
जंगली बिल्लियों के संरक्षण के लिए ‘एक घर, एक कहरसा’ कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण
बर्दिया के ठाकुरबाबा में रस्टी–स्पॉटेड कैट संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों के जीविकोपार्जन से जुड़ा ‘एक घर, एक कहरसा’ कार्यक्रम संचालित किया गया है। ११ साउन, काठमांडू। दुनिया की सबसे छोटी जंगली बिल्ली मानी जाने वाली ‘रस्टी–स्पॉटेड कैट’ के संरक्षण के उद्देश्य से स्थानीय लोगों के जीविकोपार्जन के साथ जोड़ते हुए बर्दिया जिले में ‘एक घर, एक कहरसा’ कार्यक्रम संचालित किया गया है। ठाकुरबाबा नगरपालिका–९, खुशालपुर में आयोजित कार्यक्रम में १४ स्थानीय लोग उपस्थित थे। उन्हें जैविक सब्जी खेती, कम्पोस्ट खाद निर्माण, मिट्टी प्रबंधन और सतत कृषि अभ्यास के बारे में एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक प्रतिभागी को कृषि उपकरण और मौसमी सब्जियों के बीज भी वितरित किए गए, आयोजकों ने बताया।
यह कार्यक्रम स्मॉल वाइल्ड कैट कंजर्वेशन फाउंडेशन (एसडब्ल्यूसीसीएफ), मोहम्मद बिन जायेद स्पीशीज कंजर्वेशन फंड (एमबीजेडएससीएफ) और रस्टी–स्पॉटेड कैट वर्किंग ग्रुप–बर्दिया के सहयोग से संचालित हुआ। कार्यक्रम के संयोजक रामजन चौधरी थे और प्रशिक्षण पशु चिकित्सक अशिष चौधरी द्वारा दिया गया। आयोजकों के अनुसार घर-घर कहरसा के विकास से वन संसाधनों पर निर्भरता कम होगी, वन क्षेत्र में मानव दबाव घटेगा और इससे जंगली जानवरों के आवास संरक्षण में मदद मिलेगी।
यह वन में आग लगने के जोखिम को कम करेगा, अवैध शिकार घटाएगा तथा रस्टी–स्पॉटेड कैट के आहार प्रजातियों के संरक्षण पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा, ऐसा विश्वास किया जाता है। रस्टी–स्पॉटेड कैट नेपाल, भारत और श्रीलंका में ही पाई जाने वाली दुर्लभ जंगली बिल्ली है। इसका शरीर लंबाई में ३५ से ४८ सेंटीमीटर और वजन ०.९ से १.६ किलो तक होता है। शरीर पर मौजूद खैरा रंग के छोटे धब्बों के कारण इसे नेपाल में ‘खैया थोप्ले बिरालो’ भी कहा जाता है। यह बिल्ली मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहती है, अकेले रहती है और अत्यंत शर्मीली स्वभाव की होती है।
मूस, छोटे स्तनधारी जानवर, पक्षी, छिपकली, मेंढक और कीड़े इसके मुख्य आहार हैं। मूस की संख्या नियंत्रित कर पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ऐसा संरक्षणकर्मियों का कहना है। कार्यक्रम संयोजक रामजन चौधरी के अनुसार, संवत २०६९ में बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज में इस प्रजाति का पहला तस्वीर सहित अभिलेखीकरण किया गया था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों से वन आग नियंत्रण, अवैध शिकार की रोकथाम, जंगली जानवरों के सड़क दुर्घटना कम करने और प्राकृतिक आवास संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया गया। एसडब्ल्यूसीसीएफ, एमबीजेडएससीएफ और रस्टी–स्पॉटेड कैट वर्किंग ग्रुप बर्दिया में विद्यालय स्तर पर संरक्षण जागरूकता, वृक्षारोपण, आवास पुनःस्थापना, होमस्टे प्रोत्साहन, सतत कृषि और आय अर्जन कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।