
आईसीसी ने टी-20 विश्व कप को 32 टीमों तक विस्तार करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने साल 2030 से टी-20 विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 24 करने और साल 2032 तक इसे 32 तक बढ़ाने की योजना बनाई है। टी-20 विश्व कप के विस्तार से नेपाल सहित एसोसिएट राष्ट्रों को विश्व कप में नियमित उपस्थिति का मौका मिलेगा और उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। आईसीसी ने एकदिवसीय विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 14 से घटाकर 12 करने का भी फैसला किया है, जिसे खिलाड़ियों और अन्य सरोकारवालों द्वारा व्यापक असंतोष और आलोचना मिली है। 12 साउन, काठमांडू।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् (आईसीसी) पुरुष टी-20 विश्व कप को और विस्तार देने की तैयारी में है। फुटबॉल विश्व कप को 48 टीमों तक बढ़ाने वाले फीफा के हालिया फैसले के बाद, आईसीसी ने भी टी-20 विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। ब्रिटेन के मीडिया आउटलेट द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, आईसीसी ने 2030 में इंग्लैंड, वेल्स और आयरलैंड में होने वाले टी-20 विश्व कप में टीमों की संख्या 24 करने का लक्ष्य रखा है और बाद में 2032 तक प्रतियोगिता को 32 टीमों तक विस्तारित करने की दीर्घकालीन योजना बनाई है।
2032 के विश्व कप की मेजबानी अभी तय नहीं हुई है। हाल ही में भारत और श्रीलंका में संपन्न टी-20 विश्व कप में एसोसिएट देशों की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता देखने को मिली है, जिसके बाद प्रतियोगिता विस्तार के पक्ष में मजबूत आधार तैयार हुआ है। इस संस्करण में जिम्बाबे ने ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को हराकर समूह चरण पार किया था, वहीं इटली और नेपाल ने इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों को कड़ी चुनौती दी थी। पूर्व में 20 टीमों वाली इस विश्व कप में चार समूहों से सुपर-8 चरण खेला गया था, लेकिन 2028 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होने वाले विश्व कप से नए फॉर्मेट को लागू किया जाएगा।
नए फॉर्मेट में पांच समूह होंगे, प्रत्येक समूह में चार-चार टीमें होंगी। प्रत्येक समूह की शीर्ष दो टीमें सुपर-10 में प्रवेश करेंगी, फिर सेमीफाइनल खेले जाएंगे। यदि प्रतियोगिता 24 टीमों तक बढ़ती है, तो प्रारूप के अनुसार छह समूह होंगे, हर समूह में चार-चार टीमें होंगी और प्रत्येक समूह की शीर्ष दो टीमें सुपर-12 में पहुंचेंगी। इस विस्तार से नेपाल समेत एसोसिएट देशों को सबसे बड़ा फायदा होने की संभावना है। हाल के वर्षों में तेजी से क्रिकेट विकसित कर रहे जर्मनी और नाइजीरिया जैसी टीमें पहली बार विश्व कप खेलने का मौका पा सकती हैं। इसी तरह मलेशिया, स्पेन, कुवैत, कतर, जर्सी, बहरीन, बर्मूडा और सऊदी अरब की टीमें भी विश्व कप की दौड़ में मजबूत पकड़ बना सकती हैं। नेपाल, इटली, युगांडा, पापुआ न्यू गिनी, हांगकांग, अमेरिका और कनाडा जैसी टीमें इस विस्तार के बाद विश्व कप में नियमित उपस्थिति दर्ज करा सकती हैं।
हालांकि, आईसीसी की इस विस्तार योजना के साथ एक और निर्णय विवाद का विषय बना है। आईसीसी ने आगामी एकदिवसीय विश्व कप में टीमों की संख्या 14 से घटाकर 12 करने का निर्णय लिया है, जिससे एसोसिएट देशों के अवसर और सीमित होने का खतरा है और इस फैसले की भारी आलोचना हो रही है। नए एकदिवसीय विश्व कप फॉर्मेट के अनुसार, निचले दर्जे की तीन टीमें सीधे मुख्य प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाएंगी, उन्हें प्ले-इन प्रतियोगिता खेलनी होगी और इसके बाद एक टीम को अंतिम रूप से विश्व कप में जगह मिलेगी। विश्व क्रिकेटर्स एसोसिएशन (WCA) के मुख्य कार्यकारी टॉम मोफैट ने आईसीसी के इस फैसले को विश्व क्रिकेट के विकास के लक्ष्य के विपरीत बताया है। उनके अनुसार, जब विश्व क्रिकेट के विस्तार की बात हो रही हो तो विश्व कप में अवसर घटाना विरोधाभासी है। स्कॉटलैंड के कप्तान रिची बेरिंगटन ने कहा है कि इस तरह के महत्वपूर्ण फैसलों में खिलाड़ियों से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया है और वे असंतुष्ट हैं। नीदरलैंड्स के कप्तान स्कॉट एडवर्ड्स ने कहा है कि विश्व कप के लिए चयन होना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इस चयन की कीमत कम करना निराशाजनक है। आईसीसी ने टी-20 क्रिकेट को वैश्विक बनाने के उद्देश्य से विश्व कप को बढ़ाने की योजना बनाई है, लेकिन एकदिवसीय विश्व कप में टीमों की संख्या घटाने का निर्णय अभी भी क्रिकेट समुदाय में चर्चा का विषय बना हुआ है।