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पाकिस्तान १८ प्रतिशत बढ़ा सकता है रक्षा बजट

११ असार, काठमाडौं। पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में १८ प्रतिशत वृद्धि कर ३ हजार अरब रुपये (३ ट्रिलियन) तक पहुंचाने की तैयारी की है। यह प्रस्ताव २०२६ में सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत बजट मसौदे में शामिल है।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने क्षेत्रीय अनिश्चितताओं के कारण देश को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से रक्षा बजट बढ़ाने की बात कही है।

पाकिस्तान का नया वित्तीय वर्ष १ जुलाई से शुरू हो रहा है, और सरकार बजट प्रस्ताव को संसद से पहले पास कराना चाहती है। सांसदों के इस माह के अंत तक इस प्रस्ताव पर मतदान करने की संभावना है।

विश्लेषकों के अनुसार, दक्षिण एशिया में तेजी से विकसित हो रही सैन्य तकनीकों और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के कारण पाकिस्तान सरकार ने रक्षा बजट बढ़ाने का निर्णय लिया है।

दक्षिण एशिया का सुरक्षा समीकरण

इस्लामाबाद स्थित रक्षा विशेषज्ञ मारिया सुल्तान बताती हैं कि यूक्रेन और मध्य पश्चिम में जारी युद्ध एवं पिछले वर्ष परमाणु हथियार सम्पन्न पड़ोसी भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव ने सैन्य योजनाकारों की सोच में बदलाव किया है। यही पाकिस्तान के इस कदम का मुख्य कारण है।

भारत नियंत्रित कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर घातक हमले के जवाब में भारत ने मई २०२५ में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इस हमले में एक नेपाली, रुपन्देही के सुधीप न्यौपाने भी मारे गए थे।

भारत ने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा को इस हमले का जिम्मेदार ठहराया था। संयुक्त राष्ट्र ने इस समूह को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। नई दिल्ली ने इस समूह को इस्लामाबाद के समर्थन में होने का आरोप लगाया था, जिसे पाकिस्तान ने खारिज कर दिया था।

भारत की निरंतर सैन्य आधुनिकीकरण, ड्रोन, साइबर क्षमताओं और अत्याधुनिक लक्ष्य-निर्धारित हथियारों के विकास ने पाकिस्तान के सैन्य योजनाकर्ताओं को अपनी सुरक्षा रणनीति पुनः मूल्यांकन करने पर मजबूर किया है।

भारत और पाकिस्तान दोनों पूर्ण कश्मीर पर दावा करते हैं, हालांकि दोनों के नियंत्रण में केवल इसके कुछ हिस्से हैं। यही कारण है कि मुस्लिम बहुल यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच भू-राजनीतिक तनाव का संवेदनशील केंद्र बना हुआ है।

पहलगाम हमले के बाद हुई झड़पों ने दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ाई है, साथ ही परमाणु हथियार संपन्न प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच परमाणु पराभव (न्यूक्लियर डिटरेंस) की सीमाओं पर भी बहस तेज की है।

इस्लामाबाद की थिंक टैंक सनॉबर इंस्टिट्यूट के कार्यकारी निदेशक कमर चिमाका के अनुसार, यह टकराव यह साबित कर चुका है कि परमाणु हथियार अनिवार्य रूप से पारंपरिक सैन्य संघर्षों को परमाणु युद्ध से पहले रोक नहीं सकते हैं।

बहुआयामी युद्ध का खतरा

चिमाका बताते हैं कि भारत के लगातार सैन्य आधुनिकीकरण तथा ड्रोन, साइबर क्षमताओं और अत्याधुनिक हथियारों की उन्नति ने पाकिस्तान के सैन्य योजनाकारों को सुरक्षा रणनीति पुनर्मूल्यांकन के लिए मजबूर किया है।

यह चुनौती केवल भारत से पूर्वी सीमा तक सीमित नहीं है, पाकिस्तान के अफगानिस्तान के साथ भी तनावपूर्ण संबंध हैं, विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान क्षेत्रों में।

