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सरकार के १०० दिनों का कार्य प्रदर्शन: सकारात्मक पहल लेकिन निजी क्षेत्र के साथ समन्वय की कमी

१९ असार, काठमाडौं। वर्तमान सरकार के गठन के १०० दिनों में ऊर्जा, जल स्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने अपने ७३ प्रतिशत कार्य प्रदर्शन पूरा करने का दावा किया है। ऊर्जा मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने मंत्री पद ग्रहण करने के पहले महीने में ही मंत्रालय के कार्यों को और प्रभावशील, उत्तरदायी तथा परिणाममुखी बनाने के लिए ३२-बिंदु कार्यनिर्देशन जारी किया था। उक्त कार्यनिर्देशन के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने प्रगति की समीक्षा की है। समीक्षा के आधार पर, निर्धारित कार्यों में से लगभग ७० प्रतिशत सफलता पूर्वक पूरे हो चुके हैं जबकि शेष ३० प्रतिशत कार्य क्रियान्वयन प्रक्रिया में हैं। मंत्री श्रेष्ठ के सचिवालय के अनुसार, वे परिणाममुखी सुशासन, प्रभावी सेवा प्रवाह और संस्थागत सुधार के प्रति दृढ़ प्रतिबद्ध हैं। मंत्रालय सभी कार्य समय पर पूर्ण करके अपनी कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावकारी बनाने के प्रयासरत रहेगा।

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व उपकार्यकारी निर्देशक प्रबल अधिकारी ने मंत्रालय की यह प्रगति ‘नीतिगत और कागज़ी’ मात्र बताया तथा कहा कि इसका वास्तविक परिणाम धरातल पर दिखने में अभी समय लगेगा। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और योजनाएँ दीर्घकालीन प्रकृति की होती हैं, इसलिए १०० दिनों की छोटी अवधि में उनकी सफलता या विफलता का पूर्ण मूल्यांकन करना कठिन है। उन्होंने कहा, ‘ऊर्जा क्षेत्र के सुधार रातों-रात हासिल नहीं होते। अभी मंत्रालय द्वारा लाई गई लाइसेंस, पीपीई एवं संरचनात्मक सुधार पाइपलाइन में हैं। इनके परिणाम देखने के लिए अभी कुछ और समय प्रतीक्षा करनी होगी।’

हालांकि मंत्रालय ने ७० प्रतिशत प्रगति का आंकड़ा सार्वजनिक किया है, अधिकारी ने स्मरण दिलाया कि पूर्व मंत्री भी इसी तरह ८०-८५ प्रतिशत सफलता का दावा करते रहे हैं। उनके अनुसार समस्या कागज पर नहीं, क्रियान्वयन में है। उन्होंने कहा, ‘हम रिपोर्ट और कागजों पर हमेशा सफल नहीं होते, लेकिन धरातल पर परियोजनाओं की प्रगति काफी धीमी है। छोटे परियोजनाओं को पूरा करने में भी १२-१५ वर्ष लगते हैं और लागत वृद्धि की समस्या अभी तक बनी हुई है।’

सरकार ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण का पुनर्संरचना और प्रगति नहीं कर पाने वाले जलविद्युत परियोजनाओं का लाइसेंस रद्द करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। लेकिन अधिकारी के अनुसार, ऐसे गंभीर निर्णयों में ‘ब्रोडर स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन’ (स्रोतधारकों के साथ व्यापक परामर्श) नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘परियोजनाओं में देरी के लिए केवल निजी क्षेत्र दोषी नहीं है, राज्य की भी जिम्मेदारी है। मुख्य कारण न खोजकर एकतरफा लाइसेंस रद्द या नई नीति लाए जाने से भविष्य में पुरानी समस्याएँ दोहराई जा सकती हैं।’

सरकारी प्रयासों से वर्षों तक न हो पाए काम को निजी क्षेत्र की भागीदारी में तेजी से पूरा किए जाने का उल्लेख करते हुए अधिकारी ने सरकार से ‘मिशन मोड’ में काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘बजट और नीतियाँ केवल आर्थिक-राजनीतिक दस्तावेज न होकर विकास का रोडमैप भी होनी चाहिए। सरकार को रिपोर्ट के पन्नों में नहीं, धरातल पर परिणाम दिखाकर मानक स्थापित करने की जरूरत है।’

कार्य प्रदर्शन में सकारात्मक इरादे: स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संस्थान, नेपाल (इप्पान) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्तम भ्लोन लामाले वर्तमान सरकार के पहले १०० दिनों के कार्य प्रदर्शन में इरादे को सकारात्मक बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार ऊर्जा क्षेत्र को कैसे आगे बढ़ाए, इस विषय पर स्पष्ट सोच रखती है और इसमें कोई संदेह का स्थान नहीं है। लामाले कहा, ‘१०० दिन किसी भी सरकार का पूर्ण मूल्यांकन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है, लेकिन अभी तक के इरादे देखकर लगता है कि सरकार ऊर्जा क्षेत्र के विकास में सकारात्मक कदम उठा रही है।’

ऊर्जा उत्पादन में निजी क्षेत्र के ८० प्रतिशत हिस्सेदारी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को निजी क्षेत्र के साथ और करीब से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भविष्य में प्रसारण लाइन और अन्य पूर्वाधार में भी निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ती जाएगी इसलिए सरकार के लिए क्लोज कोऑर्डिनेशन (करीबी समन्वय) में काम करना जरूरी है।’ लामाले ने कहा कि बजट में कुछ अच्छे बिंदु हैं लेकिन ऊर्जा क्षेत्र के कई मुद्दे अभी भी अधूरे हैं, इसलिए आने वाले दिनों में उनके उचित क्रियान्वयन की उम्मीद है।

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