलेक्ट्रॉनिक जाल में कभी-कभी व्यावसायिक उड़ानें भी फंस जाती हैं। रॉयल एयर फोर्स के पायलटों ने हालिया घटना के बाद जीपीएस की बजाय कम सटीक प्रणाली का उपयोग कर विमान को मार्गदर्शन करना पड़ा, रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि विमान की सुरक्षा पर किसी प्रकार का खतरा नहीं था।
वास्तव में उस दिन उस क्षेत्र में प्रभावित होने वाला विमान केवल एक ही नहीं था। उड़ान सलाहकार कंपनी एसकेएआई डेटा सर्विस द्वारा बीबीसी को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, स्पूफिंग के कारण १०० से अधिक यात्री विमान गलत डेटा दिखा रहे थे। यह डेटा दिखाता है कि स्पूफिंग और जैमिंग की गतिविधियां कई सैन्य अभियानों और युद्ध क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हो रही हैं। जीपीएस में बाधाएं डालने वाले ये सिग्नल बाल्टिक क्षेत्र, खाड़ी, लाल सागर, भारत, पाकिस्तान और म्यांमार के आस-पास पाए गए हैं। २८ फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के साथ युद्ध शुरू करने के बाद से खाड़ी में भी विमान स्पूफिंग से जुड़ी समस्याओं की सूचना दे रहे हैं।