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किसान घाटे में, उपभोक्ता परेशान, बिचौलिये और व्यापारी मुनाफे में

समाचार सारांश की समीक्षा के बाद तैयार। बर्डफ्लू संक्रमण के कारण उत्पादन में कमी आई है, जिसके चलते कुखुरा व्यवसायी संघ ने साउन महीने में अंडे के दाम चार बार बढ़ाए हैं। किसान लागत मूल्य भी पूरा नहीं पा रहे हैं और वे परेशान हैं, जबकि बिचौलिये और व्यापारी कर्टेलिंग करके उपभोक्ताओं को महंगे दाम पर समान खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। उपभोक्ता अधिकारकर्मियों का कहना है कि किसी व्यावसायिक संघ को मूल्य निर्धारण का कानूनी अधिकार नहीं है और सरकार की निगरानी भी ठीक तरह से नहीं हो रही है, जिसके कारण वे आलोचना कर रहे हैं। २७ साउन, काठमाडौं। आमतौर पर नेपाली साउन महीने में मछली और अंडा कम खाते हैं। ऐसे समय में दाम गिरना चाहिए था, लेकिन इस बार बाजार की स्थिति उलट है। साउन से अंडा और कुखुरे के मांस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं के रसोई खर्च बढ़ गए हैं। अंडा और मासु के दाम बढ़ने से लोग सोच सकते हैं कि किसान को अच्छा मुनाफा हो रहा है, लेकिन हकीकत अलग है। किसान घाटे में हैं और उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिल रही। बिचौलिये और व्यापारी बाजार नियंत्रित करके अत्यधिक लाभ कमा रहे हैं।

साउन में अंडा के दाम चार बार बढ़े
नेपाल लेयर्स कुखुरापालक संघ ने इस साउन महीने में बार-बार अंडे के फार्म मूल्य बढ़ाए हैं। शुरुआत में २ साउन को एक्सएल अंडा प्रति क्रेट ४६५, बड़ा अंडा ४५० और मीडियम अंडा ४२० रुपये था। लेकिन २६ साउन तक एक्सएल अंडे की कीमत ५६०, बड़ा अंडा ५४५ और मीडियम अंडा ५०० रुपये तक पहुंच गई। संघ का कहना है कि ग्राहक को प्रति अंडे २५ रुपए की ही बढ़ोतरी हुई है, लेकिन खुदरा दुकानों में अंडा ३० रुपये से ज्यादा बिक रहा है। बिचौलिये और खुदरा व्यापारी अंडे के आकार देखे बिना सस्ते दामों पर किसान से खरीद कर उपभोक्ताओं को महंगे दामों पर बेच रहे हैं।

मांस के दामों में भी कर्टेलिंग
कुखुरे के मांस में कम से कम दो बार मूल्य वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय कुखुरा बिक्री व्यवसायी संघ ने २२ और २६ साउन को दाम बढ़ाए हैं। जिंदा कुखुरा का दाम २४० से बढ़कर २५० और थोक में तैयार मांस का दाम ३३० से ३४५ रुपये हुआ है। लेकिन उपभोक्ताओं को खुदरा दुकानों में प्रति किलो ३८० से ४१० रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। दाम बढ़ने का कारण बर्डफ्लू संक्रमण बताया गया है। पशु सेवा विभाग के अनुसार पिछले चार महीनों में बर्डफ्लू के कारण ८ लाख ३५ हजार ५ सय ६३ पक्षी और १२ लाख २५ हजार ५ सय ३६ अंडे नष्ट हो चुके हैं।

नेपाल लेयर्स कुखुरापालक संघ के अध्यक्ष विनोद पोखरेल के अनुसार बर्डफ्लू की वजह से लगभग १० से १२ लाख अंडा देने वाली लेयर्स कुखुराएं देशभर नष्ट हो गई हैं। उत्पादन कम हुआ है, लेकिन बाजार की मांग बढ़ रही है। बावजूद इसके किसान घाटे में हैं। ‘‘किसान के लिए एक क्रेट अंडा बनाना ५७३ रुपये का खर्च है, लेकिन उन्हें बड़ा अंडा ५४५ रुपये ही मिल पाता है,’’ पोखरेल ने कहा। कुखुरापालन व्यवसायी भी मानते हैं कि बर्डफ्लू ने किसानों को नुकसान पहुंचाया है और अब पोल्ट्री फार्म खाली हैं। सरकार ने भारतीय कुखुरा और अंडे के आयात पर रोक लगा दी है, जिससे स्थानीय बाजार में अभाव पैदा हुआ है। हालांकि दाना और कच्चे माल की महंगाई की बात गलत है, वे कहते हैं।

कुखुरा और अंडे के बाजार में बिचौलियों का नियंत्रण:
एक व्यवसायी कहते हैं कि बाजार में कुखुरा और अंडा पूरी तरह सब्जी बाजार की तरह हो गया है, जहां किसान सस्ते दाम पर बेचता है लेकिन उपभोक्ता महंगे दाम पर खरीदता है। किसान के पास बाजार तक सीधी पहुंच नहीं होती, इसलिए डीलर द्वारा तय कीमत पर उसे बेचने को मजबूर होना पड़ता है। संघों की भूमिका संदिग्ध है, जो किसानों को घाटे में डालते और उपभोक्ताओं को लूटते हैं।

उपभोक्ता अधिकारकर्मी माधव तिमल्सिना का कहना है कि व्यवसायी संघों का मूल्य निर्धारण करना गैरकानूनी है। उनकी मानें तो वर्तमान कानून में संघों को दाम तय करने का अधिकार नहीं दिया गया है। बाजार में दामों की बढ़ोतरी को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी संघों की नहीं बल्कि सरकार की है। सरकार को बेहतर निगरानी करनी चाहिए। सरकार की चुप्पी और कमजोर नियंत्रण इसका मुख्य कारण है, उन्होंने कहा। उन्होंने कहा, ‘‘संघ का दाम तय करना गैरकानूनी है, इसलिए सरकार को तत्काल नियंत्रण करना चाहिए।’’

पोल्ट्री व्यवसायी मंच नेपाल के सचिव जयराम महत ने कहा है कि सप्लायर्स और बिचौलिया बाजार की कमी का फायदा उठाकर किसान और उपभोक्ताओं को धोखा दे रहे हैं। महत के अनुसार बर्डफ्लू के कारण किसान को घाटा हुआ है और सरकार लागत अनुसार कीमत सुरक्षित नहीं कर पाने के कारण समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।

याद रहे कि बर्डफ्लू संक्रमित पोल्ट्री फार्म को तीन महीने तक निष्क्रिय रखना अनिवार्य है। वर्षा के कारण किसान नए चूजों को पालने में उत्साहित नहीं हैं। इसलिए साउन महीने मांस की मांग कम होती है, लेकिन आगामी दशहरा में कीमतों में सुधार की उम्मीद है।