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बांग्लादेश: शेख हसिना ढाका लौटने की तैयारी में, भारत को मिल सकता है संभावित लाभ

सन् २०२४ के छात्र आंदोलन के बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसिना ने देश छोड़कर भारत में शरण ली थी। पिछले सप्ताह उन्होंने दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पहली बार सार्वजनिक रूप से बात की। इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्य रूप से अपनी पार्टी अवामी लीग और बांग्लादेश लौटने की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आगामी दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई। भारत में पत्रकारों से बातचीत करने की अनुमति मिलने पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी असंतुष्टि जताई है। इससे पहले शेख हसिना ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में देश वापस लौटने की घोषणा की थी।

शेख हसिना का घर लौटने का ऐलान भारत और बांग्लादेश के बीच तनावपूर्ण स्थिति में सुधार लाएगा या स्थिति और खराब होगी? उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ दिन पहले बीबीसी न्यूज के शुभज्योति घोष ने भारत-बांग्लादेश संबंधों के जानकार और अवामी लीग के नेताओं से बातचीत के आधार पर तैयार की गई विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में बताया है कि शेख हसिना पिछले दो वर्षों से भारत में हैं। उन्होंने दिसंबर में अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बांग्लादेश लौटकर अदालत में आत्मसमर्पण करने की इच्छा जाहिर की, जिसके बाद दोनों देशों में हलचल मची है।

हालांकि, भारत में विश्लेषक उनकी इस अभिव्यक्ति को ‘देश लौटने की निश्चित घोषणा’ के बजाय ‘स्थिति की जांच’ के रूप में देख रहे हैं। आधिकारिक तौर पर भारत सरकार के व्यवहार में शेख हसिना के प्रवास को लेकर कोई ठोस बदलाव नहीं दिखा है। हाल ही में भारत के विदेश और गृह मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने बीबीसी को बताया, “भारत ने शेख हसिना को आमंत्रित नहीं किया है, न ही उन्हें शरण दी है, और न ही उन्हें जबरदस्ती निष्कासित करने की योजना है।” एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यदि वे वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन कर घर लौटना चाहती हैं तो लौट सकती हैं, यदि भारत में रहना बेहतर लगे तो वहीं रहना ठीक होगा। इस मामले में हमारे पास नई कोई सूचना नहीं है।”