Skip to main content

जब एक साथ मैदान में उतरे तीन महिला रेफ्री

18 जून की शाम अटलांटा में मैदान के बीच में खड़ी टोरी पेंसो, ब्रुक मेयो और कैथरीन नेसबिट का नाम विश्व फुटबाल लंबे समय तक याद रखेगा। क्योंकि उस दिन उन्होंने केवल मैच का संचालन ही नहीं किया, बल्कि संभावनाओं के एक नए युग की शुरुआत भी की।

समाचार सारांश

  • अटलांटा स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका और चेक गणराज्य के बीच मैच का संचालन करते हुए तीन महिला रेफ्री ने पुरुष विश्व कप में इतिहास रचा।
  • मुख्य रेफ्री टोरी पेंसो फ्रांस की स्टेफनी फ्रापार्ट के बाद पुरुष विश्व कप में मैच संचालन करने वाली दूसरी महिला बनीं।
  • सहायक रेफ्री ब्रुक मेयो और कैथरीन नेसबिट सहित टीम ने 1-1 की बराबरी पर समाप्त मैच को व्यवस्थित किया।

काठमांडू। अटलांटा स्टेडियम। गुरुवार, 18 जून।

ग्रुप ए के तहत मैच शुरू होने में कुछ ही मिनट बाकी थे। स्टेडियम में हजारों दर्शक की निगाहें मैदान पर टिकी थीं।

चेक गणराज्य और दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी सुरंग से बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे। राष्ट्रगान बजने से पहले ही मैदान का माहौल धीरे-धीरे रोमांचक होता जा रहा था।

विश्व कप के एक और अहम मुकाबले के शुरू होने की उत्तेजना ने पूरे वातावरण में एक जश्न जैसा प्रकाश बिखेर दिया था।

उस दिन दर्शक, मीडिया और फुटबाल समर्थकों का ध्यान कुछ पलों के लिए खिलाड़ियों से हटकर मैदान के केंद्र हिस्से की ओर चला गया।

कारण था वहां सिटी (सीटी) लिए खड़ी तीन महिलाएं।

मुख्य रेफ्री टोरी पेंसो और उनके सहायक ब्रुक मेयो तथा कैथरीन नेसबिट खेल का संचालन करने के लिए मैदान में उतरे थे।

मुख्य रेफ्री टोरी पेंसो और उनके सहायक ब्रुक मेयो तथा कैथरीन नेसबिट खेल शुरू होने से पहले फोर्स ऑफिशियल्स के साथ

आमतौर पर रेफ्री का मैदान पर आना बड़ी खबर नहीं होती। लेकिन उस दिन की स्थिति बिल्कुल अलग थी।

मैच शुरू होने से पहले ही मैदान में उनकी उपस्थिति के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस मैच को विशेष महत्व देना शुरू कर दिया। खबर का केंद्र खिलाड़ी नहीं, बल्कि रेफ्री टीम थी।

सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं। मैच शुरू होने से पहले ही कई खेल पत्रकार इसे विश्व कप के इतिहास के एक ऐतिहासिक पल के रूप में वर्णित कर रहे थे।

इतना खास क्यों था?

शायद, उस पल का महत्व खेल या खिलाड़ियों से कहीं अधिक था।

आमतौर पर विश्व कप की चर्चा उस समय के स्टार खिलाड़ियों की रहती है। कौन गोल करेगा? कौन सी टीम जीतेगी? या कौन अगली चुनौती तक पहुंचेगा? यही विषय समाचार का मुख्य हिस्सा बनते हैं।

उस दिन वर्षों की मेहनत, संघर्ष और उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद फुटबाल के सबसे बड़े मंच पर अपनी जगह बनाने वाली ये तीन महिलाएं मुख्य फोकस बन गईं।

फुटबाल इतिहास में महिलाएं रेफ्री की भूमिका निभाती आ रही हैं। लेकिन विश्व कप जैसे पुरुष प्रधान प्रतियोगिता में मैच संचालन करने का अवसर पाना अब भी दुर्लभ उपलब्धि माना जाता है।

और उस दिन पूरे मैच की ऑन-फील्ड रेफ्री टीम ही महिला थी, जो एक अत्यंत असाधारण घटना थी।

इसलिए ये केवल एक नियुक्ति नहीं थी, बल्कि विश्व फुटबाल में बदलाव का एक संकेत था।

टोरी पेंसो, ब्रुक मेयो और कैथरीन नेसबिट की नियुक्ति उसी बदलाव का परिणाम थी।

उनका मैदान भेजा जाना केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं था। उन्होंने घरेलू लीग, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और उच्च दबाव वाले मैचों में अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया था और उसी आधार पर यह अवसर मिला था।

