गणेश नेपाली के आत्मदाह ने महानगर पुलिस के अधिकार और आचरण पर सवाल खड़े किए
गुरुवार दोपहर काठमांडू के त्रिपुरेश्वर में गणेश नेपाली नामक युवक ने अपनी रोकी गई मोटरसाइकिल में ‘व्हील लॉक’ लगाए जाने को लेकर महानगर पुलिस के विवाद के बीच आत्मदाह कर लिया, जिससे महानगर पुलिस के अधिकार और आचरण को लेकर सवाल उठे हैं। आखिर महानगर पुलिस के अधिकार क्या हैं? विभिन्न निकाय द्वारा अनियमित रूप से लगाए जा रहे जुर्माने और सज़ाओं के खिलाफ सावधानी कैसे बरतनी चाहिए? ऐसे कई प्रश्न व्यापक रूप से उठे हैं।
मुगु के २५ वर्षीय गणेश नेपाली गंभीर जलन की वजह से अस्पताल में भर्ती थे। सरकार ने शुक्रवार सुबह बताया कि उनकी अस्वस्थ स्थिति के कारण उन्हें तत्काल भारत ले जाना संभव नहीं था। हालांकि, कुछ ही घंटों में वीर अस्पताल ने उपचार के दौरान उनकी मृत्यु की पुष्टि की। इस घटना ने काठमांडू महानगर पुलिस प्रमुख को दुःखी किया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका कार्य केवल कानून के अनुसार था।
स्थानीय स्तर को संविधान द्वारा विभिन्न अधिकार दिए गए हैं। स्थानीय निकायों को अपने स्वयं के कानून बनाने का प्रावधान संविधान में है। संविधान की अनुसूची ८ में उल्लेख है कि स्थानीय तह नगर पुलिस गठित और प्रबंधित कर सकते हैं। काठमांडू महानगरपालिका द्वारा नगरसभामें पारित महानगर पुलिस अधिनियम, २०८० वर्तमान में लागू है। काठमांडू महानगर पुलिस प्रमुख विष्णुप्रसाद जोशी के अनुसार, “इस अधिनियम की धारा ७ (ग) हमें बाजार और वाहन पार्किंग स्थलों के नियंत्रण और प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रदान करती है।”
गणेश नेपाली के आत्मदाह पर चर्चा करते हुए शुक्रवार को संसद में नेपाली कांग्रेस की प्रमुख सचेतक बासना थापा ने सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने करीब ढाई साल पहले हुई आत्मदाह घटना पर तत्कालीन काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन शाह द्वारा लिखा गया पोस्ट भी याद दिलाया। उन्होंने पूछा, “कल हुई घटना पर आपकी मौनता क्यों? विपक्ष में रहते हुए सरकार को कड़ाई से सवाल करने वाली आप, अब सरकार की अगुवाई करते हुए उन सवालों के जवाब देने में इतनी दूरी क्यों?”