
संघीय अदालत ने ट्रम्प प्रशासन की ७५ देशों के आप्रवासी वीजा प्रतिबंध को रद्द किया
अमेरिकी संघीय अदालत ने नेपाल सहित ७५ देशों के नागरिकों को आप्रवासी वीजा जारी करने से रोक लगाने वाले ट्रम्प प्रशासन की नीति को कानून-विपरीत मानते हुए खारिज कर दिया है। न्यायाधीश जेनेट वर्गास ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को इस नीति को लागू करने का वैधानिक अधिकार नहीं होने और राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव किये जाने का निर्णय सुनाया है। अदालत के फैसले से अन्य कानूनी आधारों पर वीजा अस्वीकृतियों में स्वतः बदलाव नहीं होगा, और प्रशासन पुनर्विचार कर सकता है। ७ भदौ, काठमांडू।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा नेपाल सहित ७५ देशों के नागरिकों के आप्रवासी वीजा जारी करने पर लगाई गई रोक को संघीय अदालत ने रद्द कर दिया है। मैनहैटन स्थित अमेरिकी संघीय जिला न्यायालय की न्यायाधीश जेनेट वर्गास ने इस नीति को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द किया है। न्यायाधीश वर्गास ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को इस तरह की नीति लागू करने का वैध अधिकार न होने पर भी प्रकाश डाला है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस वर्ष जनवरी में विश्व के लगभग ४० प्रतिशत देशों से आप्रवासी वीजा जारी करने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकते हुए ७५ देशों के नागरिकों को लक्षित कर रोक लगा दी थी। न्यायाधीश वर्गास ने वीजा अस्वीकृत करते समय आवेदनकर्ताओं के व्यक्तिगत तथ्यों का मूल्यांकन करने के कानूनी प्रावधान को महत्व दिया है। फैसले के अनुसार, रुबियो द्वारा अमेरिकी कूटनीतिक तथा वाणिज्यिक कार्यालयों को भेजे गए निर्देश में उल्लेख था कि आवेदनकर्ता द्वारा सार्वजनिक बोझ न बनने के अतिरिक्त प्रमाण प्रस्तुत करने के बाद भी वीजा अस्वीकृत किया जा सकता है।
अदालत ने प्रशासन के पक्ष में एक सीमित विषय पर निर्णय दिया है। न्यायाधीश वर्गास ने माना है कि जब तक यह नीति औपचारिक नियम नहीं बन जाती, तब तक इसे लागू करने से पहले सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए खोलने का कानूनी आवश्यक नहीं है। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा नियुक्त की गई न्यायाधीश वर्गास ने दोनों पक्षों को शेष मुद्दों को कैसे आगे बढ़ाना है, इसका प्रस्ताव ११ सितंबर तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।