
आसियान की आणविक निष्क्रियता अपील पर उत्तर कोरिया का कड़ा विरोध
समाचार सारांश: उत्तर कोरियाई नेता किम यो जोङ ने कोरियाई प्रायद्वीप को आणविक हथियारमुक्त बनाने की आसियान की मांग का कड़ा विरोध करते हुए इसे वास्तविकता विरोधी बताया है। आसियान क्षेत्रीय फोरम ने उत्तर कोरिया के आणविक हथियार विकास पर गंभीर चिंता जताई थी और वार्ता के जरिए निष्क्रियकरण पर जोर दिया था। किम ने अपनी आणविक नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा का अपरिवर्तनीय आधार बताते हुए आसियान को अमेरिका का मुखपत्र बनने से चेतावनी दी है। ११ साउन, सियोल (रासस/एएफपी)।
कोरियाई प्रायद्वीप को आणविक हथियारों से मुक्त करने के आग्रह के बाद उत्तर कोरियाने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान की कड़ी आलोचना की है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोङ-उन की बहन और प्रभावशाली अधिकारी किम यो जोङ ने आसियान की धारणा को ‘मूर्खतापूर्ण’ तथा ‘वास्तविकता से परे’ बताया है। गत सप्ताह संपन्न आसियान क्षेत्रीय फोरम ने उत्तर कोरिया के निरंतर आणविक हथियार विकास पर गंभीर चिंता जताई थी और कोरियाई प्रायद्वीप को हथियारमुक्त बनाने के उद्देश्य से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया था।
सरकारी समाचार संस्था केसीएन द्वारा जारी बयान में किम यो जोंग ने कहा कि उत्तर कोरिया के संविधान ने देश को एक आणविक शक्ति राष्ट्र के रूप में स्पष्ट मान्यता दी है, फिर भी ‘आणविक निष्क्रियता’ की मांग करना रणनीतिक दृष्टिकोण की कमी है। उन्होंने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप की आणविक निष्क्रियता की अवधारणा अब व्यवहारिक और राजनीतिक रूप से अर्थहीन हो चुकी है। उन्होंने आसियान से भी आग्रह किया कि वह अमेरिकी ‘मुखपत्र’ जैसी भूमिका निभाने से बचें। साथ ही उत्तर कोरिया की आणविक नीति किसी भी परिस्थिति में नहीं बदलेगी और यह राष्ट्रीय सुरक्षा का अपरिवर्तनीय आधार है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के बावजूद, उत्तर कोरिया लंबे समय से अपने आणविक हथियार तथा बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को जारी रखे हुए है। वर्ष २०२३ में प्योंगयांग ने संविधान संशोधन कर खुद को औपचारिक रूप से एक आणविक शक्ति राष्ट्र के रूप में शामिल किया था। २०१९ में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोङ-उन के बीच हुई शिखर वार्ता असफल रही, क्योंकि निष्क्रियता और प्रतिबंध हटाने पर सहमति नहीं बन सकी। तब से उत्तर कोरिया अपनी ‘अपरिवर्तनीय आणविक शक्ति’ की स्थिति पर कायम है।