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भारतीय सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया से सड़कों तक फैल रहा ‘Cockroach’ आंदोलन

बेरोजगार युवाओं को ‘काक्रोच’ कहे जाने वाली टिप्पणी के बाद शुरू हुआ काक्रोच जनता पार्टी ने भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग करते हुए नई दिल्ली में प्रदर्शन किया है। अमेरिका से लौटे संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में नई दिल्ली के जन्तरमंतर में हुए इस आंदोलन में हजारों छात्र और युवा शामिल हुए। प्रश्न पत्र चुहावट के विरोध में हुए इस प्रदर्शन में कार्यकर्ता सोनाम वांगचुक, अभिनेता प्रकाश राज और विभिन्न राजनीतिक दलों ने एकता दिखाई।

२३ जेठ, काठमांडू। काक्रोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत एक व्यंग्य से हुई। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं को ‘काक्रोच’ और ‘परजीवी’ कहकर कठोर टिप्पणी की थी। इसका प्रतीकात्मक विरोध करते हुए अमेरिका में पढ़ रहे अभिजीत दीपके ने १६ मई को ट्विटर पर गूगल फॉर्म के माध्यम से ‘काक्रोच जनता पार्टी (CJP)’ नाम से एक आह्वान किया। उन्होंने यह नाम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नाम जैसा सुनने वाला बनाया था। यह आह्वान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी के दूसरे दिन किया गया था।

दीपके का आह्वान ज्वालामुखी की तरह फैल गया और चार दिनों के भीतर CJP के एक लाख साठ हजार से अधिक सदस्य और इंस्टाग्राम पर २० लाख फॉलोअर्स हो गए। सामान्य व्यंग्य से शुरू हुए इस सोशल मीडिया अभियान ने धीरे-धीरे विरोध का स्वरूप ले लिया। अमेरिका में पढ़ रहे दीपके ने इसी सप्ताह भारत लौटने की घोषणा की। तब भारत में NEET परीक्षा प्रश्न पत्र चुहावट का मामला तेज़ी से उठ रहा था। CJP ने इसी घटना को आधार बनाकर सोशल मीडिया से सड़क पर आंदोलन करने की घोषणा की। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए दीपके अमेरिका से भारत लौट कर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने सड़क प्रदर्शन की तिथि ६ जून तय की थी।

लेकिन ५ जून तक भी शिक्षा मंत्री प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया था, तब लद्दाख के शिक्षा और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनाम वांगचुक ने भी CJP प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा की। इसके बाद प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। योजना के अनुसार आज सुबह साढ़े सात बजे दीपके नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे। उनके हाथ में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की आत्मकथा की किताब थी, जो भारतीय संविधान के निर्माता थे। दीपके ने वह पुस्तक मीडिया के सामने दिखाई।

दिल्ली हवाई अड्डे के व्यस्त माहौल में दीपके का स्वागत करते हुए असामान्य दृश्य देखने को मिला। वहां मौजूद पत्रकारों ने उनका मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें ‘काला हिट’ कहा। ‘काला हिट’ गोडरेज कंपनी का एक एरोसोल कीटाणुनाशक है जो मच्छर, जूं और अन्य उड़ने वाले कीड़ों को मारने के लिए प्रयोग होता है। इसके आधार पर पत्रकारों ने CJP संस्थापक को ‘काला हिट’ उपनाम दे दिया। इसके बाद वे प्रदर्शन की अनुमति लेने संसद मार्ग स्थित पुलिस थाने गए, जहां पुलिस ने अनुमति दे दी।

प्रदर्शनकारी जन्तरमंतर में इकट्ठा होने लगे। राजधानी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। जन्तरमंतर के आसपास बैरिकेड लगाए गए थे और एक हजार से अधिक पुलिस अधिकारी तैनात थे। दीपके के घर पर भी सुरक्षा कड़ी थी। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में उनका घर है, जहां जिला पुलिस उप-अधीक्षक पंकज अतुलकर ने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए जाएंगे। दीपके के माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे।

प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ असमंजस दिखा — दीपके को हवाई अड्डे पर ही गिरफ्तार किए जाने का डर था। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सुबह से ही जन्तरमंतर में प्रदर्शनकारी इकट्ठे हुए। त्रिपुरा से आई माधवी विश्वास सुबह ६ बजे तक पहुंच चुकी थीं। आर्थिक रूप से कमजोर माधवी ने चंदा जुटाकर दिल्ली तक पहुंच बनाई। उन्होंने बताया कि वे भारत के शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग करने आई हैं। उनके बेटे अगले साल NEET परीक्षा देने वाले हैं, इसलिए वे इस आंदोलन में शामिल हुईं।

शनिवार के प्रदर्शन में १६ वर्ष के स्कूल विद्यार्थी और अभिभावक भी शामिल थे। कई लोगों ने काक्रोच के कागज़ी मास्क पहने थे और हाथ में फूल लिए थे। संयोजक दीपके सुबह ११ बजे प्रदर्शन स्थल पहुंचे, जहां उनकी उपस्थिति देख भीड़ में उत्साह बढ़ गया। उन्होंने शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और उन्हें ‘निर्लज्ज’ कहा। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि CJP के सोशल मीडिया अकाउंट को हैक कर पोस्ट मिटा दिए गए।