फरवरी में इस्लामाबाद ने काबुल के साथ ‘खुले युद्ध’ की घोषणा की थी, जब पाकिस्तान के अंदर आम जनता और सुरक्षा बलों पर उग्रवादी हमले बढ़े। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान से संचालित उग्रवादी समूहों को रोकने में काबुल विफल रहा है, जबकि अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

भारत की तुलना में पाकिस्तान का रक्षा बजट कितना कम?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से ७ अरब अमेरिकी डॉलर के कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान रक्षा खर्च में वृद्धि कर रहा है। यह कार्यक्रम २०२२-२३ की आर्थिक संकट के बाद पाकिस्तान को ऋण डिफॉल्ट से बचाने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मददगार रहा है।

भारत का वार्षिक रक्षा खर्च लगभग ८६ अरब अमेरिकी डॉलर है, जो कि पाकिस्तान से करीब आठ गुना अधिक है।

सरकार कर सुधार, कस्टम शुल्क पुनर्गठन तथा निर्यात और निवेश को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को स्थिरता से विकास की ओर ले जाने का लक्ष्य रखती है। आईएमएफ और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच वित्तीय ढांचे और राजस्व अनुमान इसके मुख्य विषय रहे हैं।

गत आर्थिक वर्ष में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगभग ४५२ अरब अमेरिकी डॉलर पहुंची है। भारत की जनसंख्या पाकिस्तान से लगभग ५.७ गुना अधिक है, पर अर्थव्यवस्था आकार में पाकिस्तान से नौ गुना से भी अधिक बड़ी है। भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुमानित रूप से ४.१५ ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।

परमाणु संपन्न दोनों देशों के रक्षा बजट में भी बड़ा अंतर है। भारत का वार्षिक रक्षा खर्च लगभग ८६ अरब अमेरिकी डॉलर है, जो पाकिस्तान से आठ गुना अधिक है।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया है। उन्होंने पिछले साल अमेरिकी संचार माध्यम ब्लूमबर्ग को बताया था, “हमारे पास खर्च करने के अनंत संसाधन नहीं हैं। पाकिस्तान का रक्षा बजट पड़ोसी देश के बजट का छोटा हिस्सा है।”

आर्थिक दबाव और सुरक्षा प्राथमिकताओं के बीच संतुलन

अर्थशास्त्री और स्तंभकार खुर्रम हुसैन का कहना है कि पाकिस्तान ने आर्थिक संकट के बावजूद रक्षा खर्च को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने कहा, “वर्तमान आईएमएफ कार्यक्रम के तहत सरकार के लिए संतुलन बनाए रखना संवेदनशील कार्य है, लेकिन आईएमएफ भी वास्तविकताओं को समझता है। वे जानते हैं कि रक्षा खर्च में कटौती नहीं की जा सकती, इसलिए वे अन्य क्षेत्रों में सुधार के लिए अधिक दबाव डालते हैं।”

कुछ अर्थशास्त्री और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि प्रांतीय या स्थानीय स्तरों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा तो विकास की प्राथमिकताएँ प्रभावित हो सकती हैं।

इस्लामाबाद स्थित अर्थशास्त्री फारुख सलीम कहते हैं, “पाकिस्तान हमेशा अपनी आवश्यक सुरक्षा जरूरतों के लिए संसाधन जुटाता रहा है। लेकिन महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब प्रदेश इसका असर महसूस करने लगेंगे तो क्या ऐसी रणनीतियों के प्रति राजनीतिक समर्थन बना रहेगा या नहीं?”

पाकिस्तानी सांसद इस महीने के अंत तक रक्षा बजट वृद्धि प्रस्ताव पर मतदान करने की उम्मीद कर रहे हैं। नया वित्तीय वर्ष १ जुलाई से शुरू होगा और सरकार उससे पहले बजट को संसद से पास कराना चाहती है।

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