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अमेरिका ने चीन, भारत, पाकिस्तान समेत 60 देशों पर नए कस्टम शुल्क लगाए

अमेरिका ने जबरदस्ती श्रम नियंत्रण के पर्याप्त कदम न उठाने के आरोप में लगभग 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक नए कस्टम शुल्क लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रियर के अनुसार यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देशानुसार शुक्रवार से प्रभाव में आएगा और इससे अमेरिका के कुल आयात का 99.4 प्रतिशत हिस्सा कवर होगा। ट्रम्प प्रशासन ने श्रमिकों की सुरक्षा और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए 1974 के ट्रेड एक्ट के अंतर्गत यह कदम उठाया है, लेकिन अर्थशास्त्रियों ने दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की चेतावनी दी है। 8 साउन, काठमाडौं।
अमेरिका ने जबरदस्ती श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर नियंत्रण में पर्याप्त प्रयास नहीं करने के कारण लगभग 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर नए कस्टम शुल्क (टैरिफ) थोपने का निर्णय लिया है। यह नए 10 से 12.5 प्रतिशत के शुल्क ब्रिटेन, चीन, भारत, पाकिस्तान, कनाडा, जापान और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख साझेदारों पर लागू होंगे।
इस वर्ष की शुरुआत में अस्थायी रूप से लगाए गए विदेशी वस्तुओं पर 10 प्रतिशत आयात कर शुक्रवार को समाप्त हो रहा है और उसके बाद नया शुल्क लागू होगा। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दूसरे कार्यकाल में शुरू किए गए वैश्विक व्यापार युद्ध का नया चरण माना जा रहा है। इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन अधिकार के तहत लगाए गए कई टैरिफों को अवैध घोषित कर दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन नए कानूनी उपायों की तलाश कर आगे बढ़ रहा है।
पिछले महीने व्हाइट हाउस ने 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव सार्वजनिक किया था, जिन पर जबरदस्ती श्रम नियंत्रण में पर्याप्त प्रयास नहीं करने का आरोप था। गुरुवार को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रियर ने राष्ट्रपति ट्रम्प के निर्देशानुसार इन नए शुल्कों को शुक्रवार से लागू करने की घोषणा की।
यह टैरिफ अमेरिका के शीर्ष 60 व्यापारिक साझेदारों पर लागू होंगे, जो कुल आयात का 99.4 प्रतिशत हिस्सा लेते हैं। ग्रियर ने कहा, ‘यह कदम मानवाधिकार उल्लंघन और अनुचित व्यापार प्रतिस्पर्धा दोनों को संबोधित करेगा और विश्वभर के श्रमिकों के हितों को सुधारने में मदद करेगा।’
ग्रियर ने बताया कि यह निर्णय 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत लिया गया है, जिसके अंतर्गत अमेरिका व्यापार में बाधा या प्रतिबंध लगा सकता है। वर्तमान में ट्रम्प प्रशासन ने टैरिफ एक्ट 1930 के सेक्शन 338 के तहत कनाडा से आने वाली वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार नए शुल्क उन देशों पर लागू होंगे जो जबरदस्ती श्रम से बनी वस्तुओं के आयात को रोकने में सक्षम नहीं रहे हैं। ये देश अमेरिका के कुल व्यापार का बड़ा हिस्सा और आयात का 99.4 प्रतिशत कवर करते हैं।
ट्रम्प प्रशासन ने दूसरे कार्यकाल में जबरदस्ती श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध को बहुपक्षीय व्यापार समझौतों की महत्वपूर्ण शर्त बनाया है। अब तक 10 साझेदार देशों ने इस प्रतिबंध को स्वीकार किया है जबकि कुछ ने नई जांच के बाद इसे अपनाया है। जबरदस्ती श्रम से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों पर 10 प्रतिशत नया टैरिफ लगेगा और जो प्रतिबद्ध नहीं हैं उन्हें 12.5 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
ग्रियर ने प्रतिबद्ध देशों की प्रशंसा करते हुए उम्मीद व्यक्त की कि यह प्रतिबंध प्रभावी रूप से लागू होगा। व्हाइट हाउस ने अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए इन टैरिफों को आवश्यक बताया है। राष्ट्रपति ट्रम्प का दावा है कि आयात कर अमेरिका में उत्पादन उद्योग को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजित करेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा।
हालांकि अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि ये उच्च टैरिफ कॉफी, माइक्रोवेव जैसी दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ा सकते हैं। प्रारंभ में आयातकर्ता ये शुल्क देंगे लेकिन अतिरिक्त लागत अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ेगी। ट्रम्प ने मेक्सिको जैसे देशों को केवल श्रम नियमों के लिए ही नहीं, व्यापार के अलावा अन्य मुद्दों पर भी दबाव बनाने के लिए टैरिफ का सहारा लिया है।
व्यावसायिक समूहों और प्रभावित देशों से इस कदम का विरोध मिलने की उम्मीद है। कई लोग कानूनी चुनौतियां दायर करने या जवाबी टैरिफ लगाने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। इस बीच अमेरिकी प्रशासन आगे की कार्रवाई के लिए भी तैयार है। व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय 16 देशों में अत्यधिक उत्पादन क्षमता के आरोप को लेकर जांच कर रहा है। ये देश अमेरिका को अधिकांश आयात की आपूर्ति करते हैं। जांच के नतीजे के बाद इस वर्ष और टैरिफ लागू होने की संभावना बनी हुई है।