
अजिरकोट के नागेपोखरी क्षेत्र के विकास एवं संरक्षण योजना
अजिरकोट गाउँपालिका के अंतर्गत आने वाले नागेपोखरी क्षेत्र को शामिल करते हुए बुद्ध हिमाल हिमालचुली ग्रेट लेक्स सर्किट ट्रेल विकास के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने का कार्य जारी है। डिवीजन वन कार्यालय गोरखा ने सिमसार क्षेत्र और पर्यटन संवर्धन कार्यक्रम के तहत नागेपोखरी संरक्षण एवं पूर्वाधार निर्माण योजनाएँ प्रस्तुत की हैं। अजिरकोट में स्थित यह धार्मिक एवं पर्यटक स्थल आवास सुविधा की कमी के कारण पर्यटकों को एक ही दिन वापस लौटना पड़ता है। 21 जेठ, गोरखा।
अजिरकोट गाउँपालिका का प्रमुख पर्यटक आकर्षण नागेपोखरी है। समुद्र तल से लगभग 3200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान पर्यटकों का मुख्य केन्द्र बनता जा रहा है। पालिका के अनुसार यहां आंतरिक पर्यटकों की संख्या अधिक है। भच्चेक के सिरानडाँडा से लगभग पांच घंटे की पैदल यात्रा के बाद यह स्थल पहुंचा जा सकता है। यहाँ से प्राकृतिक मनोरम दृश्यों के साथ बुद्ध हिमाल और गणेश हिमाल को निकटतम दृष्टि से देखा जा सकता है। चार प्रकार के गुराँस फूल पाए जाते हैं – लाल, सफेद, गुलाबी और नीला।
‘अधिकांश लोग ट्रेकिंग और हाइकिंग के लिए यहां आते हैं,’ पालिका अध्यक्ष दीपक देवकोट ने बताया, ‘साथ ही कुछ धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए भी यहां आने वालों की संख्या उल्लेखनीय है।’ उन्होंने बताया कि इस पोखरी की अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यता और विश्वास हैं। कहा जाता है कि कैलाश पर्वत के गुप्त मुखर स्थल में अमृतमय विष धारण करने वाले दुर्लभ नाग देव से वर्षित अमृतजल ने इस पोखरी को बनाया है।
‘कैलाश पर्वत के गुप्त क्षेत्र में अमृतमय विष रखने वाले दुर्लभ नाग रहते हैं। इनके विष का प्रभाव आसपास की वनस्पतियों पर पड़ता है, जिससे हिमालयी क्षेत्र में अनूठे जड़ी-बूटियों का भंडार मौजूद रहता है। इसी नागदेव से वर्षित अमृतजल से यह पोखरी बनी है, ऐसी जन आस्था यहां पाई जाती है,’ उन्होंने बताया। यहां आवास के लिए कोई होटल या लॉज उपलब्ध नहीं है। ठहरने वाले पर्यटकों को आवश्यक खाद्यान्न एवं आवास सामग्री अपने साथ लानी पड़ती है।
पर्यटन संवर्धन के लिए पालिका विभिन्न योजनाएँ लागू कर रही है, यह जानकारी अध्यक्ष देवकोटा ने दी। बुद्ध हिमाल हिमालचुली ग्रेट लेक्स सर्किट ट्रेल के रूप में इस मार्ग के विकास की योजना आगे बढ़ाई गई है। ‘यह ट्रेल रूविनाला से शुरू होकर दुधपोखरी, दोर्दी होते हुए मर्स्याङदी तक जाती है। पर्यटन बोर्ड के साथ समन्वय कर इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करके कार्य गति पा रहा है,’ उन्होंने कहा। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाली इस पोखरी के संरक्षण के लिए डिवीजन वन कार्यालय ने कुछ कार्यक्रम शुरू किए हैं।
पोखरी संरक्षण हेतु पत्थर की गारो लगाने और सफाई करने की योजना संचालित है, यह जानकारी कार्यालय प्रमुख मदन मोहन शांडिल्य ने दी। सिमसार क्षेत्र और पर्यापर्यटन संवर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत यह पहल संचालित की गई है। इसके अतिरिक्त नए फुट ट्रेल, बस्ती क्षेत्र एवं अन्य पूर्वाधार निर्माण की योजनाएँ भी प्रस्तावित हैं।