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बर्दियाका बाघों का दुर्लभ व्यवहार विश्व के समक्ष प्रकट

बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज में दिखे बाघों के दुर्लभ व्यवहार पर आधारित बीबीसी वृत्तचित्र ‘टाइगर आइलैंड’ ने नेपाल के बाघ संरक्षण की सफलता को विश्व स्तर पर चर्चा में ला दिया है। वृत्तचित्र में मादा बाघ द्वारा शावकों की देखभाल करना और नर बाघ का संरक्षण में सक्रिय योगदान देना जैसे नए तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। सन् 2010 में 121 के करीब बाघ थे, जो अब 400 से अधिक हो चुके हैं, लेकिन संख्या में बढ़ोतरी के साथ मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। 20 साउन, Kathmandu।

जंगल में देखे गए बाघों के ऐसे दुर्लभ और पहले रिकॉर्ड में न दर्ज किए गए व्यवहार कैमरे में कैद होने के बाद नेपाल के बाघ संरक्षण की सफलता ने पुनः वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज एवं आस-पास के इलाकों में फिल्मांकन किया गया बीबीसी वृत्तचित्र ‘टाइगर आइलैंड: अ हिडन वर्ल्ड रिवील्ड’ ने बाघों के असाधारण व्यवहारों के साथ-साथ समुदाय आधारित संरक्षण के नेपाली मॉडल को विश्व के दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया है। इसका विशेष प्रदर्शन बुधवार को काठमांडौ के ठमेल स्थित एलफ्ट होटल में टूरिज्म इन्फो नेपाल द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें पर्यटन, संरक्षण और सरकारी क्षेत्र के सौ से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।

बीबीसी और पीबीएस के सहयोग से निर्मित इस वृत्तचित्र का छायांकन बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज के दूरस्थ सीमावर्ती नदी टापू और सामुदायिक वन क्षेत्रों में किया गया है। वृत्तचित्र में गोमा, माला और जुगिनी नामक मादा बाघों की गतिविधियों को गहराई से दर्शाते हुए असाधारण बाघ व्यवहार के दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। विशेष रूप से, मादा बाघों द्वारा मिल-जुलकर शावकों की देखभाल और नर बाघ द्वारा भी उनके संरक्षण एवं देखभाल में सक्रिय भागीदारी करने के दृश्यों ने बाघ व्यवहार को लेकर स्थापित समझ को चुनौती दी है, जो निर्माण टीम का दावा है।

सन् 2022 के अंत में शुरू हुई इस डॉक्यूमेंट्री में बीबीसी टीम ने बर्दिया में मादा बाघों की गतिविधियों का लंबे समय तक अध्ययन और फिल्मांकन करके नए तथ्य तथा दृश्य एकत्रित किए हैं। ड्रोन, थर्मल कैमरा, नाइट-विजन तकनीक और विस्तृत क्षेत्र निगरानी का इस्तेमाल कर बाघों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया है। वृत्तचित्र के दूसरे भाग में रात के समय बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज के अंदर बाघों द्वारा शिकार करने के दुर्लभ दृश्य भी दर्शाए गए हैं। कार्यक्रम में नेपाल पर्यटन बोर्ड के पूर्व सीईओ दीपकराज जोशी ने कहा कि नेपाल की बाघ संरक्षण सफलताओं को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच प्रचारित करने में यह वृत्तचित्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने वन्यजीव संरक्षण को प्राकृतिक आधार पर और सतत पर्यटन से जोड़कर नेपाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक स्थापित किया जा सकता है, यह भी व्यक्त किया। वृत्तचित्र प्रदर्शन के बाद सजल प्रधान के संयोजन में एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। चर्चा में बर्दिया के प्रकृतिक गाइड सुशीला महतरा और मञ्जु महतरा ने वृत्तचित्र के निर्माण में बाघों की खोज, निगरानी व ट्रैकिंग के दौरान किए गए कार्यों और अनुभवों को साझा किया। साथ ही नेपाल के बाघ संरक्षण की यात्रा में मिली उल्लेखनीय प्रगति पर चर्चा हुई। सन् 2010 में जहां बाघों की संख्या लगभग 121 थी, वह अब 400 से ऊपर पहुंच चुकी है, यह तथ्य उपस्थित लोगों ने साझा किया और नेपाल को बाघ संरक्षण के क्षेत्र में विश्वस्तरीय सफल मॉडल के रूप में स्थापित करने में सफल बताया। हालांकि, बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन एक नई चुनौती भी बनी है। संरक्षण की उपलब्धियों को दीर्घकालिक बनाने के लिए संरक्षित क्षेत्रों के आस-पास के समुदायों के हित, सुरक्षा और सहभागिता को समान महत्व देना आवश्यक है, इस बात पर सभी ने जोर दिया।