फीफा, अमेरिकी फुटबाल कम्युनिटी और विश्व भर के खेल विश्लेषकों ने इसे फुटबाल इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में माना। अधिकांश ने कहा, ‘यह केवल प्रतिनिधित्व नहीं, योग्यताओं की जीत है।’

आइए जानते हैं कैसे चुनी गईं ये महिला रेफ्री।

टोरी पेंसो: 117 रेफ्री सूची में एकमात्र महिला

उस दिन सबसे ज्यादा चर्चा मुख्य रेफ्री टोरी पेंसो की रही। फ्लोरिडा के स्टुअर्ट की रहने वाली पेंसो का फुटबाल से जुड़ाव बचपन से था।

10 साल की उम्र में उन्होंने मां से कहा था कि वे फुटबाल खेलना चाहती हैं। यह फैसला बाद में उनके जीवन की दिशा बदल गया।

मैदान में खेल की गति समझने की क्षमता, नियमों का गहरा ज्ञान और दबाव में भी स्पष्ट निर्णय लेने की योग्यता ने उन्हें लगातार आगे बढ़ाया।

शुरुआत में कम वेतन पर छोटे मैचों में रेफ्री करने लगीं। लेकिन इसी छोटे काम ने उनका जीवन पूरी तरह बदल दिया।

‘द सन’ में प्रकाशित लेख के अनुसार उनकी प्रतिभा ने जल्दी ही ध्यान आकर्षित किया और उन्हें टेक्सास के ओलंपिक डेवलपमेंट प्रोग्राम द्वारा आयोजित रेफ्री कैंप में आमंत्रित किया गया।

उस समय टोरी स्वयं फुटबाल खेल रही थीं और विश्वविद्यालय में मार्केटिंग की पढ़ाई कर रही थीं। उन्हें रेफ्रींग को पूर्णकालिक करियर बनाने में शुरुआत में विश्वास नहीं था।

समय के साथ वह अमेरिकी शीर्ष प्रतियोगिताओं से लेकर फीफा के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट तक पहुंचीं।

कई वर्षों की मेहनत के बाद वर्ष 2021 में फीफा मान्यता प्राप्त रेफ्री बनीं।

अब तक उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय फुटबाल में बेहतरीन प्रदर्शन किया।

2023 महिला विश्व कप के फाइनल का संचालन करना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि थी। उन्होंने चार मैच संचालित किए, जिनमें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच सेमीफाइनल तथा स्पेन और इंग्लैंड के बीच फाइनल भी शामिल था।

उसके बाद वे विश्व फुटबाल की सबसे सम्मानित रेफ्री में से एक बन गईं।

टोरी पेंसो की योग्यता ने वर्ष 2025 में रंग दिखाया। फीफा ने क्लब विश्व कप के लिए चुनी गई 117 रेफ्री की सूची में वह एकमात्र महिला थीं।

उनकी क्षमता की प्रशंसा करते हुए फीफा ने उन्हें 2026 विश्व कप के लिए भी चुना।

दक्षिण अफ्रीका और चेक गणराज्य के बीच मैच का संचालन करते हुए वे पुरुष विश्व कप में मुख्य रेफ्री बनने वाली दूसरी महिला बनीं। इससे पहले फ्रांस की स्टेफनी फ्रापार्ट ने 2022 में यह उपलब्धि हासिल की थी।

फीफा के साथ बातचीत में उन्होंने बताया, ‘आरंभिक दिनों में अमेरिका में कोई पूर्णकालिक महिला रेफ्री नहीं थी। इसलिए मुझे इस करियर को अपनाना मुश्किल लग रहा था। लेकिन मुझे लगता था, ये केवल अस्थायी काम नहीं, बल्कि देश और दुनिया को जानने का मौका है।’

बाद में उन्होंने एक विज्ञापन एजेंसी की नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक रेफ्री बनने का साहसिक निर्णय लिया।

उनका यह निर्णय सार्थक साबित हुआ।

फुटबाल के उच्चतम स्तर पर रेफ्री बनने का मतलब है केवल नियमों का ज्ञान नहीं, बल्कि उत्कृष्ट फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, खेल की गहरी समझ और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता भी आवश्यक होती है।

पेंसो ने वर्षों तक ये सभी गुण मैदान पर साबित किए।

ब्रुक मेयो: 13 वर्ष की उम्र में सिटी बजाना शुरू किया

टोरी पेंसो के साथ इतिहास रचने वाली दूसरी नाम थी ब्रुक मेयो।

टेक्सास के गार्यान्ड में पली-बढ़ी मेयो ने 13 वर्ष की उम्र में पहली बार रेफ्री की सिटी बजाई। उस समय शुरू हुई यात्रा ने उन्हें विश्व फुटबाल के सबसे बड़े मंच तक पहुंचाया।

