अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की आंतरिक चट्टानों को खोज सकते हैं
१० असार, काठमाडौं। चंद्रमा पर प्राचीन काल में हुए एक विशाल टक्कर के कारण आंतरिक भाग में मौजूद महत्वपूर्ण चट्टानें सतह पर फैल गई हैं, ऐसा नवीनतम अध्ययन दर्शाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये चट्टानें भविष्य के आर्टेमिस मिशन के अंतरिक्ष यात्री उस स्थल के निकट खोज सकते हैं, जहां वे उतरेंगे। साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा संचालित वैज्ञानिक दल ने चंद्रमा के सबसे बड़े और प्राचीन क्रेटर ‘साउथ पोल–एट्केन (एसपीए) बेसिन’ के निर्माण प्रक्रिया के अध्ययन से इस तथ्य का पता लगाया है।
कंप्यूटर सिमुलेशन के अनुसार, लोहे के कोर वाली एक विशाल वस्तु जब कम कोण पर चंद्रमा से टकराई थी, तब इसके भीतर मौजूद मेंटल की चट्टानें सतह पर उछल कर आ गई थीं। यह शोध नासा के सोलर सिस्टम एक्सप्लोरेशन रिसर्च वर्चुअल इंस्टिट्यूट के ‘सेंटर फॉर लूनर ओरिजिन एंड इवोल्यूशन’ (सीएलओई) के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से में स्थित साउथ पोल–एट्केन बेसिन सौरमंडल की सबसे प्राचीन संरचनाओं में से एक है।
सीएलओई के निदेशक डॉ. विलियम बोटके के अनुसार, यह टक्कर इतनी शक्तिशाली थी कि इसने चंद्रमा की गहरी आंतरिक मेंटल की चट्टानों को सतह पर ला दिया। सिमुलेशन में यह दर्शाया गया कि टकराने वाली वस्तु उत्तर से दक्षिण की दिशा में चंद्रमा की सतह से टकराई, जिसके कारण इस बेसिन का आकार लंबा-चौड़ा बन गया। अध्ययन से पता चलता है कि टकराने वाली वस्तु कोई साधारण पत्थर नहीं थी, बल्कि छोटे प्रोटोप्लैनेट या क्षुद्रग्रह जैसे लोहे के कोर वाली वस्तु थी।
इस टक्कर ने विशाल गड्ढा मात्र नहीं बनाया, बल्कि अत्यधिक ताप उत्पन्न कर आसपास की चट्टानों को पिघलाने की भी क्षमता रखी। इस प्रक्रिया में कर्कट (माथली सतह) और मेंटल (आंतरिक स्तर) के बड़े पैमाने पर पदार्थ अंतरिक्ष में उछाले गए, जो बाद में इस बेसिन के चारों ओर जमा हो गए। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना के डॉ. गेब्रियल गोम्यान के नेतृत्व में एक अन्य गुरुत्वाकर्षण आधारित अध्ययन ने भी इस क्षेत्र में मेंटल से आए मिश्रित चट्टानों की संख्या की पुष्टि की है।
पहले यह माना जाता था कि चंद्रमा की गहरी परतों से निकली ये चट्टानें दक्षिण ध्रुव से दूर के सीमित क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। लेकिन नवीन सिमुलेशन और गुरुत्वाकर्षण विश्लेषण से पता चला है कि आर्टेमिस मिशन के अंतरिक्ष यात्री जो दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में उतरेंगे, वहाँ इन दुर्लभ चट्टानों का विस्तार है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बाद की छोटी-छोटी टकरावों ने इन प्राचीन चट्टानों को सतह तक लाने में मदद की है। इस खोज से आर्टेमिस मिशन के मानव और रोबोटिक मिशनों के लिए नए अवतरण स्थलों के निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा और चंद्रमा की उत्पत्ति तथा विकास के रहस्यों को समझने का नया रास्ता खुलेगा।