दीपके ने कहा, “आप हमारे पोस्ट मिटा सकते हैं, लेकिन हमें मिटा नहीं सकते। इस देश के युवा बिके नहीं हैं। छात्र-छात्राएं बिके नहीं हैं।” उन्होंने दिल्ली हवाई अड्डे पर यह सोचने का भी जिक्र किया कि यह उनकी अंतिम स्वतंत्रता की घड़ी हो सकती है। “मैं इसके लिए अपनी स्वतंत्रता की बलि देने को तैयार हूं।”

दोपहर को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनाम वांगचुक गुलाब के फूल लिए जन्तरमंतर पहुंचे थे। दीपके ने प्रदर्शन में शांति का प्रतीक बताकर लोगों से फूल लेकर आने की अपील की थी। वांगचुक ने कहा, “अगर दीपके को गिरफ्तार किया गया तो मैं छह सप्ताह का अनशन करूंगा।” लेकिन ऐसा अप्रिय कोई घटना नहीं हुई।

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र सिर्जन ने अनुभव साझा किया कि CUET परीक्षा में अंग्रेज़ी पेपर के लिए दिया गया समय केवल १० मिनट था, जो असामान्य था। इसी वजह से उनकी दाख़िला प्रक्रिया मुश्किल हुई। उन्होंने सरकार और शिक्षा मंत्री की कड़ी आलोचना की। बिहार से आए प्रदर्शकारियों ने भी परीक्षा व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

प्रदर्शन में ‘We asked for Make in India, you gave us Leak in India’ लिखा प्लेकार्ड भी देखने को मिला। यह आंदोलन राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। NCP के महासचिव एसपी के विधायक रोहित पवार ने CJP को समर्थन दिया। शिवसेना के उद्धव ठाकरे ने भी पूर्ण समर्थन जताया। शिवसेना नेता संजय राउत ने युवाओं के विद्रोह को अनदेखा न करने की सरकार को चेतावनी दी।

कार्यकर्ता वांगचुक, अभिनेता प्रकाश राज और प्रसिद्ध यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी प्रदर्शन में एकता दिखाई और सुरक्षित रहने की सलाह दी। उम्मीद के अनुसार, सड़क आंदोलन में 22 मिलियन लोग सोशल मीडिया से जुड़े हैं। इसके बावजूद सार्वजनिक उपस्थिति में काफी बड़ा अंतर नजर आता है।

आंदोलन में शामिल मनोविज्ञान स्नातक आदित्य ने कहा, “हम सोशल मीडिया पर बहुत कुछ कह रहे हैं, लेकिन मैदान पर असलियत देखने आए हैं। अब यह आंदोलन निर्णायक होना चाहिए।” त्रिपुरा, बिहार, हरियाणा और मुंबई से आए लोगों की मौजूदगी से आंदोलन सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक फैल रहा है। आदित्य ने संकेत दिया कि बदलाव सुनिश्चित करना आवश्यक है।

युवाओं की मांग केवल मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। इसलिए युवा से लेकर बुजुर्ग तक कई लोग इसमें शामिल हैं। एक बुजुर्ग प्रदर्शनकारी ने कहा, “जहां प्रणाली सड़ी है, वहां सड़े हुए चीजें खाने के लिए काक्रोच आते हैं। हम उसी सड़ी प्रणाली के सड़े गले हिस्से खाने आए हैं।” इससे साफ होता है कि यह आंदोलन केवल युवाओं तक सीमित नहीं है।

भारत में असंतोष बढ़ने की पीछे लंबी पृष्ठभूमि है। पिछले १२ वर्षों में करीब ९४ हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, निजी स्कूलों के शुल्क बढ़ रहे हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में ७० से अधिक प्रश्न पत्र चुहाए जा चुके हैं। NEET, SSC, GD, UPSI, यूपी लेखपाल जैसी परीक्षाओं में समस्याएं उठ रही हैं।

जन्तरमंतर पर लगाए गए नारों ने भारत की जातीय राजनीति को भी चुनौती दी है। CJP संस्थापक दीपके ने कहा कि वर्तमान भारतीय राजनीति “हिंदू-मुस्लिम फूट डालो और राज करो” की आधार पर चल रही है। प्रदर्शन में ‘हिंदू-मुस्लिम राजनीति बंद करो’ जैसे नारे भी सुने गए। धार्मिक विभाजन से थके युवाओं की सच्चे मुद्दों पर ध्यान देने की स्पष्ट मांग दिखती है।

हालांकि आंदोलन मुख्य रूप से शांतिपूर्ण था, बीच-बीच में थोड़ी तनाव भी देखने को मिली। पुलिस ने दो समूहों के बीच टकराव रोकते हुए ६ लोगों को गिरफ्तार किया। संयोजक दीपके ने समर्थकों से बार-बार अपने मोबाइल से रिकॉर्ड करने का आग्रह किया ताकि गलत आरोप न लगाए जा सकें।

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