
निर्वासन में रहते हुए भी शेख हसनाह की राजनीतिक सक्रियता कायम
समाचार सारांश बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसनाह ने निर्वासन में होने के बावजूद देश वापस लौटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए राजनीतिक सक्रियता जारी रखने का संकेत दिया है। उनके संभावित पुनरागमन से अवामी लीग के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ने और वर्तमान सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है, यह विश्लेषकों का अनुमान है। बांग्लादेश सरकार ने हसनाह के देश लौटने पर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने और उन्हें सुपुर्दगी के लिए भारत से औपचारिक अनुरोध भी किया है। २० साउन, ढाका (रासस/एएफपी)।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसनाह ने देश लौटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए निर्वासन के दौरान भी देश की राजनीति में सक्रिय रहने के संकेत दिए हैं। विश्लेषक उनके हालिया बयानों को अवामी लीग के समर्थकों को एकजुट रखने, पार्टी का राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी सान्दर्भिकता को कायम रखने के प्रयास के रूप में देखते हैं। भारत में निर्वासन में रह रहीं ७८ वर्षीय हसनाह ने जुलाई में एएफपी के साथ बातचीत में वर्ष के अंत तक बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, जेल जाना पड़ सकता है या जान गंवानी पड़ सकती है, फिर भी जनता के आग्रह पर वे देश लौटना चाहती हैं।
भारत जा रही हेलीकॉप्टर के दो वर्ष पूरे होने पर बुधवार को ‘शेख हसनाह का घर वापसी’ शीर्षक से नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में वे टेलीफोन के जरिए संबोधित करेंगी। ढाका के नॉर्थ साउथ विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर मोहम्मद जलाल उद्दीन सिकदर के अनुसार, हसनाह आज भी अवामी लीग के लिए एक प्रभावशाली राजनीतिक प्रतीक हैं और उनका संभावित पुनरागमन पार्टी के अस्तित्व से जुड़ा विषय बन गया है। अवामी लीग के एक वरिष्ठ नेता ने भी कहा कि पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता गिरफ्तार होने के कारण हसनाह का वापस आने की इच्छा जताना उनके प्रति जिम्मेदारी का भाव है।
उनके अनुसार यह दल के भीतर मनोबल बनाए रखने में मदद कर सकता है। ढाका से प्रकाशित ‘प्रथम आलो’ दैनिक ने हसनाह के देश वापसी की घोषणा को पार्टी पर लगे प्रतिबंध हटाने, कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और राजनीतिक स्थिति पुनः स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा बताया है। हालांकि, अवामी लीग के पूर्व वरिष्ठ नेता और वर्तमान आलोचक महमूदुर रहमान मन्ना ने इस धारणा को नकारते हुए कहा कि पार्टी को पुनर्गठन के लिए अन्य नेताओं को अवसर दिया जा सकता है, लेकिन हसनाह ने ऐसा नहीं किया है।
विश्लेषक सिकदर के अनुसार हसनाह का संभावित पुनरागमन प्रधानमंत्री तारिक रहमान की वर्तमान सरकार पर और अधिक राजनीतिक दबाव डाल सकता है। वे मानते हैं कि हसनाह के देश लौटने पर कानूनी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इससे राजनीतिक अस्थिरता भी उत्पन्न हो सकती है। इस बीच, प्रधानमंत्री के सलाहकार झाहेद उर रहमान ने स्पष्ट किया है कि सरकार हसनाह का स्वागत करेगी और कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने भारत से हसनाह की सुपुर्दगी के लिए औपचारिक अनुरोध किया है।
हसनाह के ढाका की अदालत में गैरहाजिरी पर उन्हें उकसाने, हत्या करवाने का आदेश देने और अत्याचार रोकने में विफल रहने के आरोप में फैसला सुनाया गया था। हसनाह के संभावित पुनरागमन का विषय बांग्लादेश और भारत के बीच सुधरते संबंधों में संवेदनशील माना जाता है। ढाका ने उनकी सुपुर्दगी के लिए बार-बार अनुरोध किया है, जबकि भारत ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया चल रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयस्वाल ने ‘शेख हसनाह का घर वापसी’ कार्यक्रम में भारत सरकार की कोई भागीदारी नहीं होने और वे उसमें व्यक्त विचारों का समर्थन नहीं करने की बात कही है। हालांकि, बांग्लादेश के कुछ विश्लेषक हसनाह के मामले को दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों पर प्रभाव डालने वाला मसला मानते हैं। ढाका के ‘अमर देश’ दैनिक के संपादक महमूदुर रहमान ने इसे नई दिल्ली और ढाका के बीच शक्ति संतुलन से जुड़ा राजनीतिक मुद्दा बताया है।