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शिक्षक महासंघ की मांगें और शिकायतें

फाइल तस्वीर


समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • शिक्षक महासंघ ने प्रारंभिक बालशिक्षा के शिक्षकों और विद्यालय कर्मचारियों की पारिश्रमिक समस्याओं को सरकार द्वारा बजट में नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
  • कुल बजट का 20 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र में निवेश करने की मांग के विपरीत, सरकार ने केवल 10.27 प्रतिशत बजट का आवंटन किया है, महासंघ ने यह जानकारी दी।
  • महासंघ ने 2082 वैशाख 17 को सरकार के साथ हुए 9 बिंदुओं के समझौते को तत्काल लागू करने और विद्यालय शिक्षा अधिनियम जारी करने की मांग की है।

19 वैशाख, काठमांडू। शिक्षक महासंघ ने बताया है कि सरकार ने प्रारंभिक बालशिक्षा के शिक्षकों एवं विद्यालय कर्मचारियों की परेशानियों का समाधान नहीं किया है।

महासंघ ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है, ‘बजट ने लंबे समय से न्यूनतम वेतन पर काम कर रहे प्रारंभिक बालशिक्षा के शिक्षकों और विद्यालय कर्मचारियों की समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया है, साथ ही विद्यालयों में कार्यरत शिक्षण अनुदान प्राप्त शिक्षकों के लिए महंगाई भत्ता भी सुनिश्चित नहीं किया गया है।’

महासंघ ने प्रारंभिक बालशिक्षा के शिक्षकों और विद्यालय कर्मचारियों के पद और स्तर निर्धारित कर वेतन-वृद्धि और अन्य सेवा सुविधाएँ प्रदान करने तथा सभी शिक्षण अनुदान प्राप्त शिक्षकों को महंगाई भत्ता देने की मांग की है।

बजट में शिक्षक और पेशेवर वर्ग की पारिश्रमिक वृद्धि सकारात्मक है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में उचित निवेश नहीं हुआ है, महासंघ ने कहा।

‘कुल बजट का 20 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र में निवेश करने की लगातार मांग के बावजूद इस वर्ष केवल 10.27 प्रतिशत बजट आवंटित होना यह दर्शाता है कि शिक्षा क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता में नहीं है,’ विज्ञप्ति में कहा गया है।

50 यूनिट से अधिक विद्युत खपत पर 5 प्रतिशत वैट लगाने के प्रावधान से लगातार आर्थिक तंगी झेल रहे सामुदायिक विद्यालयों और नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, महासंघ ने चिंता जताई है।

2082 वैशाख 17 को सरकार के साथ हुए 9 बिंदुओं के समझौते को तुरंत लागू कर विद्यालय शिक्षा अधिनियम जारी करने की महासंघ ने फिर से मांग की है।

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