अमेरिकी फुटबाल महासंघ से बातचीत में मेयो ने कहा था कि विश्व कप उनका संभावित लक्ष्य था, जिसके लिए वह पूरी तरह समर्पित थीं।

जिम में अधिक समय बिताना, फिटनेस और रिकवरी पर ध्यान देना और हर मैच को सीखने का अवसर मानना उनकी विशेषताएं थीं।

लंबे समय की निरंतरता के बाद उन्होंने विश्व कप में इतिहास रचने वाली टीम में जगह बनाई।

कैथरीन नेसबिट: अलग पृष्ठभूमि से विश्व कप तक

कैथरीन नेसबिट की कहानी भी कम रोचक नहीं है। वह केवल फुटबाल रेफ्री नहीं, बल्कि विज्ञान से जुड़ी प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं।

जैविक विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन और शोध के साथ उन्होंने रेफ्री का करियर भी आगे बढ़ाया।

फीफा की आधिकारिक रेफ्री प्रोफाइल के अनुसार, नेसबिट विश्व फुटबाल में सबसे अनुभवी सहायक रेफ्री में से एक हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने अनुभव और प्रदर्शन के आधार पर विश्व कप तक का सफर तय किया।

विश्व फुटबाल में स्थापित होने से पहले भी नेसबिट ने जैविक विज्ञान में अध्ययन और शोध की। फुटबाल और विज्ञान दो अलग क्षेत्र होते हुए भी दोनों ने अनुशासन, विश्लेषण क्षमता और सटीकता प्रदान की।

अमेरिकी फुटबाल महासंघ द्वारा जारी उनकी प्रोफाइल के अनुसार, विज्ञान क्षेत्र के साथ-साथ रेफ्री की जिम्मेदारी भी उन्होंने निरंतर निभाईं।

वर्षों के घरेलू, अंतरराष्ट्रीय मैचों और फीफा टूर्नामेंट के अनुभव के बाद वे विश्व कप के मंच तक पहुंचीं।

‘हम केवल महिलाएं नहीं, योग्य रेफ्री हैं’

ब्रुक मेयो ने विश्व कप से पहले दिए अपने बयान में इस उपलब्धि के महत्व को स्पष्ट किया।

अमेरिकी फुटबाल महासंघ के साथ इंटरव्यू में मेयो ने कहा, ‘‘हमें ‘महिला रेफ्री टीम’ नहीं बल्कि ‘मजबूत रेफ्री टीम’ के रूप में देखा जाए। लेकिन जब कोई पिता अपनी बेटी से प्रेरित होकर हमारी तस्वीर मांगता है या महिलाएं अपने समय में ऐसे मौके असंभव समझती हैं, तब हमें हमारी मेहनत की अहमियत महसूस होती है।’’

विश्व कप का वह पल ब्रुक मेयो के लिए सिर्फ एक मैच नहीं था।

मैदान से सुरंग में आते समय कैसा महसूस होता है, पूछे जाने पर उनका जवाब भावुक था।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं भावुक व्यक्ति हूं और बड़े मैच में मैदान में उतरते समय आंसू रोकना मुश्किल होता है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘मैं अपने सपने जी रही हूं। परिवार और दोस्त स्टेडियम में बैठे मुझे प्रोत्साहन दे रहे हैं। ऐसे क्षणों को मैं कभी सामान्य नहीं मान सकती।’’

शायद इसीलिए विश्व कप का वह मैच उनके लिए केवल नियुक्ति नहीं, बल्कि वर्षों की त्याग, मेहनत और सपनों की मंजिल था।

मैच में भी दिखा आत्मविश्वास

इतिहास रचना एक बात है, लेकिन मैच को निष्पक्ष और सफलतापूर्वक संचालित करना दूसरी चुनौती थी।

मैच के दौरान टोरी पेंसो ने दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में पेनल्टी का निर्णय दिया। पेनल्टी क्षेत्र में हाथ के नियम उल्लंघन के बाद उन्होंने नियम के अनुसार फैसला लिया।

उस मौके का फायदा उठाते हुए दक्षिण अफ्रीका ने मैच के अंतिम क्षणों में बराबरी का गोल किया। अंततः मैच 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ। अंक बांटे गए और टीमों ने अपनी-अपनी यात्रा जारी रखी।

मगर मैच के बाद चर्चा स्कोरलाइन से ज्यादा इतिहास पर रही।

फिर 18 जून की वह शाम अटलांटा में मैदान के बीच में खड़ी टोरी पेंसो, ब्रुक मेयो और कैथरीन नेसबिट का नाम विश्व फुटबाल कई वर्ष तक याद रखेगा। क्योंकि उस दिन उन्होंने सिर्फ मैच संचालन ही नहीं किया, बल्कि संभावनाओं का नया अध्याय भी खोला।

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