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सर्वोच्च अदालत का अंतरिम आदेश: इन्भेस्टमेन्ट मेगा बैंक के अध्यक्ष और संचालकों को गिरफ्तार न करने का निर्देश

सर्वोच्च अदालत ने नेपाल इन्भेस्टमेन्ट मेगा बैंक के अध्यक्ष और संचालकों को तत्काल गिरफ्तार न करने का अल्पकालीन अंतरिम आदेश जारी किया है। जिला अदालत काठमांडू ने स्मार्ट टेलिकॉम के ज़मानती संपत्तियों के लिलाम मामले में बैंक संचालकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बाद उन्होंने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत ने अंतरिम आदेश पर चर्चा के लिए आगामी २५ साउन को दोनों पक्षों को तलब किया है और तब तक गिरफ्तारी न करने का निर्देश दिया है।

२१ साउन, काठमांडू। सर्वोच्च अदालत ने नेपाल इन्भेस्टमेन्ट मेगा बैंक के अध्यक्ष समेत अन्य संचालकों को गिरफ्तार न करने का आदेश दिया है। सरकार स्मार्ट टेलिकॉम की संपत्ति बिना सरकारी अनुमति बैंक द्वारा लिलाम करने के आरोप में जांच कर रही है। इसी विषय में और जांच के लिए नेपाल पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) के अनुरोध पर जिला अदालत काठमांडू ने संचालक समिति के सभी सदस्यों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद नेपाल राष्ट्र बैंक ने सभी संचालकों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो की कार्रवाई और जिला अदालत के आदेश के खिलाफ बैंक अध्यक्ष पृथ्वीबहादुर पांडे एवं अन्य संचालकों की ओर से बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ज्योति प्रकाश पांडे ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की थी। उसी याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए सर्वोच्च के न्यायाधीश टेकप्रसाद ढुंगान के एकल इजलास ने गिरफ्तारी न करने का अल्पकालीन अंतरिम आदेश जारी किया।

अध्यक्ष पांडे ने इन्भेस्टमेन्ट मेगा बैंक से ऋणी स्मार्ट टेलिकॉम की हाइपोथिकेशन दस्तावेज के अनुसार धितो लिलाम से संबंधित आपराधिक जांच को तत्काल रोकने, अर्थात् गिरफ्तारी और धरपकड़ न करने के लिए प्रेरणात्मक निषेध सहित स्थायी आदेश और अंतरिम आदेश देने की मांग की थी। बैंक अध्यक्ष पांडे, संचालक प्रजन्य राजभण्डारी, कविकुमार टिबरेवाल, दीपांकर शाक्य उदय, शालिकराम बेलबासे और शोभा श्रेष्ठ को तत्काल गिरफ्तार न करने का अल्पकालीन अंतरिम आदेश दिया गया है। हालांकि, अंतरिम आदेश जारी करने के विषय में दोनों पक्षों के बहस के बाद फैसला सुनाया जाएगा और अदालत ने २५ साउन को दोनों पक्षों को चर्चा के लिए तलब किया है। उस दिन ही अंतरिम आदेश जारी होगा या नहीं उसका निर्णय होगा।