
ट्रम्प के दबाव से इरान की अर्थव्यवस्था कमजोर, जानिए ये ५ तरीके
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर आत्मसमर्पण कराने की ‘इकोनोमिक डी-डे’ रणनीति को आगे बढ़ाया है। अमेरिकी नाकाबंदी के बाद इरान का रियाल प्रति डॉलर 20.2 लाख तक गिर गया है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 2026 में मुद्रास्फीति 68.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। तेहरान के आत्मसमर्पण के कोई संकेत नहीं दिख रहे, लेकिन कुछ इरानी अधिकारी एवं विशेषज्ञ युद्ध समाप्ति के दबाव बढ़ने की संभावना जता रहे हैं।
इरान में युद्ध शुरू हुए अब एक महीने से अधिक हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने तेहरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिए हैं। उनका मुख्य उद्देश्य इरानी नेतृत्व को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना है। ट्रम्प का यह अभियान यह परखने वाला है कि इरानी नेतृत्व कितनी आर्थिक पीड़ा सह सकता है। उन्होंने पिछले सप्ताह इरान को ‘इकोनोमिक डी-डे’ का सामना करने की चेतावनी दी थी।
इरान पहले होर्मुज स्ट्रेट से निर्यात होने वाले तेल से भारी आय करता था, लेकिन अप्रैल से लागू अमेरिकी नाकाबंदी ने इस आय स्रोत को काफी सीमित कर दिया है। अब इरान को युद्ध के खर्च चलाने के लिए आंतरिक कर, तेल के अलावा अन्य निर्यात, और पूर्व युद्धकालीन तेल आय पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हालांकि, इरान ने आत्मसमर्पण का कोई संकेत नहीं दिया है।
ब्लूमबर्ग इकोनोमिक्स के आर्थिक रणनीतिज्ञ क्रिस केनेडी ने कहा, “अगर अमेरिका पूर्ण सैन्य कार्रवाई बंद करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि इरान भी ऐसा करेगा।” विशेषज्ञों का मानना है कि इरान को कुछ महीनों में गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है, जो युद्ध प्रयास और आंतरिक स्थिरता दोनों पर प्रभाव डालेगा।