
जापान में बच्चों को अनुशासित बनाने का अनोखा तरीका
जापान में बच्चों को बिना पीट-पीट या डाँट-फटकार के अनुशासित, जिम्मेदार और विनम्र बनाने के लिए विशेष अभिभावकीय शैली अपनाई जाती है। अपने बच्चों को समझदार और अनुशासित बनाना चाहने वाले अभिभावकों की इस क्षेत्र में कड़ी अनुशासन की मिसालें देखी जा सकती हैं। हमारे समाज में अनुशासन बनाये रखने के नाम पर बच्चों को गाली देना या कुटाई करना आम माना जाता है, लेकिन जापान में ऐसा नहीं होता। वहां बिना तेज आवाज़ उठाए, बिना कुटाई किए बच्चों को अनुशासित और जिम्मेदार बनाया जाता है।
जापानी अभिभावकीय शैली विश्व स्तर पर उदाहरण के रूप में देखी जाती है। जापान की समृद्धि और विकास में वहां के बच्चों को पालने के तरीके का भी बड़ा योगदान माना जाता है। दूसरों के प्रति विनम्रतापूर्वक अभिवादन करना सिखाने वाले जापान में, चाहे बच्चा कितना भी छोटा हो, शुरू से ही उन्हें दूसरों के प्रति सम्मान और नम्रता के साथ अभिवादन करना सिखाया जाता है। इससे उनमें परस्पर सम्मान की भावना विकसित होती है।
जापान में सामूहिक चेतना को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो व्यक्ति को अनुशासित बनने के लिए प्रेरित करती है। इससे व्यक्ति न केवल अपने व्यवहार के प्रति सतर्क रहता है, बल्कि दूसरों की भावनाओं का भी खयाल रखता है। बच्चे छोटे से ही इस बात के प्रति सचेत हो जाते हैं कि उनका व्यवहार दूसरों को प्रभावित न करे। घर में प्रवेश करने से पहले जूते उतारना एक सख्त नियम है, जो स्वच्छता और पवित्रता के आधार पर लागू किया जाता है।
बच्चों को छोटे से ही प्रकृति से लगाव और संसाधनों का सम्मान करना सिखाया जाता है। इसे ‘मोत्ताइनाइ’ कहा जाता है, जिसका मतलब है ‘कुछ भी बेकार न फेंकना’। इससे बच्चों में भोजन बर्बाद न करने, अनावश्यक खर्च न करने और चीजों का संरक्षण करने की आदत विकसित होती है। स्वावलंबन और जिम्मेदारी के लिए भी बच्चे छोटी उम्र से ही अपने काम स्वयं करने के लिए प्रोत्साहित किए जाते हैं। जापानी स्कूलों में विद्यार्थी खुद कक्षा और शौचालय साफ करते हैं, जो श्रम का सम्मान करने की भावना को बढ़ावा देता है।